18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जम्मू एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: पाकिस्तानी आतंकी हैंडलर अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जम्मू एनआईए कोर्ट का बड़ा फैसला: पाकिस्तानी आतंकी हैंडलर अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

सारांश

जम्मू एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है — वह हैंडलर जिसने कश्मीर घाटी में हमलों के लिए दो पाकिस्तानी आतंकियों को भेजा था। यूएपीए के तहत नामित यह आतंकवादी अब भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है।

मुख्य बातें

जम्मू एनआईए कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया।
आरोपी को यूएपीए की धारा 35 के तहत पहले ही नामित आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।
मामला गुज्जर टेंट पांडाच में नाका चेकिंग के दौरान एक चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूस की बरामदगी से शुरू हुआ था।
गिरफ्तार आतंकियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट्ट की पूछताछ में अबू सुमामा का नाम सामने आया।
वारंट बीएनएसएस की धारा 75 के तहत जारी किया गया और डीआईजी, एनआईए जम्मू को भेजा गया।

जम्मू की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 18 अगस्त 2026 को पाकिस्तान में मौजूद आतंकी हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ सुमामा इलियास उर्फ वारिस अली के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। अदालत ने माना कि आरोपी फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य प्रक्रिया के तहत पेश करने में असमर्थ रही है। आरोपी को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) की धारा 35 के तहत पहले ही नामित आतंकवादी घोषित किया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा गुज्जर टेंट पांडाच में नाका चेकिंग के दौरान शुरू हुआ था। जांच के दौरान जाकुरा, श्रीनगर की ओर आ रही मोटरसाइकिल (नंबर जेके01एएच/8264) को रोका गया। तलाशी में सवार व्यक्ति के पास से एक चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूस बरामद हुए। पकड़े गए व्यक्ति ने अपना नाम मोहम्मद नकीब भट्ट बताया, जो श्रीनगर के फजल हक कॉलोनी, बटपोरा का निवासी है। वह हथियार और गोला-बारूद रखने का कोई वैध कारण नहीं बता सका।

एफआईआर और कानूनी धाराएँ

इस घटना के बाद पुलिस थाना जाकोड़ा में एफआईआर दर्ज की गई। मामला यूएपीए की धारा 23, आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 7/25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत दर्ज किया गया। बाद में मामला एनआईए को सौंपा गया, जिसने विस्तृत जांच की।

पाकिस्तानी हैंडलर की संलिप्तता

एनआईए के अनुसार, जांच में सामने आया कि इस साजिश के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा का हाथ है। गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकियों अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट्ट ने पूछताछ में इसका नाम उजागर किया। एनआईए के अनुसार, अबू सुमामा ने इन दोनों को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर आतंकी हमले करने के निर्देश दिए थे।

अदालत का आदेश

एनआईए के सीआईओ डिप्टी एसपी अमित शर्मा द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि जांच में आरोपी की आतंकवाद में संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई है। चूँकि आरोपी फरार है और जांच एजेंसी उसे हाजिर नहीं करा पाई, इसलिए बीएनएसएस की धारा 75 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया गया। यह वारंट कार्रवाई के लिए डीआईजी, एनआईए जम्मू को भेज दिया गया है।

आगे की कार्रवाई

एनआईए का कहना है कि वारंट जारी होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सीमापार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ न्यायिक और खुफिया दोनों मोर्चों पर कार्रवाई तेज कर रही है। गौरतलब है कि आरोपी के पाकिस्तान में होने के कारण उसकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया कूटनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से जटिल बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पाकिस्तान में बैठे आरोपी को वास्तव में न्याय के कटघरे में लाना कितना संभव है। भारत-पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि का अभाव इस वारंट को व्यावहारिक रूप से कागज़ी दस्तावेज़ बना देता है। फिर भी, यूएपीए के तहत नामित आतंकवादियों के खिलाफ न्यायिक रिकॉर्ड बनाना अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की रणनीति का हिस्सा है — एफएटीएफ जैसे निकायों में यह साक्ष्य काम आता है। सीमापार आतंकी नेटवर्क के खिलाफ यह न्यायिक-कूटनीतिक दोहरी रणनीति कितनी कारगर होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू एनआईए कोर्ट ने किसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है?
जम्मू एनआईए कोर्ट ने पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर मोहम्मद याकूब उर्फ अबू सुमामा उर्फ सुमामा इलियास उर्फ वारिस अली के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। आरोपी यूएपीए की धारा 35 के तहत नामित आतंकवादी घोषित है और फरार बताया गया है।
यह मामला कैसे शुरू हुआ?
यह मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस की गुज्जर टेंट पांडाच में नाका चेकिंग के दौरान शुरू हुआ, जब एक मोटरसाइकिल सवार के पास से एक चीनी ग्रेनेड और 15 कारतूस बरामद हुए। पकड़े गए व्यक्ति मोहम्मद नकीब भट्ट ने हथियार रखने का कोई वैध कारण नहीं बताया, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई।
अबू सुमामा पर क्या आरोप हैं?
एनआईए के अनुसार, अबू सुमामा ने दो पाकिस्तानी आतंकियों — अब्दुल्ला राजपूत उर्फ कामरान अहमद और खुबैब उर्फ उस्मान जट्ट — को कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर आतंकी हमले करने के निर्देश दिए थे। इन दोनों आतंकियों की पूछताछ में अबू सुमामा का नाम सामने आया।
गैर-जमानती वारंट के बाद आगे क्या होगा?
अदालत ने वारंट को कार्रवाई के लिए डीआईजी, एनआईए जम्मू को भेज दिया है। एनआईए का कहना है कि वारंट जारी होने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, हालाँकि आरोपी के पाकिस्तान में होने के कारण यह प्रक्रिया जटिल बनी रहेगी।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लागू की गई हैं?
मामले में यूएपीए की धारा 23 (आतंकवाद से संबंधित), आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 7/25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत एफआईआर दर्ज है। गैर-जमानती वारंट बीएनएसएस की धारा 75 के तहत जारी किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले