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विराटनगर आईसीपी पर पहुंची पहली कंटेनर मालगाड़ी, लॉजिस्टिक्स लागत में 20-30% कमी की उम्मीद

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विराटनगर आईसीपी पर पहुंची पहली कंटेनर मालगाड़ी, लॉजिस्टिक्स लागत में 20-30% कमी की उम्मीद

सारांश

विराटनगर आईसीपी पर पहली कंटेनर मालगाड़ी का आगमन महज एक खेप नहीं — यह नेपाल के पूर्वी व्यापार गलियारे का नया अध्याय है। नवंबर 2025 की संधि संशोधन के बाद बीरगंज का एकाधिकार टूटा और लॉजिस्टिक्स लागत में 20-30% कमी की उम्मीद ने नेपाली उद्योग को नई उम्मीद दी है।

मुख्य बातें

21 जुलाई 2025 को विराटनगर आईसीपी पर तीसरे देशों से आयातित माल लेकर पहली कंटेनर मालगाड़ी पहुंची।
मालगाड़ी में स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कैनोला अनाज से भरे 40 कंटेनर थे, जो 17 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुए।
ट्रेन कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) द्वारा संचालित थी; सभी कंटेनरों में ईसीटीएस ट्रैकिंग लगी थी।
नवंबर 2025 में नेपाल-भारत पारगमन संधि प्रोटोकॉल संशोधन के बाद यह सेवा संभव हुई, जिसमें सभी प्रकार के माल को रेल से लाने की अनुमति मिली।
रेल सेवा से लॉजिस्टिक्स लागत में 20 से 30 प्रतिशत कमी आने की उम्मीद; बीरगंज आईसीपी का कंटेनर रेल पर एकाधिकार समाप्त।
निकट भविष्य में उर्वरक और स्पंज आयरन के लिए भी रेल परिवहन की योजना, कॉनकॉर से बातचीत जारी।

पूर्वी नेपाल के विराटनगर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (आईसीपी) पर 21 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब तीसरे देशों से आयातित औद्योगिक कच्चा माल लेकर पहली कंटेनर मालगाड़ी यहाँ पहुंची। कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉनकॉर) द्वारा संचालित यह ट्रेन 17 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुई थी और इसमें स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग होने वाले कैनोला अनाज से भरे 40 उच्च-क्षमता कंटेनर थे। यह उपलब्धि नवंबर 2025 में नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में हुए संशोधन का पहला ठोस परिणाम है।

मुख्य घटनाक्रम

बिराटनगर कस्टम्स कार्यालय के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी उमेश श्रेष्ठ ने बताया कि मालगाड़ी सोमवार को आईसीपी पहुंची और भारतीय बंदरगाह से सीधी रेल माल सेवा की शुरुआत के उपलक्ष्य में मंगलवार दोपहर आईसीपी में एक औपचारिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। सभी कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ईसीटीएस) लगाया गया था, जिससे पूरे मार्ग के दौरान माल की निगरानी संभव हो सकी।

नेपाल के कोलकाता स्थित महावाणिज्य दूत झक्का प्रसाद आचार्य ने कोलकाता कस्टम्स, कोलकाता पोर्ट और कॉनकॉर के अधिकारियों के साथ मिलकर इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।

संधि संशोधन की पृष्ठभूमि

नवंबर 2025 में नेपाल और भारत ने नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के लिए लेटर ऑफ एक्सचेंज (एलओई) पर हस्ताक्षर किए थे। इस संशोधन से पहले केवल चार प्रकार की बल्क वस्तुओं — कोयला, क्लिंकर, सीमेंट और उर्वरक — को ही तीसरे देशों से रेल मार्ग द्वारा बिराटनगर आईसीपी तक लाने की अनुमति थी।

गौरतलब है कि इस प्रावधान को लागू होने में भारत की प्रशासनिक और नौकरशाही प्रक्रियाओं के कारण कई महीने लग गए। संशोधित प्रोटोकॉल के बाद अब तीसरे देशों से आने वाले सभी प्रकार के सामान को रेल के माध्यम से पश्चिमी नेपाल के भैरहवा सीमा शुल्क केंद्र तक भी पहुंचाया जा सकेगा।

लॉजिस्टिक्स और व्यापार पर असर

उमेश श्रेष्ठ के अनुसार, बिराटनगर आईसीपी से जुड़ी रेल सेवा शुरू होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। इससे पोर्ट डेमरेज चार्ज, कंटेनर डिटेंशन फीस और नेपाली आयातकों के अतिरिक्त सड़क परिवहन खर्च में भी कटौती होगी।

