विराटनगर आईसीपी पर पहुंची पहली कंटेनर मालगाड़ी, लॉजिस्टिक्स लागत में 20-30% कमी की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी नेपाल के विराटनगर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (आईसीपी) पर 21 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब तीसरे देशों से आयातित औद्योगिक कच्चा माल लेकर पहली कंटेनर मालगाड़ी यहाँ पहुंची। कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉनकॉर) द्वारा संचालित यह ट्रेन 17 जुलाई को कोलकाता बंदरगाह से रवाना हुई थी और इसमें स्वस्तिक ऑयल इंडस्ट्रीज के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग होने वाले कैनोला अनाज से भरे 40 उच्च-क्षमता कंटेनर थे। यह उपलब्धि नवंबर 2025 में नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में हुए संशोधन का पहला ठोस परिणाम है।
मुख्य घटनाक्रम
बिराटनगर कस्टम्स कार्यालय के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी उमेश श्रेष्ठ ने बताया कि मालगाड़ी सोमवार को आईसीपी पहुंची और भारतीय बंदरगाह से सीधी रेल माल सेवा की शुरुआत के उपलक्ष्य में मंगलवार दोपहर आईसीपी में एक औपचारिक कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। सभी कंटेनरों में इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ईसीटीएस) लगाया गया था, जिससे पूरे मार्ग के दौरान माल की निगरानी संभव हो सकी।
नेपाल के कोलकाता स्थित महावाणिज्य दूत झक्का प्रसाद आचार्य ने कोलकाता कस्टम्स, कोलकाता पोर्ट और कॉनकॉर के अधिकारियों के साथ मिलकर इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।
संधि संशोधन की पृष्ठभूमि
नवंबर 2025 में नेपाल और भारत ने नेपाल-भारत पारगमन संधि के प्रोटोकॉल में संशोधन के लिए लेटर ऑफ एक्सचेंज (एलओई) पर हस्ताक्षर किए थे। इस संशोधन से पहले केवल चार प्रकार की बल्क वस्तुओं — कोयला, क्लिंकर, सीमेंट और उर्वरक — को ही तीसरे देशों से रेल मार्ग द्वारा बिराटनगर आईसीपी तक लाने की अनुमति थी।
गौरतलब है कि इस प्रावधान को लागू होने में भारत की प्रशासनिक और नौकरशाही प्रक्रियाओं के कारण कई महीने लग गए। संशोधित प्रोटोकॉल के बाद अब तीसरे देशों से आने वाले सभी प्रकार के सामान को रेल के माध्यम से पश्चिमी नेपाल के भैरहवा सीमा शुल्क केंद्र तक भी पहुंचाया जा सकेगा।
लॉजिस्टिक्स और व्यापार पर असर
उमेश श्रेष्ठ के अनुसार, बिराटनगर आईसीपी से जुड़ी रेल सेवा शुरू होने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। इससे पोर्ट डेमरेज चार्ज, कंटेनर डिटेंशन फीस और नेपाली आयातकों के अतिरिक्त सड़क परिवहन खर्च में भी कटौती होगी।
श्रेष्ठ ने कहा, 'पहले आयातकों को कोलकाता से तीसरे देश का सामान ट्रांसपोर्ट करने के लिए ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसे अब कंटेनर वाली रेल से अधिक कुशलता से पहुंचाया जा सकता है।' यह बदलाव नेपाली उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मज़बूत करेगा।
बीरगंज का एकाधिकार टूटा
इस सेवा के शुरू होने से पहले, भारतीय समुद्री बंदरगाहों से आने वाले कंटेनरयुक्त आयात के लिए रक्सौल (भारत) के निकट स्थित बीरगंज आईसीपी ही नेपाल का एकमात्र रेल-संपर्क वाला सीमा शुल्क केंद्र था। बिराटनगर आईसीपी के इस नेटवर्क में जुड़ने से नेपाल के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा और आयात मार्गों में विविधता आएगी।
आगे की योजनाएं
उमेश श्रेष्ठ ने जानकारी दी कि अब इस आईसीपी पर नियमित रूप से मालगाड़ियाँ आएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि नेपाली आयातक निकट भविष्य में उर्वरक और स्पंज आयरन की रेल परिवहन सुविधा के लिए कॉनकॉर के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह कदम नेपाल-भारत व्यापार संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।