भारत-नेपाल रेल इतिहास: कोलकाता से बीरतनगर पहुँची पहली सीधी कंटेनर मालगाड़ी, 40 वैगनों में कनोला खेप
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने 28 जुलाई 2025 को भारत-नेपाल रेल संपर्क के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा, जब 40 वैगनों वाली पहली सीधी वाणिज्यिक कंटेनर मालगाड़ी ने कोलकाता बंदरगाह से नेपाल के बीरतनगर सीमा शुल्क यार्ड तक की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। इस ट्रेन में कनोला की खेप लदी थी और इसने संशोधित भारत-नेपाल रेल पारगमन प्रोटोकॉल के तहत बिना किसी सीमा-स्थानांतरण के सीधे गंतव्य तक माल पहुँचाया।
मुख्य घटनाक्रम
NFR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिनजल किशोर शर्मा ने बताया कि इस ऐतिहासिक परिचालन के साथ संशोधित भारत-नेपाल रेल पारगमन प्रोटोकॉल का क्रियान्वयन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। यह उपलब्धि बिहार के जोगबानी और बीरतनगर के बीच स्थापित ब्रॉड-गेज रेल लिंक की नींव पर टिकी है, जिसका उद्घाटन जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से किया था।
यह ऐसे समय में आया है जब नवंबर 2025 में दोनों देशों के बीच संशोधित लेटर ऑफ एक्सचेंज पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने सीधी वाणिज्यिक रेल सेवा का मार्ग प्रशस्त किया।
व्यापार और रसद पर असर
अधिकारियों के अनुसार, इस नई व्यवस्था से पारगमन समय, रसद लागत और माल प्रबंधन में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। पहले, सीमा पर माल को एक वाहन से दूसरे वाहन में स्थानांतरित करना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। सीधी रेल आवाजाही इस बाधा को समाप्त करती है और दोनों देशों के बीच व्यापार दक्षता को नई ऊँचाई देती है।
गौरतलब है कि यह पहल केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं है — यह भारत-नेपाल के बीच आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक रणनीतिक कदम भी है।
NFR की बढ़ती क्षेत्रीय भूमिका
शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्क को सुदृढ़ करने में NFR की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। NFR द्वारा कार्यान्वित की जा रही अगरतला-अखाउरा (बांग्लादेश) रेल लिंक परियोजना भी पूर्णता के करीब है, जिससे पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के बीच रेल संपर्क और मज़बूत होने की उम्मीद है।
इस प्रकार NFR एक साथ दो पड़ोसी देशों — नेपाल और बांग्लादेश — के साथ रेल संपर्क का विस्तार कर रही है, जो पूर्वोत्तर भारत को क्षेत्रीय व्यापार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
क्या होगा आगे
शर्मा ने कहा कि NFR सीमा पार रेल संपर्क को और मज़बूत करने, माल ढुलाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और भारत-नेपाल के बीच बढ़ते व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस मार्ग पर नियमित वाणिज्यिक सेवाओं का विस्तार अपेक्षित है।