पुलवामा हमले की आरोपी इंशा जान की जमानत याचिका विशेष एनआईए अदालत ने खारिज की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने 14 फरवरी 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले की आरोपी इंशा जान उर्फ इंशा तारिक की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने 20 अगस्त को दिए गए 15 पृष्ठ के आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं।
अदालत का आदेश और कानूनी आधार
न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43-डी(5) के तहत वैधानिक रोक इस स्तर पर आरोपी की जमानत पर रिहाई को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करती है। अदालत ने बचाव पक्ष और एनआईए दोनों के तर्कों पर विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया।
आरोपी की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के हरकीपोरा गाँव की निवासी इंशा जान को उनके पिता पीर तारिक अहमद शाह के साथ 3 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर रणबीर दंड संहिता (आरपीसी), यूएपीए, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने 10 दिसंबर 2022 को उनके विरुद्ध आरोप औपचारिक रूप से तय किए थे।
एनआईए के आरोप
एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, इंशा जान कथित तौर पर आतंकी साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थी और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक के लगातार संपर्क में थी। उमर फारूक ने एक अन्य पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद कामरान अली के साथ मिलकर पुलवामा हमले की योजना बनाई थी — दोनों को बाद में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया। आरोप है कि उसने इन दोनों आतंकवादियों और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के अन्य सदस्यों को भोजन, आश्रय और रसद सहायता प्रदान की। इसके अतिरिक्त, आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का वायरल वीडियो — जो हमले के बाद सामने आया था — कथित तौर पर 28 और 29 जनवरी 2019 को उसके घर पर रिकॉर्ड किया गया था।
बचाव पक्ष के तर्क
बचाव पक्ष ने मुख्य रूप से तीन आधारों पर जमानत की माँग की — आरोपी का छह वर्षों से अधिक का कारावास, मुकदमे में कथित देरी, और उसकी स्वास्थ्य स्थिति। बचाव पक्ष ने बताया कि 240 गवाहों में से अब तक केवल 49 अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ हो सकी है, और मौजूदा गति से मुकदमा कई और वर्षों तक चल सकता है। इंशा जान को त्वचा संबंधी पुरानी समस्याओं, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और लगातार सिरदर्द से पीड़ित बताया गया और विशेष चिकित्सा उपचार की माँग की गई। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिन गवाहों से पूछताछ हुई, उन्होंने आरोपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अपराध से नहीं जोड़ा और कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
आगे की राह
यह मामला यूएपीए के अंतर्गत आतंक से जुड़े मामलों में जमानत की कठिनाई को एक बार फिर रेखांकित करता है। मुकदमा अभी जारी है और शेष 191 गवाहों की पूछताछ बाकी है, जिससे अंतिम फैसला आने में अभी और समय लग सकता है।