एनएचआरसी सख्त: गुजरात महिला उत्पीड़न और नासिक बोरवेल दूषित जल मामले में सरकार से दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 16 अक्टूबर 2026 को दो अलग-अलग गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्य सरकारों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है — पहला मामला गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में एक विवाहित महिला के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार का है, और दूसरा महाराष्ट्र के नासिक जिले के दत्ता नगर इलाके में बोरवेल के पानी के दूषित होने का। आयोग ने स्पष्ट कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में बताए गए तथ्य सही हैं, तो दोनों ही मामले मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं।
सुरेंद्रनगर मामला: क्या हैं आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुरेंद्रनगर की एक विवाहित महिला किसी अन्य पुरुष के साथ रह रही थी। महिला के पति और परिवार के सदस्यों ने दोनों का पता लगाकर उन्हें 'शुद्धिकरण अनुष्ठान' के बहाने वापस बुला लिया। आरोप है कि इसके बाद महिला को डंडों से पीटा गया, लात मारी गई और एक पेड़ से बाँध दिया गया। यह भी आरोप है कि आरोपियों ने उस पुरुष को ही महिला के साथ दुष्कर्म करने के लिए मजबूर किया।
यह कथित घटना तब सार्वजनिक हुई जब इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एनएचआरसी ने सुरेंद्रनगर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी करते हुए रिपोर्ट में पीड़िता की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और उसे दिए गए किसी भी मुआवजे का विवरण शामिल करने को कहा है।
नासिक बोरवेल मामला: दो महीने से दूषित पानी
7 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नासिक के अंबाद औद्योगिक क्षेत्र के निकट स्थित दत्ता नगर के निवासियों को पिछले दो महीनों से बोरवेल का दूषित पानी मिल रहा है। आरोप है कि पास के कारखानों से रसायनों का रिसाव भूजल को प्रदूषित कर रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि बच्चों को स्कूल न भेजने की सलाह दी गई है और डॉक्टरों ने इलाके की महिलाओं को फिलहाल गर्भधारण न करने की सलाह दी है। स्थानीय निवासियों को स्वच्छ पेयजल खरीदने पर हर महीने लगभग ₹5,000 खर्च करने पड़ रहे हैं, इसके अतिरिक्त उपचार पर भी अतिरिक्त व्यय हो रहा है।
एनएचआरसी की कार्रवाई
नासिक मामले में आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी इस पर टिप्पणी माँगी है। दोनों मामलों में दो सप्ताह की समयसीमा तय की गई है।
गौरतलब है कि एनएचआरसी आमतौर पर मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान तब लेता है जब संबंधित प्रशासनिक तंत्र द्वारा त्वरित कार्रवाई के कोई संकेत न हों। यह मामला इस लिहाज़ से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक साथ महिला सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य — दो मूलभूत मानवाधिकार — दांव पर हैं।
आम जनता पर असर
सुरेंद्रनगर की घटना जहाँ महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और 'शुद्धिकरण' के नाम पर होने वाले सामाजिक अपराधों की गंभीर तस्वीर सामने रखती है, वहीं नासिक का बोरवेल मामला औद्योगिक प्रदूषण और स्थानीय निवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करता है। दत्ता नगर के निवासियों को पीने योग्य पानी के लिए अपनी जेब से हर महीने भारी राशि खर्च करनी पड़ रही है, जो उनके मूल अधिकारों का सीधा हनन है।
आगे क्या होगा
दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देनी है। यदि रिपोर्ट असंतोषजनक पाई गई या समय पर प्रस्तुत नहीं की गई, तो एनएचआरसी आगे की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें संबंधित अधिकारियों को सुनवाई के लिए तलब करना भी शामिल हो सकता है। महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टिप्पणी इस बात को स्पष्ट करेगी कि औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई है या नहीं।