14 अक्टूबर 2026
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2022 टेरर फंडिंग मामला: एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान स्थित आतंकी मुश्ताक अहमद मीर को घोषित अपराधी करार दिया

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2022 टेरर फंडिंग मामला: एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान स्थित आतंकी मुश्ताक अहमद मीर को घोषित अपराधी करार दिया

सारांश

जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने 2022 के टेरर फंडिंग मामले में पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी मुश्ताक अहमद मीर को 'घोषित अपराधी' करार दिया। राजौरी मूल का मीर 1995-96 से LoC पार कर पाकिस्तान में सक्रिय है। 2026 में इस कोर्ट के कई कड़े फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में न्यायिक सक्रियता के संकेत देते हैं।

मुख्य बातें

जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को मुश्ताक अहमद मीर को '**घोषित अपराधी**' करार दिया।
मीर राजौरी जिले के थानामंग गाँव का मूल निवासी है और 1995-96 से LoC पार कर पाकिस्तान में सक्रिय है।
मामला अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट (AHET) और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) से जुड़ी गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित है।
2026 में कोर्ट ने पुंछ के नजीर हुसैन को भी घोषित अपराधी घोषित किया और अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत खारिज की।
सितंबर 2026 में कोर्ट ने UAPA धारा 33(1) के तहत फयाज अहमद मीर की बारामूला स्थित संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश दिया।

जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को 2022 के टेरर फंडिंग मामले में पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी मुश्ताक अहमद मीर को 'घोषित अपराधी' करार दिया। मीर जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की दरहाल तहसील के थानामंग गाँव का मूल निवासी है और कथित तौर पर पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) से अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

अदालत के अनुसार, मुश्ताक अहमद मीर पर अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट (AHET) और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, मीर 1995-96 में आतंकवाद में शामिल होने के इरादे से लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार कर पाकिस्तान चला गया था और तब से वहीं सक्रिय बताया जाता है।

जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम की धारा 11 के तहत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेष अपराधों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है। इस कोर्ट को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन एस.ओ. 4697(ई) के ज़रिए स्थापित किया था। कोर्ट के पीठासीन अधिकारी जज प्रेम सागर हैं।

कोर्ट के अन्य महत्त्वपूर्ण आदेश

गौरतलब है कि 2026 के दौरान इस स्पेशल कोर्ट ने कई अहम फैसले सुनाए हैं। इसी वर्ष पहले, कोर्ट ने PoK से सक्रिय पुंछ के निवासी नजीर हुसैन को भी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत 'घोषित अपराधी' घोषित किया था। हुसैन सीमा पार से आतंकवाद फैलाने और ग्रेनेड तस्करी की साजिश में मुख्य आरोपी है।

इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंताओं का हवाला देते हुए कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत याचिका गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के एक पुराने मामले में खारिज कर दी।

पुलवामा और सुंजवान मामलों में भी कड़ा रुख

2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश के मामले में (अगस्त-सितंबर 2026), स्पेशल जज ने आरोपियों की कई अंतरिम और नियमित जमानत अर्जियाँ खारिज कर दीं। सुंजवान आतंकी हमले के मामले में, कोर्ट ने (अगस्त 2026 में) आरोपी शफीक अहमद शेख को अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत देने से इनकार किया। हालाँकि कोर्ट ने उसे कोट भलवाल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विवाह समारोह देखने की अनुमति दी।

संपत्ति जब्ती का आदेश

सितंबर 2026 में, स्पेशल कोर्ट ने UAPA की धारा 33(1) के तहत आरोपी फयाज अहमद मीर की संपत्तियाँ जब्त करने का आदेश दिया। जब्त की गई संपत्तियों में बारामूला के बुमहामा गाँव में रिहायशी ज़मीन, व्यावसायिक दुकानें और खेती की भूमि शामिल हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं। 'घोषित अपराधी' का दर्जा मिलने के बाद प्रत्यर्पण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है, हालाँकि पाकिस्तान में स्थित होने के कारण यह व्यावहारिक रूप से जटिल बनी रहेगी। आने वाले समय में एनआईए इस मामले में आगे की कार्यवाही जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती प्रवर्तन की है — पाकिस्तान में बैठे किसी व्यक्ति पर भारतीय अदालत के आदेश का व्यावहारिक असर सीमित रहता है। गौरतलब है कि 2026 में एनआईए की इस स्पेशल कोर्ट ने एक के बाद एक कड़े फैसले सुनाए हैं, जो जम्मू-कश्मीर से जुड़े आतंकवाद मामलों में न्यायिक सक्रियता का संकेत देते हैं। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि जब तक पाकिस्तान के साथ प्रत्यर्पण संधि या ठोस द्विपक्षीय तंत्र नहीं बनता, ये फैसले प्रतीकात्मक महत्त्व तो रखते हैं, पर अभियुक्तों को कटघरे में लाना कठिन बना रहता है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए कोर्ट ने मुश्ताक अहमद मीर को 'घोषित अपराधी' क्यों करार दिया?
जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने 2022 के टेरर फंडिंग मामले में मुश्ताक अहमद मीर को 'घोषित अपराधी' घोषित किया, क्योंकि वह अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा पाया गया। मीर 1995-96 से पाकिस्तान में रहकर आतंकी गतिविधियाँ संचालित करता बताया जाता है।
मुश्ताक अहमद मीर कौन है और वह कहाँ का रहने वाला है?
मुश्ताक अहमद मीर जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की दरहाल तहसील के थानामंग गाँव का मूल निवासी है। वह 1995-96 में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पार कर पाकिस्तान चला गया था और कथित तौर पर अब पाकिस्तान और PoK से अपनी गतिविधियाँ चला रहा है।
जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट क्या है और इसे किसने नियुक्त किया?
जम्मू की एनआईए स्पेशल कोर्ट को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी अधिनियम की धारा 11 के तहत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेष अपराधों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है। इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन एस.ओ. 4697(ई) के ज़रिए स्थापित किया था और इसके पीठासीन अधिकारी जज प्रेम सागर हैं।
2026 में एनआईए स्पेशल कोर्ट ने और कौन-से महत्त्वपूर्ण फैसले दिए हैं?
2026 में कोर्ट ने पुंछ के नजीर हुसैन को BNSS धारा 84 के तहत घोषित अपराधी करार दिया, अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत याचिका UAPA मामले में खारिज की, पुलवामा हमले के आरोपियों की जमानत अर्जियाँ नामंजूर कीं और सितंबर 2026 में फयाज अहमद मीर की बारामूला स्थित संपत्तियाँ UAPA धारा 33(1) के तहत जब्त करने का आदेश दिया।
पाकिस्तान में रहने वाले अभियुक्त को 'घोषित अपराधी' करार देने का क्या असर होता है?
'घोषित अपराधी' का दर्जा मिलने के बाद अभियुक्त की संपत्ति जब्त करने और प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू करने का रास्ता खुलता है। हालाँकि, पाकिस्तान में स्थित होने के कारण इस आदेश का व्यावहारिक प्रवर्तन कूटनीतिक और कानूनी जटिलताओं के चलते चुनौतीपूर्ण बना रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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