जनगणना में 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसविमेन' की अलग श्रेणी हो — एनएचआरसी की 'एडवाइजरी 2.0' में सिफारिश

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जनगणना में 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसविमेन' की अलग श्रेणी हो — एनएचआरसी की 'एडवाइजरी 2.0' में सिफारिश

सारांश

एनएचआरसी की 'एडवाइजरी 2.0' सिर्फ एक सुझाव नहीं — यह भारत की जनगणना को जेंडर-समावेशी बनाने की दिशा में एक ठोस दबाव है। 11 मंत्रालयों को दो महीने में जवाब देना होगा। अगर सिफारिशें मानी गईं, तो यह ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए नीतिगत दृश्यता का सबसे बड़ा कदम होगा।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 19 मई 2026 को 'एडवाइजरी 2.0' जारी कर जनगणना में 'ट्रांसमेन' , 'ट्रांसविमेन' और 'इंटरसेक्स' की अलग श्रेणी की सिफारिश की।
एडवाइजरी 11 केंद्रीय मंत्रालयों , रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजी गई है।
सभी विभागों से दो महीने के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) माँगी गई है।
जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम , किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों की समीक्षा की सिफारिश।
शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर ट्रांसजेंडर छात्रों को प्रवेश देने की सिफारिश।
पिछली एडवाइजरी 15 सितंबर 2023 को जारी हुई थी; ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 की सराहना भी की गई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 19 मई 2026 को जारी अपनी 'एडवाइजरी 2.0' में सिफारिश की है कि आगामी भारत की जनगणना में 'इंटरसेक्स', 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसविमेन' को अलग-अलग श्रेणियों के रूप में दर्ज किया जाए। यह एडवाइजरी 11 केंद्रीय मंत्रालयों, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी गई है।

एडवाइजरी में क्या है

आयोग ने स्पष्ट कहा है कि ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों को उत्तराधिकार, संपत्ति, आवास और पारिवारिक अधिकार बिना किसी भेदभाव के मिलने चाहिए। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर ट्रांसजेंडर छात्रों को प्रवेश देने की भी सिफारिश की गई है। एडवाइजरी में 10 प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर दिया गया है — राष्ट्रीय डेटा प्रणाली में जेंडर विविधता को शामिल करना, कानूनों को जेंडर-समावेशी बनाना, कार्यस्थलों पर समावेशिता, और 'गरिमा गृह' आश्रय केंद्रों को मज़बूत करना।

कानूनी समीक्षा की ज़रूरत

एनएचआरसी ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों सहित कई मौजूदा कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता रेखांकित की है, ताकि स्व-पहचाने गए जेंडर को कानूनी मान्यता मिल सके। आयोग का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव किए बिना ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा संभव नहीं है।

किन मंत्रालयों को भेजी गई एडवाइजरी

यह एडवाइजरी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, गृह, कानून एवं न्याय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, कॉरपोरेट कार्य, श्रम एवं रोज़गार, आवास एवं शहरी कार्य तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजी गई है। सभी संबंधित विभागों से दो महीने के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) सौंपने को कहा गया है।

पिछली एडवाइजरी का संदर्भ

गौरतलब है कि एनएचआरसी ने 15 सितंबर 2023 को भी इस विषय पर एक एडवाइजरी जारी की थी। आयोग ने माना कि उस पर संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही। आयोग ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उससे जुड़ी सरकारी योजनाओं की भी सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब आयोग ने अपने फील्ड इंटरैक्शन और हितधारकों से बातचीत के आधार पर पाया कि ट्रांसजेंडर समुदाय अब भी कई सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

आगे क्या होगा

सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को दो महीने के भीतर एटीआर देनी होगी। यदि जनगणना में ये श्रेणियाँ शामिल की जाती हैं, तो यह भारत की आधिकारिक जनसांख्यिकीय डेटा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा — जो नीति-निर्माण, बजट आवंटन और सामाजिक कल्याण योजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार इसे जनगणना के प्रारूप में वास्तव में लागू करेगी — या यह भी पिछली एडवाइजरी की तरह 'संज्ञान में लिया गया' कहकर फाइलों में दब जाएगी। 2019 के ट्रांसजेंडर संरक्षण अधिनियम के बाद से कई प्रावधान कागज़ पर हैं, ज़मीन पर क्रियान्वयन अधूरा है। जनगणना में अलग श्रेणी बनने से नीति-निर्माताओं के पास पहली बार ठोस जनसांख्यिकीय डेटा होगा — जो बजट आवंटन और कल्याण योजनाओं को तर्कसंगत बना सकता है। दो महीने की एटीआर समयसीमा एक सकारात्मक संकेत है, पर जवाबदेही तभी सुनिश्चित होगी जब आयोग अनुपालन न होने पर सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट करे।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी की 'एडवाइजरी 2.0' में जनगणना के बारे में क्या सिफारिश की गई है?
एनएचआरसी ने सिफारिश की है कि आगामी भारत की जनगणना में 'ट्रांसमेन', 'ट्रांसविमेन' और 'इंटरसेक्स' को अलग-अलग श्रेणियों के रूप में शामिल किया जाए। यह एडवाइजरी 19 मई 2026 को जारी की गई और 11 केंद्रीय मंत्रालयों सहित रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय को भेजी गई है।
एनएचआरसी की इस एडवाइजरी का पालन कब तक करना होगा?
आयोग ने सभी संबंधित विभागों और मंत्रालयों से दो महीने के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) सौंपने को कहा है। यह समयसीमा एडवाइजरी जारी होने की तारीख, यानी 19 मई 2026, से गिनी जाएगी।
एडवाइजरी में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए और कौन-कौन सी सिफारिशें हैं?
एडवाइजरी में 10 प्रमुख क्षेत्रों पर ज़ोर दिया गया है — जिनमें संपत्ति व उत्तराधिकार अधिकार, शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर प्रवेश, कार्यस्थल समावेशिता, बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की देखभाल और 'गरिमा गृह' आश्रय केंद्रों को मज़बूत करना शामिल हैं।
किन कानूनों की समीक्षा की सिफारिश की गई है?
एनएचआरसी ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता बताई है, ताकि स्व-पहचाने गए जेंडर को कानूनी मान्यता मिल सके और ट्रांसजेंडर व इंटरसेक्स व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा हो।
क्या एनएचआरसी पहले भी ट्रांसजेंडर अधिकारों पर एडवाइजरी जारी कर चुका है?
हाँ, एनएचआरसी ने 15 सितंबर 2023 को इस विषय पर पहली एडवाइजरी जारी की थी। आयोग ने माना कि उस पर विभागों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही, और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के क्रियान्वयन की भी सराहना की।
राष्ट्र प्रेस
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