श्रेष्ठ ने कहा, 'पहले आयातकों को कोलकाता से तीसरे देश का सामान ट्रांसपोर्ट करने के लिए ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसे अब कंटेनर वाली रेल से अधिक कुशलता से पहुंचाया जा सकता है।' यह बदलाव नेपाली उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मज़बूत करेगा।

बीरगंज का एकाधिकार टूटा

इस सेवा के शुरू होने से पहले, भारतीय समुद्री बंदरगाहों से आने वाले कंटेनरयुक्त आयात के लिए रक्सौल (भारत) के निकट स्थित बीरगंज आईसीपी ही नेपाल का एकमात्र रेल-संपर्क वाला सीमा शुल्क केंद्र था। बिराटनगर आईसीपी के इस नेटवर्क में जुड़ने से नेपाल के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा और आयात मार्गों में विविधता आएगी।

आगे की योजनाएं

उमेश श्रेष्ठ ने जानकारी दी कि अब इस आईसीपी पर नियमित रूप से मालगाड़ियाँ आएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि नेपाली आयातक निकट भविष्य में उर्वरक और स्पंज आयरन की रेल परिवहन सुविधा के लिए कॉनकॉर के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह कदम नेपाल-भारत व्यापार संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि नवंबर 2025 में हस्ताक्षरित संशोधन को लागू होने में कई महीने लगे — जो भारतीय पक्ष की नौकरशाही प्रक्रियाओं की धीमी गति को उजागर करता है। 20-30% लागत कमी का अनुमान प्रभावशाली है, परंतु यह आंकड़ा तभी सार्थक होगा जब रेल सेवा नियमित और विश्वसनीय बने — न कि केवल प्रतीकात्मक उद्घाटन तक सीमित रहे। बीरगंज के एकाधिकार का टूटना नेपाल के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, किंतु भैरहवा तक विस्तार की समयसीमा अभी अस्पष्ट है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विराटनगर आईसीपी पर पहली कंटेनर मालगाड़ी कब और कहाँ से आई?
यह मालगाड़ी 17 जुलाई 2025 को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुई और 21 जुलाई को विराटनगर आईसीपी पहुंची। इसमें स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कैनोला अनाज से भरे 40 कंटेनर थे, जिन्हें कॉनकॉर द्वारा संचालित ट्रेन से लाया गया।
नेपाल-भारत पारगमन संधि में क्या संशोधन हुआ था?
नवंबर 2025 में नेपाल और भारत ने लेटर ऑफ एक्सचेंज पर हस्ताक्षर कर पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन किया। इससे पहले केवल कोयला, क्लिंकर, सीमेंट और उर्वरक जैसी चार बल्क वस्तुओं को ही रेल मार्ग से बिराटनगर आईसीपी तक लाने की अनुमति थी; संशोधन के बाद सभी प्रकार के माल के लिए यह मार्ग खुल गया।
इस रेल सेवा से नेपाली आयातकों को क्या फायदा होगा?
बिराटनगर सीमा शुल्क अधिकारी उमेश श्रेष्ठ के अनुसार, इस सेवा से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। पोर्ट डेमरेज चार्ज, कंटेनर डिटेंशन फीस और अतिरिक्त सड़क परिवहन खर्च घटने से नेपाली उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ेगी।
इससे पहले नेपाल में कंटेनर रेल माल के लिए कौन-सा केंद्र उपयोग होता था?
इस सेवा के शुरू होने से पहले रक्सौल (भारत) के निकट स्थित बीरगंज आईसीपी ही नेपाल का एकमात्र रेल-संपर्क वाला सीमा शुल्क केंद्र था, जहाँ से कंटेनरयुक्त आयात आता था। विराटनगर आईसीपी के जुड़ने से नेपाल के पूर्वी क्षेत्र को सीधा रेल संपर्क मिला है।
आगे किन वस्तुओं के लिए रेल परिवहन की योजना है?
उमेश श्रेष्ठ के अनुसार, नेपाली आयातक निकट भविष्य में उर्वरक और स्पंज आयरन की रेल परिवहन सुविधा के लिए कॉनकॉर के साथ बातचीत कर रहे हैं। साथ ही, संशोधित प्रोटोकॉल के तहत पश्चिमी नेपाल के भैरहवा सीमा शुल्क केंद्र तक भी रेल सेवा विस्तारित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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