एनएचआरसी ने पंजाब की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' की असुरक्षित बसों पर जारी किया नोटिस, 7 दिन में माँगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 24 अक्टूबर 2026 को पंजाब सरकार की 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के अंतर्गत संचालित एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर गंभीर संज्ञान लिया है। इन बसों पर अनधिकृत संरचनात्मक बदलाव, अवरुद्ध आपातकालीन निकास और अग्निशमन व्यवस्थाओं में कमी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। आयोग ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी करते हुए सात दिन के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
मुख्य आरोप: क्या हैं बसों में खामियाँ
शिकायत में दर्ज आरोपों के अनुसार इन बसों में बिना अनुमति के संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। ड्राइवर के केबिन और यात्री डिब्बे के बीच विभाजन (पार्टीशन) तथा दरवाजे लगाए गए हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में सूचना और बचाव में रुकावट आ सकती है।
इसके अतिरिक्त आपातकालीन निकास और खिड़कियाँ अवरुद्ध पाई गई हैं। अग्नि-संसूचन प्रणाली, अग्निशमन उपकरण और आपात निकासी की व्यवस्था में भी गंभीर कमियाँ बताई गई हैं। ये बसें वरिष्ठ नागरिकों और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की तीर्थ यात्रा के लिए पंजाब सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती हैं।
आयोग की प्रतिक्रिया और नोटिस का आधार
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी की पीठ ने 'मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993' की धारा 12 के तहत यह नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी कल्याणकारी योजना अपने लाभार्थियों की जान को जोखिम में नहीं डाल सकती और बुज़ुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी परिस्थिति में समझौता स्वीकार्य नहीं है।
गौरतलब है कि आयोग ने इससे पूर्व भी स्लीपर बस दुर्घटनाओं और यात्री सुरक्षा की खामियों पर संज्ञान लिया था। पिछली कार्यवाही में सड़क परिवहन मंत्रालय, पुणे स्थित 'सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट' (सीआईआरटी) के निदेशक और पंजाब सहित संबंधित राज्य सरकारों से जवाब माँगा गया था।
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत जवाबदेही के निर्देश
आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि योजना के तहत सभी बसों का तत्काल और व्यापक निरीक्षण कराया जाए। यदि कोई बस अनिवार्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसे कमियाँ दूर होने और सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुपालन की पुष्टि होने तक सेवा से तत्काल हटाया जाए।
मुख्य सचिव की रिपोर्ट में — बसों की कुल संख्या, निरीक्षित बसों का विवरण, पाई गई खामियाँ, उठाए गए सुधारात्मक कदम, नियम-उल्लंघन के कारण सेवा से हटाई गई बसों की संख्या और संबंधित अधिकारियों व ऑपरेटरों की जवाबदेही का ब्यौरा — सभी बिंदु स्पष्ट रूप से दर्ज होने चाहिए। आयोग ने रेखांकित किया है कि महज विभागीय अग्रेषण या सामान्य अनुपालन आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा।
सड़क परिवहन मंत्रालय को तकनीकी समीक्षा का निर्देश
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वह बस-बॉडी डिज़ाइन मानकों, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स और सीआईआरटी दिशानिर्देशों के अनुपालन की जाँच करे। साथ ही, पिछली कार्यवाहियों के तहत लागू प्रवर्तन उपायों की समीक्षा कर असुरक्षित स्लीपर बसों के निरंतर संचालन और जानलेवा हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदमों का विवरण रिपोर्ट में दे।
आयोग ने चेतावनी दी है कि रिपोर्ट जमा करने में किसी भी प्रकार की चूक को अत्यंत गंभीरता से लिया जाएगा। यह मामला उस व्यापक चिंता का हिस्सा है जिसमें सरकार-प्रायोजित कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों — विशेषकर बुज़ुर्गों और वंचित वर्गों — की गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी सीधे राज्य पर है।
आगे क्या होगा
दोनों प्राधिकरणों को 7 दिन के भीतर अपनी-अपनी कार्रवाई रिपोर्ट एनएचआरसी को सौंपनी होगी। आयोग रिपोर्टों की समीक्षा के बाद आगे की कार्यवाही तय करेगा। यह मामला राज्य-संचालित कल्याण परिवहन योजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता को फिर से रेखांकित करता है।