ISI-दाऊद नेटवर्क के 4 आतंकी संदिग्ध आज पटियाला हाउस कोर्ट में पेश होंगे, 9 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ द्वारा गिरफ्तार पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल के चार संदिग्धों को 7 जून 2025 (शनिवार) को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा। सात दिनों की पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद यह पेशी होगी। जांचकर्ताओं के अनुसार ये संदिग्ध कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद इब्राहिम के डी-कंपनी नेटवर्क के निर्देश पर काम कर रहे थे।
मुख्य आरोपी और हिरासत का घटनाक्रम
चारों आरोपियों — हरविंदर सिंह, मनजीत सिंह, गगनदीप सिंह और अंग कामी लामा — को पहले 30 मई को अदालत में पेश किया गया था, जहाँ न्यायालय ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें सात दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। अब वह अवधि समाप्त होने पर इन्हें शनिवार को फिर अदालत के सामने लाया जाएगा।
इसी मामले में एक अन्य प्रमुख आरोपी हुजैफा अहमद हाशमी को अलग से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई से नई दिल्ली लाया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने दिल्ली पुलिस को उसकी आगे की पूछताछ के लिए पाँच दिन की अतिरिक्त हिरासत दी।
बरामदगी और आरोप
दिल्ली और कई उत्तरी राज्यों में चलाए गए समन्वित अभियानों के दौरान जांचकर्ताओं ने संदिग्धों के पास से पाकिस्तान निर्मित हथगोले, ग्लॉक पिस्तौल और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए। पुलिस अधिकारियों का आरोप है कि ये आरोपी पाकिस्तान स्थित आईएसआई के गुर्गों के निर्देश पर काम कर रहे थे।
रेकी और संभावित लक्ष्य
अब तक की जांच के अनुसार, इस कथित आतंकी मॉड्यूल ने दिल्ली, मुंबई और पंजाब के विभिन्न स्थानों पर सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा प्रतिष्ठानों और भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों सहित कई संवेदनशील ठिकानों की रेकी की थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि आरोपी एक बड़ी साजिश के तहत खुफिया जानकारी जुटा रहे थे और संभावित लक्ष्यों का आकलन कर रहे थे।
अब तक की गिरफ्तारियाँ और जांच की स्थिति
दिल्ली पुलिस अब तक इस कथित आतंकी मॉड्यूल के संबंध में कुल नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें से पाँच आरोपी फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं। एजेंसियाँ इस मामले को संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क के रूप में वर्णित कर रही हैं और जांच जारी है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा-पार आतंकी नेटवर्क को लेकर सतर्क हैं। आगामी सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए या पुलिस को और समय दिया जाए।