एनआईए ने अंतरराज्यीय गोला-बारूद तस्करी मामले में परवेज आलम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में फैले अवैध गोला-बारूद तस्करी नेटवर्क के मामले में कुख्यात तस्कर परवेज आलम के खिलाफ 7 मई 2026 को आरोपपत्र दाखिल किया है। पटना स्थित एनआईए विशेष न्यायालय में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत यह आरोप दायर किए गए हैं।
मामले का मुख्य घटनाक्रम
परवेज आलम इस मामले में आरोपित होने वाला नौवाँ आरोपी है। एनआईए के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें से 8 न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर मुकदमा चल रहा है। परवेज को इस मामले में पेशी वारंट पर पकड़ा गया, जो प्रतिबंधित बोर गोला-बारूद की तस्करी में संलिप्त एक बड़े गिरोह से जुड़ा है।
गौरतलब है कि परवेज आलम के खिलाफ 2013 से कई हथियार संबंधी मामले दर्ज हैं, जो उसकी लंबे समय से चली आ रही आपराधिक पृष्ठभूमि को उजागर करते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मूल रूप से जुलाई 2025 में बिहार की स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जब बड़ी मात्रा में अवैध गोला-बारूद की जब्ती के बाद 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अगस्त 2025 में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली।
गिरोह का तीन-स्तरीय ढाँचा
एनआईए की जांच में सामने आया कि यह गिरोह तीन स्तरों पर संगठित तरीके से काम कर रहा था — प्रमुख आपूर्तिकर्ता, मुख्य बिचौलिए और नेटवर्क से जुड़े खुदरा विक्रेता। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में की गई व्यापक तलाशी और जांच के परिणामस्वरूप प्रत्येक स्तर पर सक्रिय प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
आगे की जांच
एनआईए के अनुसार, इस मामले में आगे की जांच अभी भी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बहु-राज्यीय नेटवर्क संगठित अपराध और आतंकी वित्त पोषण दोनों के लिए खतरा बन सकते हैं।