एनएचआरसी सदस्य कानूनगो का केजरीवाल पर वार: पंजाब की असुरक्षित स्लीपर बसों का बचाव क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने शनिवार, 24 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर सीधा हमला बोला। कानूनगो ने आरोप लगाया कि केजरीवाल पंजाब में कथित तौर पर असुरक्षित स्लीपर बसों के खिलाफ एनएचआरसी की जाँच पर सवाल उठाकर यात्री सुरक्षा के एक गंभीर मुद्दे का विरोध कर रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पंजाब में बस सुरक्षा मानकों को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही तेज़ है।
एक्स पर पोस्ट से भड़की सियासी चिंगारी
कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा कि पंजाब सरकार एक ओर यह दावा करती है कि राज्य में कोई स्लीपर कोच बस पंजीकृत नहीं है, जबकि दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल एनएचआरसी की जाँच का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सीधे केजरीवाल को संबोधित करते हुए कहा, 'डरिए मत अरविंद। हमने अभी तक उन कमीशनों की जाँच शुरू नहीं की है, जो इन बसों को चलाने से आपको मिल रहे हैं।'
कानूनगो ने यह भी आरोप लगाया कि कथित कमीशन और राजनीतिक हितों के चलते आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी नागरिक की जान को नुकसान पहुँचा तो जवाबदेही तय की जाएगी।
एनएचआरसी की कार्रवाई और पंजाब सरकार का जवाब
एनएचआरसी को पंजाब में कथित रूप से असुरक्षित बसों के संचालन की शिकायत मिलने के बाद प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था। कानूनगो के अनुसार, जनवरी 2026 में पंजाब परिवहन विभाग ने आयोग को भेजे जवाब में कहा था कि राज्य में कोई स्लीपर कोच बस पंजीकृत नहीं है।
कानूनगो ने इसी विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि यदि ऐसा है, तो यह पता लगाना ज़रूरी है कि ऐसी बसें किस आधार पर संचालित हो रही हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब को भेजा गया नोटिस किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में चल रहे एक व्यापक अभियान का हिस्सा है। उनके दावे के अनुसार, पिछले एक वर्ष में आयोग ने मानकों के अनुरूप नहीं चल रहीं करीब 1,000 बसों के खिलाफ कार्रवाई की है और उन्हें या तो संचालन से हटवाया गया है या उन पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं।
केजरीवाल का पक्ष: एकतरफा जाँच का आरोप
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने एनएचआरसी की जाँच पर सवाल उठाते हुए कहा था कि मानवाधिकार आयोग ने पहली बार बसों का निरीक्षण किया है और केवल पंजाब की उन सुपर डीलक्स बसों को निशाना बनाया गया है, जिनसे लोग धार्मिक यात्राएँ करते हैं। केजरीवाल ने यह भी पूछा था कि क्या एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश रोडवेज या अन्य राज्यों की बसों का भी निरीक्षण किया है, और उनका कहना था कि सिर्फ पंजाब की बसों की जाँच से कई सवाल खड़े होते हैं।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि स्लीपर बसें पंजाब में लंबी दूरी की यात्रा का एक लोकप्रिय साधन हैं, खासकर धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए। यदि इन बसों पर कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ेगा। दूसरी ओर, यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ, तो यात्रियों की जान को खतरा बना रहेगा। मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अब और तेज़ होने की संभावना है, और यह देखना होगा कि पंजाब सरकार एनएचआरसी की जाँच में किस तरह सहयोग करती है।