18 अगस्त 2026
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एनआईए अदालत का बड़ा कदम: पाक स्थित आतंकी सरगना अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

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एनआईए अदालत का बड़ा कदम: पाक स्थित आतंकी सरगना अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

सारांश

जम्मू-कश्मीर की विशेष एनआईए अदालत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया — यह उसी अदालत की दूसरी बड़ी कार्रवाई है जिसने जुलाई में हाफिज सईद के खिलाफ भी वारंट जारी किया था। पहलगाम हमले और श्रीनगर हथियार बरामदगी से जुड़े इन मामलों में भारत की कानूनी रणनीति तेज़ होती दिख रही है।

मुख्य बातें

विशेष एनआईए अदालत, जम्मू ने 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया।
आरोपी पर यूएपीए की धारा 35 के तहत मामला दर्ज है; श्रीनगर में बरामद चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूसों की जाँच में संलिप्तता उजागर हुई।
अबू सुमामा ने कथित तौर पर गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकवादियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट को कश्मीर में हमलों के निर्देश दिए थे।
इसी अदालत ने 8 जुलाई को हाफिज सईद के खिलाफ पहलगाम हमले से जुड़े मामले में गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे।

जम्मू-कश्मीर की विशेष एनआईए अदालत ने 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगना मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। अदालत ने पाया कि आरोपी फरार है और उस पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 35 के तहत आरोप दर्ज हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, श्रीनगर में मोहम्मद नकीब भट से बरामद एक चीनी ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूसों की जाँच के दौरान अबू सुमामा की संलिप्तता सामने आई। जाँच में यह भी उजागर हुआ कि अबू सुमामा ने कथित तौर पर गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकवादियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट को निर्देश दिए थे। इन निर्देशों में कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाकर आतंकी गतिविधियाँ करने का आदेश शामिल था।

हाफिज सईद के खिलाफ पूर्व कार्रवाई से जुड़ा संदर्भ

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब इसी विशेष एनआईए अदालत ने 8 जुलाई को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) के पाकिस्तान स्थित प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी किया था। वह वारंट पहलगाम आतंकी हमले की जाँच से जुड़े मामले में एनआईए द्वारा पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के दो दिन बाद आया था।

जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में दायर पूरक आरोपपत्र में 76 वर्षीय सईद पर प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा और उसके सहयोगी मोर्चे द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) के प्रमुख के रूप में आरोप लगाए गए हैं। उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 और यूएपीए, 1967 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है। एनआईए ने अदालत को बताया कि सईद, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा का निवासी है, जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा है।

पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। यह हमला हाल के वर्षों के सबसे घातक नागरिक हमलों में से एक था। हाफिज सईद को भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया हुआ है और उसे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड भी माना जाता है।

एनआईए की आगे की कार्रवाई

एजेंसी ने अदालत से अबू सुमामा के खिलाफ अनिश्चितकालीन गैर-जमानती वारंट जारी करने की माँग की थी, ताकि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके। अदालत ने यह अर्जी मंजूर करते हुए वारंट जारी किया। विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित आतंकी सरगनाओं के खिलाफ इस प्रकार के वारंट भारत की कूटनीतिक और कानूनी रणनीति का हिस्सा हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने में सहायक होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब अबू सुमामा — के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करना एक सुनियोजित कानूनी अभियान की तस्वीर उभारता है। यह रणनीति अदालती रिकॉर्ड पर आधिकारिक दस्तावेज़ तैयार करती है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों — एफएटीएफ, संयुक्त राष्ट्र — पर पाकिस्तान को घेरने में काम आ सकते हैं। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि जब तक आरोपी पाकिस्तान में सुरक्षित हैं, ये वारंट व्यावहारिक प्रवर्तन की दृष्टि से प्रतीकात्मक ही रहते हैं। असली कसौटी यह होगी कि भारत इन दस्तावेज़ों को द्विपक्षीय या बहुपक्षीय दबाव में कितने प्रभावी ढंग से बदल पाता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा कौन है और उसके खिलाफ क्या आरोप हैं?
अबू सुमामा पाकिस्तान स्थित एक आतंकी सरगना है जिस पर यूएपीए की धारा 35 के तहत आरोप हैं। एनआईए के अनुसार, उसने कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाने के लिए गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकवादियों को निर्देश दिए थे।
एनआईए अदालत ने गैर-जमानती वारंट क्यों जारी किया?
अदालत ने पाया कि आरोपी अबू सुमामा फरार है और गिरफ्तारी से बच रहा है। एनआईए की अर्जी पर अदालत ने अनिश्चितकालीन गैर-जमानती वारंट जारी करने की माँग मंजूर की, ताकि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई संभव हो सके।
हाफिज सईद के खिलाफ एनआईए की क्या कार्रवाई हुई है?
इसी विशेष एनआईए अदालत ने 8 जुलाई को पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। 76 वर्षीय सईद पर बीएनएस 2023 और यूएपीए, 1967 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है और उसे भारत व अमेरिका दोनों ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया हुआ है।
पहलगाम आतंकी हमला क्या था और इसमें कितने लोग मारे गए?
22 अप्रैल 2025 को दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 26 लोगों की हत्या की थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। यह हाल के वर्षों के सबसे घातक नागरिक आतंकी हमलों में से एक था और इसकी जाँच एनआईए कर रही है।
पाकिस्तान स्थित आतंकियों के खिलाफ भारतीय अदालतों के वारंट का क्या असर होता है?
ये वारंट भारतीय कानूनी रिकॉर्ड पर आधिकारिक दस्तावेज़ तैयार करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने में सहायक हो सकते हैं। हालाँकि, आरोपियों के पाकिस्तान में होने के कारण इनका व्यावहारिक प्रवर्तन कूटनीतिक और बहुपक्षीय दबाव पर निर्भर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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