रियासी पुलिस की बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान में बैठे 5 आतंकी हैंडलर्स की संपत्तियां जब्त
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 30 जुलाई 2026 को रियासी जिले में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में मौजूद पाँच आतंकी हैंडलर्स की अचल संपत्तियाँ अटैच कर लीं। यह कार्रवाई आतंकवाद के वित्तीय ढाँचे को ध्वस्त करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई महोर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर नंबर 70/2024 की जाँच के दौरान की गई। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज थी।
अटैचमेंट की कार्रवाई महोर की एसडीपीओ पारुल भारद्वाज के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने महोर पुलिस स्टेशन के एसएचओ, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और स्थानीय गवाहों की उपस्थिति में पूरी की।
किनकी संपत्तियाँ जब्त हुईं
पुलिस ने जिन पाँच व्यक्तियों को पाकिस्तान-आधारित आतंकी हैंडलर्स के रूप में चिह्नित किया है, उनकी पहचान इस प्रकार है — शाजरू के अलाफ दीन, शाजरू के गुलाम मोहम्मद उर्फ गामा, चकरास (मुलास) के मोहम्मद अशरफ, चकरास (जामसलान) के शब्बीर अहमद और सिलधार के बिहार दीन। अटैच की गई जमीन महोर इलाके में कई कनाल और मरला में फैली हुई है।
कानूनी आधार
यूएपीए के तहत पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आतंकवाद से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देने का अधिकार है। कानून में आतंकी फंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली संपत्तियों को फ्रीज, जब्त और अटैच करने का प्रावधान है। यूएपीए में 2008 में धारा 51ए जोड़कर वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज करने का अधिकार दिया गया था, जबकि 2004 और 2019 के संशोधनों के ज़रिए चैप्टर 4 के तहत आतंकी कमाई वाली संपत्तियों की जाँच और जब्ती के अधिकार को और विस्तार दिया गया।
सरकार की रणनीति
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों को निशाना बनाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। गौरतलब है कि संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाइयाँ आतंकियों के स्थानीय समर्थन ढाँचे को कमज़ोर करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जाती हैं।
आगे क्या
जाँच एजेंसियाँ इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी रखेंगी। अटैच की गई संपत्तियों का मामला अब सक्षम न्यायालय के समक्ष जाएगा, जहाँ इनके भविष्य का निर्धारण होगा।