एनआईए ने पटना अदालत में हथियार तस्कर परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, ISIS जैव-आतंक साजिश में भी कार्रवाई

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एनआईए ने पटना अदालत में हथियार तस्कर परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, ISIS जैव-आतंक साजिश में भी कार्रवाई

सारांश

एनआईए ने एक साथ दो बड़े मामलों में कार्रवाई की — पटना अदालत में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी सिंडिकेट के नौवें आरोपी परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र और अहमदाबाद में ISIS से जुड़े जैव-आतंकवाद षड्यंत्र में तीन आरोपियों पर मुकदमा — जो देश में आतंक और हथियार नेटवर्क की गहरी जड़ों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

एनआईए ने 7 मई 2026 को पटना की विशेष अदालत में हथियार तस्कर परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया।
यह तस्करी सिंडिकेट बिहार , उत्तर प्रदेश और हरियाणा में तीन स्तरों पर संचालित था; अब तक 11 लोग गिरफ्तार।
परवेज आलम के खिलाफ 2013 से कई हथियार संबंधी मामले दर्ज हैं।
5 मई 2026 को अहमदाबाद की एनआईए अदालत में ISIS से जुड़े सैयद अहमद मोहिउद्दीन , आजाद और मोहम्मद सुहेल पर जैव-आतंकवाद साजिश का आरोप।
आरोपियों ने सार्वजनिक स्थानों पर रिसिन जहर से सामूहिक हत्या की योजना बनाई थी।
मोहिउद्दीन को नवंबर 2025 में गुजरात ATS ने टोल प्लाजा पर हथियार और 4 लीटर अरंडी का तेल सहित पकड़ा था।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने 7 मई 2026 को पटना की विशेष एनआईए अदालत में अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी मामले में नौवें आरोपी परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। यह मामला बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैले एक बड़े प्रतिबंधित बोर गोला-बारूद तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा है, जिसमें अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

परवेज आलम कौन है और उस पर क्या आरोप हैं

परवेज आलम को मामले में प्रोडक्शन वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। एनआईए के अनुसार, उसके खिलाफ 2013 से कई हथियार संबंधी मामले दर्ज हैं। पटना स्थित एनआईए विशेष न्यायालय में उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

इस मामले में फरवरी 2026 में आठ आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे, जो अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर मुकदमा चल रहा है। परवेज इस मामले में नौवाँ आरोपी है।

मामले की पृष्ठभूमि और तस्करी सिंडिकेट की संरचना

यह मामला मूल रूप से जुलाई 2025 में बिहार पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जब बड़ी मात्रा में अवैध गोला-बारूद की जब्ती के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2025 में एनआईए ने जाँच का जिम्मा संभाला और पाया कि यह सिंडिकेट तीन स्तरों पर संचालित था — प्रमुख आपूर्तिकर्ता, मुख्य बिचौलिए और नेटवर्क वाले खुदरा विक्रेता

एनआईए ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में व्यापक तलाशी अभियान चलाकर प्रत्येक स्तर पर सक्रिय प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया। गौरतलब है कि यह अंतरराज्यीय नेटवर्क प्रतिबंधित बोर के गोला-बारूद की आपूर्ति में संलिप्त था, जो सीधे आपराधिक गिरोहों को हथियार उपलब्ध कराने का काम करता था।

ISIS जैव-आतंकवाद साजिश में भी एनआईए की कार्रवाई

एक अलग लेकिन उतने ही गंभीर मामले में, एनआईए ने 5 मई 2026 को अहमदाबाद की विशेष अदालत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। इन पर सार्वजनिक स्थानों पर निर्दोष लोगों को सामूहिक रूप से जहर देकर मारने की जिहादी जैव-आतंकवाद साजिश में शामिल होने का आरोप है।

मुख्य आरोपी सैयद अहमद मोहिउद्दीन, जो हैदराबाद निवासी हैं और चीन से एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त हैं, के साथ सह-आरोपी आजाद और मोहम्मद सुहेल — दोनों उत्तर प्रदेश निवासी — पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), बीएनएस और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप दायर किए गए हैं।

