25 सितंबर 2026
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एनआईए अदालत ने पीएफआई के 4 सदस्यों को हिंदू मुन्नानी प्रवक्ता हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई

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एनआईए अदालत ने पीएफआई के 4 सदस्यों को हिंदू मुन्नानी प्रवक्ता हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई

सारांश

2016 के कोयंबटूर हत्याकांड में PFI प्रतिबंध के बाद NIA की पहली सजा — चार दोषियों को उम्रकैद। 300 से अधिक FIR और 6 जिलों में फैली हिंसा के बाद सात साल लंबे मुकदमे का यह फैसला संगठित सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में कानूनी जवाबदेही की एक महत्त्वपूर्ण मिसाल बनाता है।

मुख्य बातें

चेन्नई की NIA विशेष अदालत ने 25 सितंबर 2026 को PFI के 4 सदस्यों — सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन — को उम्रकैद की सजा सुनाई।
सभी दोषियों पर ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह फैसला 22 सितंबर 2016 को कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी प्रवक्ता सी.
शशिकुमार की लक्षित हत्या के मामले में आया।
PFI पर प्रतिबंध लगने के बाद यह NIA की पहली सजा है।
एक सह-आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुथागिर को बरी किया गया; NIA अपील के विकल्प तलाश रही है।
हत्या के बाद 6 जिलों में हिंसा भड़की थी और 300 से अधिक FIR दर्ज हुई थीं।

चेन्नई की पूनमल्ली स्थित राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 25 सितंबर 2026 को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चार सक्रिय सदस्यों को कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला PFI पर भारत सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद संगठन के सदस्यों से जुड़े मामलों में NIA की पहली सजा है।

दोषियों की पहचान और सजा का विवरण

NIA के आधिकारिक बयान के अनुसार, दोषी ठहराए गए चारों व्यक्तियों — सद्दाम हुसैन, सुबैर, मुबारक और मोहम्मद रफीकुल हसन — को उम्रकैद के साथ-साथ प्रत्येक पर ₹30,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। इन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 153-ए (धर्म के आधार पर वैमनस्य फैलाना), तथा गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] की धारा 16, 18 और 20 के तहत दोषी पाया गया।

वहीं एक सह-आरोपी, अबू उर्फ सैयद अबुथागिर, को विशेष न्यायालय ने बरी कर दिया है। NIA ने स्पष्ट किया है कि वह इस बरी करने के फैसले को अपील न्यायालय में चुनौती देने के लिए सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम: हत्या और उसके बाद की हिंसा

22 सितंबर 2016 को कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। NIA के बयान के अनुसार यह लक्षित हत्या समाज के एक वर्ग में दहशत फैलाने और पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक अशांति भड़काने के स्पष्ट इरादे से की गई थी।

इस घटना के बाद कोयंबटूर शहर और कोयंबटूर ग्रामीण सहित 6 जिलों में व्यापक हिंसा भड़क उठी, जिसके चलते राज्य अधिकारियों को 300 से अधिक एफआईआर दर्ज करनी पड़ीं। यह घटना तमिलनाडु में सांप्रदायिक तनाव की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी गई।

जाँच की यात्रा: थाने से NIA तक

यह मामला शुरुआत में थुडियालुर पुलिस स्टेशन, कोयंबटूर में दर्ज हुआ था। बाद में तमिलनाडु की CB-CID ने इसकी जाँच अपने हाथ में ली। केंद्र सरकार के निर्देश पर मामला NIA को स्थानांतरित किया गया और 22 जनवरी 2018 को इसे RC-03/2018/NIA/DLI के रूप में पुनः पंजीकृत किया गया।

गहन जाँच के बाद NIA ने 5 आरोपियों के खिलाफ एक मुख्य आरोप-पत्र और 2 पूरक आरोप-पत्र दायर किए। 2019 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान 75 अभियोजन पक्ष के गवाहों और 2 बचाव पक्ष के गवाहों से पूछताछ की गई — एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया जो अब अपने अंजाम तक पहुँची है।

फैसले का महत्त्व

गौरतलब है कि PFI पर भारत सरकार ने सितंबर 2022 में प्रतिबंध लगाया था, और यह उसके बाद संगठन के सदस्यों के खिलाफ NIA द्वारा प्राप्त पहली सजा है। यह निर्णय इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि यह लक्षित हत्याओं और सांप्रदायिक उकसावे से जुड़े UAPA के तहत दर्ज मामलों में दोषसिद्धि का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण स्थापित करता है।

यह मामला ऐसे समय में आया है जब देश में चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गति और प्रभावशीलता पर व्यापक बहस हो रही है। NIA अब बरी किए गए आरोपी के खिलाफ अपील की तैयारी में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और एजेंसी इसमें काफी हद तक सफल रही। हालाँकि एक सह-आरोपी का बरी होना यह सवाल उठाता है कि क्या आरोप-पत्र में साक्ष्य की कड़ी पूरी तरह मजबूत थी। सात साल लंबा यह मुकदमा — 75 गवाह, 3 आरोप-पत्र — यह भी दर्शाता है कि आतंकवाद-संबंधी मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति एक संरचनात्मक चुनौती बनी हुई है। अब असली कसौटी यह है कि NIA बरी करने के फैसले को ऊपरी अदालत में सफलतापूर्वक चुनौती दे पाती है या नहीं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू मुन्नानी प्रवक्ता सी. शशिकुमार की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
22 सितंबर 2016 को कोयंबटूर में हिंदू मुन्नानी के प्रवक्ता सी. शशिकुमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। NIA के अनुसार यह हत्या सांप्रदायिक अशांति भड़काने के इरादे से की गई लक्षित वारदात थी।
NIA की इस सजा को पहली सजा क्यों कहा जा रहा है?
भारत सरकार ने सितंबर 2022 में PFI पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगाया था। उस प्रतिबंध के बाद PFI सदस्यों के खिलाफ NIA के किसी मामले में यह पहली बार है जब अदालत ने दोषसिद्धि और सजा सुनाई है।
किन धाराओं के तहत चारों दोषियों को सजा हुई?
चारों को IPC की धारा 302 (हत्या), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) और 153-ए (धार्मिक वैमनस्य फैलाना), तथा UAPA की धारा 16, 18 और 20 के तहत दोषी ठहराया गया। प्रत्येक दोषी को उम्रकैद और ₹30,000 जुर्माने की सजा दी गई है।
एक सह-आरोपी को बरी क्यों किया गया और NIA क्या करेगी?
विशेष न्यायालय ने सह-आरोपी अबू उर्फ सैयद अबुथागिर को बरी कर दिया। NIA ने कहा है कि वह फैसले की समीक्षा कर रही है और अपील न्यायालय में बरी करने के फैसले को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
यह मामला NIA को कैसे सौंपा गया था?
मामला पहले कोयंबटूर के थुडियालुर पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ, फिर तमिलनाडु की CB-CID ने जाँच की। केंद्र सरकार के आदेश पर इसे NIA को स्थानांतरित किया गया और 22 जनवरी 2018 को RC-03/2018/NIA/DLI के रूप में पुनः पंजीकृत किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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