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पीएफआई चेयरमैन ओएमए सलाम समेत 21 आरोपियों पर एनआईए कोर्ट ने तय किए आतंक के आरोप, 10 जुलाई को अगली सुनवाई

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पीएफआई चेयरमैन ओएमए सलाम समेत 21 आरोपियों पर एनआईए कोर्ट ने तय किए आतंक के आरोप, 10 जुलाई को अगली सुनवाई

सारांश

दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने PFI के शीर्ष नेताओं समेत 21 आरोपियों पर UAPA के तहत आतंक के आरोप तय किए — जिनमें 'विजन 2047' के तहत इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की कथित साजिश शामिल है। सितंबर 2022 की गिरफ्तारियों के बाद यह मामला अब ट्रायल के निर्णायक चरण में पहुँच गया है।

मुख्य बातें

पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने 5 जून 2026 को PFI के 21 आरोपियों पर औपचारिक आरोप तय किए।
आरोपियों में PFI चेयरमैन ओएमए सलाम और वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर शामिल हैं।
आरोपों में आपराधिक साजिश, राज्य के विरुद्ध युद्ध की तैयारी और UAPA के तहत आतंकवाद संबंधी अपराध शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि कथित 'विजन 2047' दस्तावेज़ PFI का था, जिसमें 2047 तक इस्लामी खिलाफत स्थापित करने का उल्लेख है।
आरोपियों को सितंबर 2022 में देशव्यापी छापेमारी में गिरफ्तार किया गया था।
अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को निर्धारित; सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अदालत ने 5 जून 2026 को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के चेयरमैन ओएमए सलाम और वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर सहित कुल 21 आरोपियों के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए। इन आरोपियों पर आपराधिक साजिश, राज्य के विरुद्ध युद्ध की तैयारी और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के अंतर्गत आतंकवाद से जुड़े गंभीर अपराध शामिल हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिस दिन सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

मुख्य आरोप क्या हैं

जाँच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों पर आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, आतंकवादी षड्यंत्र रचने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और इन अभियानों हेतु लोगों की भर्ती करने के गंभीर आरोप हैं। अदालत ने रेखांकित किया कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह गंभीर संदेह उत्पन्न होता है कि आरोपी PFI और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद (NEC) के माध्यम से भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त करने की कथित साजिश में शामिल थे।

विजन 2047 और कथित षड्यंत्र

अदालत ने कहा कि जाँच में सामने आया 'विजन 2047' दस्तावेज़ कथित तौर पर PFI का ही था, जिसमें 2047 तक या उससे पहले शरिया कानून के तहत इस्लामी खिलाफत स्थापित करने का उल्लेख बताया गया है। अदालत के अनुसार, यह लक्ष्य सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से हासिल करने की योजना का हिस्सा कथित तौर पर था। इसके अतिरिक्त, हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इराक व सीरिया में सक्रिय आतंकवादी संगठन ISIS को समर्थन देने से जुड़े कथित संस्थागत निर्णय PFI की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में लिए जाने की बात अदालत ने कही।

संगठन के नेतृत्व की भूमिका

अदालत ने स्पष्ट किया कि ये कार्य किसी एक व्यक्ति के निजी आचरण नहीं थे, बल्कि ये संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा संचालित और निर्देशित गतिविधियों का हिस्सा प्रतीत होते हैं। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में NIA ने देशभर में समन्वित छापेमारी कर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जाँच एजेंसी का आरोप है कि PFI के शीर्ष पदाधिकारी संगठन की गतिविधियों को संचालित करने और कथित राष्ट्रविरोधी योजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से शामिल थे।

आगे क्या होगा

अब 10 जुलाई 2026 की सुनवाई में सभी 21 आरोपियों को विशेष NIA अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। आरोप तय होने के बाद यह मामला विचारण (ट्रायल) के अगले चरण में प्रवेश करेगा, जो PFI पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद की सबसे महत्त्वपूर्ण कानूनी कार्यवाही मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि बचाव पक्ष इन साक्ष्यों की प्रामाणिकता को चुनौती देगा। असली परीक्षा ट्रायल में होगी — जहाँ अभियोजन पक्ष को संगठनात्मक निर्णयों और व्यक्तिगत आपराधिक मंशा के बीच की कड़ी साबित करनी होगी, जो UAPA मामलों में ऐतिहासिक रूप से सबसे कठिन पड़ाव रहा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PFI के 21 आरोपियों पर NIA कोर्ट ने कौन-से आरोप तय किए हैं?
विशेष NIA अदालत ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, राज्य के विरुद्ध युद्ध की तैयारी और UAPA के तहत आतंकवाद से जुड़े अपराध — जैसे आतंकी फंडिंग, षड्यंत्र, प्रशिक्षण शिविर आयोजन और भर्ती — के आरोप तय किए हैं। इनमें PFI चेयरमैन ओएमए सलाम और वाइस चेयरमैन ईएम अबूबकर प्रमुख हैं।
PFI का 'विजन 2047' दस्तावेज़ क्या है?
अदालत के अनुसार, 'विजन 2047' कथित तौर पर PFI का एक आंतरिक दस्तावेज़ है जिसमें 2047 तक या उससे पहले शरिया कानून के तहत इस्लामी खिलाफत स्थापित करने का उल्लेख है। जाँच में यह दस्तावेज़ सामने आया और अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया साक्ष्य के रूप में दर्ज किया है।
इन आरोपियों को कब और कैसे गिरफ्तार किया गया था?
NIA ने सितंबर 2022 में देशभर में समन्वित छापेमारी अभियान चलाकर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जाँच एजेंसी का आरोप था कि PFI के शीर्ष पदाधिकारी संगठन की गतिविधियों को संचालित करने और कथित राष्ट्रविरोधी योजनाओं को आगे बढ़ाने में शामिल थे।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को विशेष NIA अदालत में निर्धारित है। उस दिन सभी 21 आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा और ट्रायल की आगामी प्रक्रिया तय होगी।
PFI पर प्रतिबंध कब लगाया गया था?
केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में ही PFI पर प्रतिबंध लगाया था, उसे गैरकानूनी संगठन घोषित करते हुए। आरोप तय होने के साथ यह मामला अब ट्रायल के उस चरण में पहुँचा है जो प्रतिबंध के बाद की सबसे महत्त्वपूर्ण कानूनी कार्यवाही मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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