रिसिन का प्रयोग और कट्टरपंथीकरण का तरीका

जाँच के अनुसार, आरोपियों ने ISIS के नापाक एजेंडे को अंजाम देने के लिए 'रिसिन' का उपयोग करने की योजना बनाई थी — यह अरंडी के तेल के बीजों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली जैविक विष है, जो रासायनिक हथियार सम्मेलन की अनुसूची में सूचीबद्ध है।

आईएस से जुड़े विदेशी हैंडलरों के मार्गदर्शन में इन आरोपियों ने कमज़ोर युवाओं की भर्ती की और उन्हें जिहाद का समर्थन करने तथा अवैध हथियारों और जैव-आतंकवाद के माध्यम से आतंक फैलाने के लिए कट्टरपंथी बनाया। यह मामला मूल रूप से गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने नवंबर 2025 में मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी का तेल और अन्य आपत्तिजनक सामान के साथ गिरफ्तार करने के बाद दर्ज किया था।

आगे क्या होगा

दोनों मामलों में एनआईए की कार्रवाई जारी है और संबंधित विशेष अदालतों में सुनवाई आगे बढ़ेगी। पटना मामले में पहले से न्यायिक हिरासत में चल रहे आठ आरोपियों पर मुकदमा जारी है, जबकि अहमदाबाद मामले में ISIS के विदेशी हैंडलरों तक पहुँचने के लिए जाँच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी वह एक सक्रिय सिंडिकेट का हिस्सा बना रहा — यह राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है। ISIS जैव-आतंकवाद मामला और भी चिंताजनक है क्योंकि एक चिकित्सा शिक्षा प्राप्त व्यक्ति द्वारा रिसिन जैसे जैविक विष के उपयोग की योजना बनाना भारत में आतंकवाद के बदलते और अधिक परिष्कृत स्वरूप का संकेत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने पटना अदालत में किसके खिलाफ आरोपपत्र दायर किया?
एनआईए ने पटना की विशेष अदालत में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी मामले में परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया, जो इस मामले में नौवाँ आरोपी है। उस पर बीएनएस और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
यह हथियार तस्करी सिंडिकेट किन राज्यों में सक्रिय था?
यह सिंडिकेट बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में तीन स्तरों — प्रमुख आपूर्तिकर्ता, मुख्य बिचौलिए और नेटवर्क वाले खुदरा विक्रेता — पर संचालित था। एनआईए ने अगस्त 2025 में जाँच संभालने के बाद तीनों राज्यों में तलाशी अभियान चलाया।
ISIS जैव-आतंकवाद साजिश क्या थी और मुख्य आरोपी कौन है?
इस साजिश में ISIS से जुड़े आरोपियों ने सार्वजनिक स्थानों पर रिसिन नामक जैविक विष से निर्दोष लोगों को सामूहिक रूप से जहर देकर मारने की योजना बनाई थी। मुख्य आरोपी हैदराबाद निवासी सैयद अहमद मोहिउद्दीन हैं, जिन्होंने चीन से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है।
रिसिन क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
रिसिन अरंडी के तेल के बीजों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली जैविक विष है, जो रासायनिक हथियार सम्मेलन की अनुसूची में सूचीबद्ध है। इसकी अत्यंत सूक्ष्म मात्रा भी जानलेवा हो सकती है, इसलिए इसे जैव-आतंकवाद में सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है।
गुजरात ATS ने मोहिउद्दीन को कैसे और कब गिरफ्तार किया?
गुजरात ATS ने नवंबर 2025 में मोहिउद्दीन को एक टोल प्लाजा पर उसकी कार में अवैध हथियार, 4 लीटर अरंडी का तेल और अन्य आपत्तिजनक सामान मिलने के बाद गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामला दर्ज हुआ और बाद में एनआईए ने जाँच अपने हाथ में ली।
राष्ट्र प्रेस
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