22 जुलाई 2026
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रामलिंगम हत्याकांड: एनआईए ने पीएफआई के 4 पूर्व सदस्यों पर फरार आरोपियों को शरण देने का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की

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रामलिंगम हत्याकांड: एनआईए ने पीएफआई के 4 पूर्व सदस्यों पर फरार आरोपियों को शरण देने का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की

सारांश

रामलिंगम हत्याकांड में एनआईए की जांच का दायरा और बढ़ा — पीएफआई के चार पूर्व सदस्यों पर फरार हत्यारोपियों को छह साल तक शरण देने का आरोप। चेन्नई की विशेष अदालत में दाखिल यह चार्जशीट 2019 की उस हत्या से जुड़े मामले में नया मोड़ है जिसने तमिलनाडु में सांप्रदायिक तनाव को हवा दी थी।

मुख्य बातें

एनआईए ने 6 जून 2026 को चेन्नई की विशेष अदालत में पीएफआई के 4 पूर्व सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
मोहिदीन , मोहम्मद इमरान , थमीम अंसारी और असमत — सभी पर फरार अपराधियों को लगभग 6 वर्षों तक शरण देने का आरोप।
फरार आरोपी मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन को इन्होंने कथित तौर पर छुपाया।
बीएनएस धारा 61(2), 249 और यूएपीए धारा 19 के तहत आरोप तय।
इस मामले में एनआईए अब तक 18 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल कर चुकी है; मोहम्मद अली जिन्ना व इम्ताथुल्ला के खिलाफ पहले भी चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
मूल हत्या 5 फरवरी 2019 को तिरुभुवनम में हुई थी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु के बहुचर्चित रामलिंगम हत्याकांड में एक अहम कदम उठाते हुए शनिवार, 6 जून 2026 को चेन्नई के पूनमल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार पूर्व सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इन आरोपियों पर हत्याकांड में शामिल फरार अपराधियों को जानबूझकर शरण देने का आरोप है। यह मामला सांप्रदायिक तनाव फैलाने और आतंक का माहौल बनाने की कथित बड़ी साजिश से जुड़ा बताया जा रहा है।

चार्जशीट में किन्हें बनाया गया आरोपी

एनआईए की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस चार्जशीट में के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, थमीम अंसारी और असमत को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इन चारों ने हत्याकांड में सीधे शामिल दो फरार आरोपियों — मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन — को उनके अपराध की पूरी जानकारी होने के बावजूद लगभग छह वर्षों तक शरण दी।

मामले की पृष्ठभूमि: रामलिंगम की हत्या

जांच एजेंसी के अनुसार, 5 फरवरी 2019 को रामलिंगम की निर्मम हत्या कर दी गई थी। कथित तौर पर घटना उस समय हुई जब रामलिंगम ने तिरुभुवनम के पक्कू विनायकम थोप्पु इलाके में पीएफआई सदस्यों द्वारा कथित जबरन धर्मांतरण की कोशिश का विरोध किया था, जिसके बाद विवाद बढ़ने पर उनकी हत्या कर दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब पीएफआई पर देशभर में कई आपराधिक और आतंकी गतिविधियों के आरोप लगे हैं और संगठन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

किन धाराओं के तहत दर्ज हुए आरोप

एनआईए ने चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) और धारा 249 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 19 के तहत आरोप तय किए हैं। यूएपीए की धारा 19 विशेष रूप से आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को शरण देने या सहयोग करने के अपराध से संबंधित है।

इस मामले में अब तक की जांच

गौरतलब है कि इस मामले में एनआईए पहले ही 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें छह फरार घोषित अपराधी भी शामिल थे। बाद में एजेंसी ने इनमें से चार फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके अतिरिक्त, फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में मोहम्मद अली जिन्ना और इम्ताथुल्ला को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनके खिलाफ क्रमशः मई 2025 और फरवरी 2026 में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। यह नवीनतम चार्जशीट इस मामले में जांच की निरंतरता को दर्शाती है।

आगे क्या होगा

विशेष एनआईए अदालत अब चार्जशीट पर संज्ञान लेने और आगे की सुनवाई की तारीख तय करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगी। फरार घोषित अपराधियों मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन की गिरफ्तारी अभी भी एजेंसी की प्राथमिकता बनी हुई है। यह मामला तमिलनाडु में सांप्रदायिक हिंसा और प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों को लेकर चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पूरे नेटवर्क को निशाना बना रही है जिसने आरोपियों को वर्षों तक बचाए रखा। छह साल तक फरार अपराधियों को शरण देना एक सुनियोजित प्रयास की ओर इशारा करता है, जो महज व्यक्तिगत सहानुभूति नहीं बल्कि संगठित सहयोग था। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि आरोप अभी न्यायालय में साबित होने बाकी हैं और अदालत का फैसला ही अंतिम सत्य होगा। पीएफआई पर प्रतिबंध के बाद भी उसके पूर्व सदस्यों की कथित गतिविधियों की यह श्रृंखला, देश में प्रतिबंधित संगठनों के विघटन की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलिंगम हत्याकांड क्या है?
5 फरवरी 2019 को तमिलनाडु के तिरुभुवनम में रामलिंगम की हत्या कर दी गई थी। एनआईए के अनुसार, यह घटना तब हुई जब रामलिंगम ने पक्कू विनायकम थोप्पु इलाके में पीएफआई सदस्यों द्वारा कथित जबरन धर्मांतरण का विरोध किया था।
एनआईए ने इस बार किन चार लोगों पर चार्जशीट दाखिल की है?
एनआईए ने के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, थमीम अंसारी और असमत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन सभी पर फरार आरोपियों मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन को लगभग छह वर्षों तक जानबूझकर शरण देने का आरोप है।
इन आरोपियों पर कौन-सी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं?
चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) और धारा 249 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 19 के तहत आरोप तय किए गए हैं। यूएपीए की धारा 19 आतंकी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों को शरण देने के अपराध से संबंधित है।
इस मामले में एनआईए की जांच अब तक कितनी आगे बढ़ी है?
एनआईए पहले ही 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें छह फरार घोषित अपराधी थे। इनमें से चार को बाद में गिरफ्तार किया गया। मोहम्मद अली जिन्ना और इम्ताथुल्ला के खिलाफ क्रमशः मई 2025 और फरवरी 2026 में भी चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।
क्या फरार मुख्य आरोपी अभी भी पकड़ से बाहर हैं?
हां, मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन अभी भी फरार हैं और एनआईए की गिरफ्तारी सूची में हैं। इन्हीं दोनों को शरण देने के आरोप में नई चार्जशीट दाखिल की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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