जनगणना में 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसविमेन' की अलग श्रेणी हो — एनएचआरसी की 'एडवाइजरी 2.0' में सिफारिश
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 19 मई 2026 को जारी अपनी 'एडवाइजरी 2.0' में सिफारिश की है कि आगामी भारत की जनगणना में 'इंटरसेक्स', 'ट्रांसमेन' और 'ट्रांसविमेन' को अलग-अलग श्रेणियों के रूप में दर्ज किया जाए। यह एडवाइजरी 11 केंद्रीय मंत्रालयों, भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी गई है।
एडवाइजरी में क्या है
आयोग ने स्पष्ट कहा है कि ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों को उत्तराधिकार, संपत्ति, आवास और पारिवारिक अधिकार बिना किसी भेदभाव के मिलने चाहिए। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में स्व-पहचाने गए जेंडर के आधार पर ट्रांसजेंडर छात्रों को प्रवेश देने की भी सिफारिश की गई है। एडवाइजरी में 10 प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर दिया गया है — राष्ट्रीय डेटा प्रणाली में जेंडर विविधता को शामिल करना, कानूनों को जेंडर-समावेशी बनाना, कार्यस्थलों पर समावेशिता, और 'गरिमा गृह' आश्रय केंद्रों को मज़बूत करना।
कानूनी समीक्षा की ज़रूरत
एनएचआरसी ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और उत्तराधिकार कानूनों सहित कई मौजूदा कानूनों की समीक्षा की आवश्यकता रेखांकित की है, ताकि स्व-पहचाने गए जेंडर को कानूनी मान्यता मिल सके। आयोग का मानना है कि इन कानूनों में बदलाव किए बिना ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा संभव नहीं है।
किन मंत्रालयों को भेजी गई एडवाइजरी
यह एडवाइजरी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, गृह, कानून एवं न्याय, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, कॉरपोरेट कार्य, श्रम एवं रोज़गार, आवास एवं शहरी कार्य तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय को भेजी गई है। सभी संबंधित विभागों से दो महीने के भीतर 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (एटीआर) सौंपने को कहा गया है।
पिछली एडवाइजरी का संदर्भ
गौरतलब है कि एनएचआरसी ने 15 सितंबर 2023 को भी इस विषय पर एक एडवाइजरी जारी की थी। आयोग ने माना कि उस पर संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही। आयोग ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और उससे जुड़ी सरकारी योजनाओं की भी सराहना की। यह ऐसे समय में आया है जब आयोग ने अपने फील्ड इंटरैक्शन और हितधारकों से बातचीत के आधार पर पाया कि ट्रांसजेंडर समुदाय अब भी कई सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
आगे क्या होगा
सभी मंत्रालयों और राज्य सरकारों को दो महीने के भीतर एटीआर देनी होगी। यदि जनगणना में ये श्रेणियाँ शामिल की जाती हैं, तो यह भारत की आधिकारिक जनसांख्यिकीय डेटा प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा — जो नीति-निर्माण, बजट आवंटन और सामाजिक कल्याण योजनाओं को सीधे प्रभावित करेगा।