NIA ने कोलकाता से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार किया, OTP से बनाए जाते थे WhatsApp अकाउंट

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NIA ने कोलकाता से पाकिस्तानी जासूस गिरफ्तार किया, OTP से बनाए जाते थे WhatsApp अकाउंट

सारांश

NIA ने कोलकाता से जफर रियाज को पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क में कथित संलिप्तता पर गिरफ्तार किया। आरोपी भारतीय OTP से WhatsApp अकाउंट बनाकर पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय सुरक्षा जानकारी पहुंचाता था — और यह उसकी दूसरी कथित जासूसी संलिप्तता है।

मुख्य बातें

NIA ने 20 मई 2026 को कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ रिजवी को पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क के आरोप में गिरफ्तार किया।
आरोपी पर BNS , UAPA और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज।
जफर वर्ष 2005 से भारत-पाकिस्तान के बीच यात्रा कर रहा था; पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने कथित तौर पर उसे पैसों और पाकिस्तानी नागरिकता का लालच दिया।
आरोपी ने भारतीय मोबाइल OTP पाकिस्तान को देकर WhatsApp अकाउंट सक्रिय कराए, जिनसे अन्य आरोपी मोतीराम जाट से संपर्क बनाया गया।
जफर इससे पहले भी जासूसी मामले में IPC और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है।
NIA ने कहा — नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जांच जारी है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 20 मई 2026 को कोलकाता निवासी जफर रियाज उर्फ रिजवी को पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया। एजेंसी के अनुसार, आरोपी भारत विरोधी आतंकी साजिश के तहत पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय सुरक्षा सूचनाएं पहुंचाने में सक्रिय था।

गिरफ्तारी का विवरण

NIA द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जफर रियाज के खिलाफ पहले से लुकआउट सर्कुलर जारी था और उसे घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही थी। उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।

आरोपी की पृष्ठभूमि

NIA के अनुसार, जफर की शादी एक पाकिस्तानी नागरिक से हुई थी और उसके बच्चे भी पाकिस्तान के नागरिक हैं। गौरतलब है कि वह इससे पहले भी जासूसी से जुड़े एक मामले में IPC और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है — यह उसकी दूसरी कथित संलिप्तता है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, जफर वर्ष 2005 से भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार यात्रा कर रहा था। इसी दौरान पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने कथित तौर पर उससे संपर्क किया और उसे पैसों तथा पाकिस्तानी नागरिकता का लालच देकर जासूसी गतिविधियों के लिए तैयार किया।

OTP और WhatsApp नेटवर्क का खुलासा

NIA ने बताया कि आरोपी ने भारतीय मोबाइल नंबरों के वन-टाइम पासवर्ड (OTP) पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को उपलब्ध कराए, ताकि WhatsApp अकाउंट सक्रिय किए जा सकें। इन अकाउंट्स का उपयोग कथित पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने इस मामले के एक अन्य आरोपी मोतीराम जाट से गुप्त संपर्क बनाए रखने के लिए किया।

एजेंसी के अनुसार, मोतीराम जाट भी सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने में शामिल था। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सीमापार आतंकी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं।

आगे की जांच

NIA ने स्पष्ट किया है कि इस जासूसी नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है। एजेंसी की यह कार्रवाई पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक बहुस्तरीय तकनीकी जासूसी ढांचे की परत उघाड़ती है — जहाँ भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP का इस्तेमाल पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को 'डिजिटल कवर' देने के लिए किया जा रहा था। यह तथ्य कि आरोपी पहले भी दोषी ठहराया जा चुका है, निगरानी तंत्र की उस खामी की ओर इशारा करता है जो पुनरावृत्ति अपराधियों को ट्रैक करने में चूक जाती है। मोतीराम जाट जैसे दूसरे आरोपी का नाम सामने आना यह दर्शाता है कि यह नेटवर्क भौगोलिक रूप से फैला हुआ है और केवल एक गिरफ्तारी से पूरी तस्वीर नहीं बनती। असली सवाल यह है — इस नेटवर्क में और कितने 'जफर' सक्रिय हैं जिन तक NIA अभी नहीं पहुंची?
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NIA ने जफर रियाज को किस आरोप में गिरफ्तार किया?
NIA ने जफर रियाज को पाकिस्तान समर्थित जासूसी नेटवर्क से जुड़े आरोप में गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वह पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को गोपनीय सुरक्षा सूचनाएं पहुंचाता था और भारतीय OTP के ज़रिए WhatsApp अकाउंट सक्रिय कराता था।
जफर रियाज पर कौन-कौन से कानूनी प्रावधान लगाए गए हैं?
उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। ये धाराएं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों पर लागू होती हैं।
इस जासूसी मामले में WhatsApp और OTP की क्या भूमिका थी?
आरोपी ने भारतीय मोबाइल नंबरों के OTP पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों को उपलब्ध कराए, जिससे वे WhatsApp अकाउंट सक्रिय कर सकें। इन अकाउंट्स का उपयोग अन्य आरोपी मोतीराम जाट से गुप्त संपर्क बनाए रखने के लिए किया गया।
क्या जफर रियाज पहले भी किसी जासूसी मामले में दोषी रहा है?
हाँ, NIA के अनुसार जफर रियाज पहले भी जासूसी से जुड़े एक मामले में IPC और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है। यह उसकी कथित दूसरी जासूसी संलिप्तता है।
इस मामले में अन्य आरोपी मोतीराम जाट की क्या भूमिका बताई गई है?
NIA के अनुसार मोतीराम जाट भी इसी नेटवर्क का हिस्सा था और सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने में शामिल था। पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी जफर द्वारा बनाए गए WhatsApp अकाउंट के ज़रिए मोतीराम से संपर्क में थे।
राष्ट्र प्रेस
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