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पीएफआई आतंक साजिश केस: 21 आरोपियों पर 29 जुलाई से ट्रायल, अबूबकर समेत सभी ने आरोप नकारे

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पीएफआई आतंक साजिश केस: 21 आरोपियों पर 29 जुलाई से ट्रायल, अबूबकर समेत सभी ने आरोप नकारे

सारांश

पीएफआई के पूर्व चेयरमैन अबूबकर समेत 21 आरोपियों पर 29 जुलाई से ट्रायल शुरू होगा — यह भारत के सबसे बड़े आतंक-साजिश मामलों में से एक है। अदालत ने 'गंभीर संदेह' के आधार पर डिस्चार्ज अर्जियाँ खारिज कीं। एनआईए का आरोप है कि पीएफआई ने 2047 तक हिंसक तरीकों से इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश रची।

मुख्य बातें

पटियाला हाउस कोर्ट ने एनआईए के पीएफआई आतंक साजिश मामले में 29 जुलाई 2025 से ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया।
अबूबकर समेत सभी 21 आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया और ट्रायल का सामना करने का फैसला किया।
आरोपियों पर यूएपीए और आईपीसी के तहत भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकी साजिश रचने के आरोप हैं।
एनआईए के अनुसार साजिश में 2047 तक हिंसक तरीकों से इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने का लक्ष्य था।
अबूबकर 6 अक्टूबर 2022 से न्यायिक हिरासत में हैं; सर्वोच्च न्यायालय ने मेडिकल जमानत और हाउस अरेस्ट दोनों याचिकाएँ खारिज की थीं।
केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में यूएपीए के तहत पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया था; पीएफआई स्वयं भी इस मामले में आरोपी है।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) द्वारा दायर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के आतंक साजिश मामले में नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 29 जुलाई 2025 से औपचारिक ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया है। प्रतिबंधित संगठन के पूर्व चेयरमैन ई. अबूबकर सहित सभी 21 आरोपियों ने शनिवार, 11 जुलाई को स्पेशल एनआईए कोर्ट के समक्ष अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और ट्रायल का सामना करने का फैसला किया।

मुख्य घटनाक्रम

स्पेशल एनआईए कोर्ट के सामने पेश हुए सभी 21 आरोपियों ने खुद को बेगुनाह बताते हुए ट्रायल में भाग लेने की सहमति दी। अदालत ने इस मामले में 29 जुलाई की तारीख सुनवाई के लिए निर्धारित की है। आरोपियों पर गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है, जिनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने और आतंकवाद से जुड़े अन्य अपराध शामिल हैं।

अदालत का रुख और पिछले आदेश

यह घटनाक्रम एडिशनल सेशन जज प्रशांत शर्मा द्वारा 5 जून को दिए गए उस आदेश के एक महीने से अधिक समय बाद आया है, जिसमें उन्होंने आरोपियों की डिस्चार्ज अर्जियाँ खारिज करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया था। जज ने माना था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से आरोपियों के खिलाफ 'गंभीर संदेह' पैदा होता है।

अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी नकार दिया कि वास्तव में कोई आतंकवादी घटना नहीं हुई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए के तहत साजिश रचने, फंड जुटाने, भर्ती करने और हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने जैसे अपराधों के लिए किसी आतंकवादी घटना का होना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है।

एनआईए के आरोप

एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने पीएफआई और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद (एनईसी) के माध्यम से भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक या उससे पहले हिंसक तरीकों से शरिया कानून द्वारा शासित इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश रची। एजेंसी का दावा है कि इस साजिश में मुस्लिम युवाओं की भर्ती और कट्टरपंथ, विभिन्न राज्यों में हथियार प्रशिक्षण शिविर, फंड जुटाना और हथियार हासिल करने की कोशिश शामिल थी।

आरोप तय करने के आदेश में कोर्ट ने ई. अबूबकर (पूर्व चेयरमैन), ओ.एम.ए. सलाम (पीएफआई अध्यक्ष), ई.एम. अब्दुल रहीमन (उपाध्यक्ष), अनीस अहमद (महासचिव) और संगठन के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के खिलाफ पर्याप्त सामग्री पाई।

अबूबकर की हिरासत और सुप्रीम कोर्ट

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में यूएपीए के तहत पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया था। एनआईए ने 22 सितंबर 2022 को अबूबकर को गिरफ्तार किया था और वह 6 अक्टूबर 2022 से न्यायिक हिरासत में हैं। पिछले साल जनवरी में सर्वोच्च न्यायालय ने एम्स दिल्ली के डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें मेडिकल जमानत देने से इनकार कर दिया था। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाउस अरेस्ट की उनकी वैकल्पिक याचिका भी खारिज कर दी थी, हालांकि स्वास्थ्य बिगड़ने पर ट्रायल कोर्ट से राहत मांगने की छूट दी गई थी।

आगे क्या होगा

यह मामला भारत के सबसे बड़े आतंक-साजिश ट्रायल में से एक बनने की ओर अग्रसर है, जिसमें एक प्रतिबंधित संगठन स्वयं भी आरोपी है। 29 जुलाई से शुरू होने वाले ट्रायल में अभियोजन पक्ष को यूएपीए के कड़े प्रावधानों के तहत अपना पक्ष रखना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना ट्रायल शुरू हुए। यह अपने आप में यूएपीए के तहत विचाराधीन कैद की उस व्यापक समस्या को रेखांकित करता है जिस पर नागरिक स्वतंत्रता संगठन लगातार सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी तरफ, एनआईए के आरोप — 2047 तक इस्लामिक खिलाफत और हथियार प्रशिक्षण शिविर — असाधारण रूप से गंभीर हैं और अभियोजन पक्ष को अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। असली परीक्षा यह होगी कि क्या दस्तावेज़ी साक्ष्य और गवाहियाँ इन आरोपों को कानूनी कसौटी पर खरा साबित कर पाती हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएफआई एनआईए आतंक साजिश केस क्या है?
यह एनआईए द्वारा प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ दायर आतंक साजिश का मामला है। एजेंसी का आरोप है कि पीएफआई ने हिंसक तरीकों से भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश रची।
पीएफआई केस में ट्रायल कब से शुरू होगा?
पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 29 जुलाई 2025 से ट्रायल शुरू करने की तारीख तय की है। सभी 21 आरोपी ट्रायल का सामना करने पर राजी हो गए हैं।
पीएफआई के पूर्व चेयरमैन ई. अबूबकर कब से हिरासत में हैं?
एनआईए ने ई. अबूबकर को 22 सितंबर 2022 को गिरफ्तार किया था और वह 6 अक्टूबर 2022 से न्यायिक हिरासत में हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी मेडिकल जमानत और हाउस अरेस्ट दोनों याचिकाएँ खारिज कर दी थीं।
आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपियों पर यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है, जिनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, आपराधिक साजिश, हथियार प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना और आतंकी फंडिंग शामिल हैं।
अदालत ने डिस्चार्ज अर्जियाँ क्यों खारिज कीं?
एडिशनल सेशन जज प्रशांत शर्मा ने 5 जून के अपने आदेश में माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री आरोपियों के खिलाफ 'गंभीर संदेह' पैदा करती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यूएपीए के तहत आरोप तय करने के लिए किसी वास्तविक आतंकवादी घटना का होना ज़रूरी नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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