जम्मू एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: पाकिस्तानी आतंकी हैंडलर अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ सुमामा इलियास उर्फ वारिस अली के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। अदालत ने माना कि आरोपी फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य प्रक्रिया के तहत पेश करने में असमर्थ रही है। आरोपी को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) की धारा 35 के तहत पहले ही नामित आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा गुज्जर टेंट पांडाच में नाका चेकिंग के दौरान शुरू हुआ था। जांच के दौरान जाकुरा, श्रीनगर की ओर आ रही मोटरसाइकिल (नंबर जेके01एएच/8264) को रोका गया। तलाशी में सवार व्यक्ति के पास से एक चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूस बरामद हुए। पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद नकीब भट्ट बताया, जो श्रीनगर के फजल हक कॉलोनी, बटपोरा का निवासी है। वह हथियार और गोला-बारूद रखने का कोई वैध कारण नहीं बता सका।
एफआईआर और कानूनी धाराएँ
इस घटना के बाद पुलिस थाना जाकोड़ा में एफआईआर दर्ज की गई। मामला यूएपीए की धारा 23, आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 7/25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत दर्ज किया गया। बाद में मामला एनआईए को सौंपा गया, जिसने विस्तृत जांच की।
पाकिस्तानी हैंडलर की संलिप्तता
एनआईए के अनुसार, जांच में सामने आया कि इस साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा का हाथ है। गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट्ट ने पूछताछ में इसका नाम उजागर किया। एनआईए के अनुसार, अबू सुमामा ने इन दोनों को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर आतंकी हमले करने के निर्देश दिए थे।
अदालत का आदेश
एनआईए के सीआईओ डिप्टी एसपी अमित शर्मा द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि जांच में आरोपी की आतंकवाद में संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई है। चूँकि आरोपी फरार है और जांच एजेंसी उसे हाजिर नहीं करा पाई, इसलिए बीएनएसएस की धारा 75 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। यह वारंट कार्रवाई के लिए डीआईजी, एनआईए जम्मू को भेज दिया गया है।
आगे की कार्रवाई
एनआईए का कहना है कि वारंट जारी होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सीमापार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ न्यायिक और खुफिया दोनों मोर्चों पर कार्रवाई तेज कर रही है। गौरतलब है कि आरोपी के पाकिस्तान में होने के कारण उसकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया कूटनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से जटिल बनी रहेगी।