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पुलवामा हमले की आरोपी इंशा जान की जमानत याचिका विशेष एनआईए अदालत ने खारिज की

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पुलवामा हमले की आरोपी इंशा जान की जमानत याचिका विशेष एनआईए अदालत ने खारिज की

सारांश

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने पुलवामा हमले की आरोपी इंशा जान की जमानत याचिका खारिज कर दी। छह साल से अधिक की हिरासत और मुकदमे में देरी के बावजूद, यूएपीए की धारा 43-डी(5) और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों ने अदालत को जमानत देने से रोका। 240 में से केवल 49 गवाहों की पूछताछ हुई है।

मुख्य बातें

जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने 20 अगस्त को 15 पृष्ठ के आदेश में इंशा जान की जमानत याचिका खारिज की।
विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि यूएपीए धारा 43-डी(5) के तहत वैधानिक रोक लागू होती है और प्रथम दृष्टया साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं।
इंशा जान पर आरोप है कि उसने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को भोजन, आश्रय और रसद सहायता दी; आत्मघाती हमलावर का वीडियो उसके घर पर रिकॉर्ड हुआ था।
आरोपी 3 मार्च 2020 से हिरासत में है — छह वर्षों से अधिक ; 240 में से केवल 49 गवाहों की पूछताछ अब तक हुई है।
14 फरवरी 2019 के पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।

जम्मू स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत ने 14 फरवरी 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले की आरोपी इंशा जान उर्फ इंशा तारिक की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने 20 अगस्त को दिए गए 15 पृष्ठ के आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं।

अदालत का आदेश और कानूनी आधार

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 43-डी(5) के तहत वैधानिक रोक इस स्तर पर आरोपी की जमानत पर रिहाई को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करती है। अदालत ने बचाव पक्ष और एनआईए दोनों के तर्कों पर विचार करने के बाद यह निर्णय सुनाया।

आरोपी की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के हरकीपोरा गाँव की निवासी इंशा जान को उनके पिता पीर तारिक अहमद शाह के साथ 3 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर रणबीर दंड संहिता (आरपीसी), यूएपीए, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने 10 दिसंबर 2022 को उनके विरुद्ध आरोप औपचारिक रूप से तय किए थे।

एनआईए के आरोप

एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, इंशा जान कथित तौर पर आतंकी साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थी और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक के लगातार संपर्क में थी। उमर फारूक ने एक अन्य पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद कामरान अली के साथ मिलकर पुलवामा हमले की योजना बनाई थी — दोनों को बाद में सुरक्षा बलों ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया। आरोप है कि उसने इन दोनों आतंकवादियों और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के अन्य सदस्यों को भोजन, आश्रय और रसद सहायता प्रदान की। इसके अतिरिक्त, आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का वायरल वीडियो — जो हमले के बाद सामने आया था — कथित तौर पर 28 और 29 जनवरी 2019 को उसके घर पर रिकॉर्ड किया गया था।

बचाव पक्ष के तर्क

बचाव पक्ष ने मुख्य रूप से तीन आधारों पर जमानत की माँग की — आरोपी का छह वर्षों से अधिक का कारावास, मुकदमे में कथित देरी, और उसकी स्वास्थ्य स्थिति। बचाव पक्ष ने बताया कि 240 गवाहों में से अब तक केवल 49 अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ हो सकी है, और मौजूदा गति से मुकदमा कई और वर्षों तक चल सकता है। इंशा जान को त्वचा संबंधी पुरानी समस्याओं, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस और लगातार सिरदर्द से पीड़ित बताया गया और विशेष चिकित्सा उपचार की माँग की गई। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिन गवाहों से पूछताछ हुई, उन्होंने आरोपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अपराध से नहीं जोड़ा और कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

आगे की राह

यह मामला यूएपीए के अंतर्गत आतंक से जुड़े मामलों में जमानत की कठिनाई को एक बार फिर रेखांकित करता है। मुकदमा अभी जारी है और शेष 191 गवाहों की पूछताछ बाकी है, जिससे अंतिम फैसला आने में अभी और समय लग सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे मुकदमा जितना भी खिंचे। 240 में से केवल 49 गवाहों की पूछताछ यह संकेत देती है कि अंतिम फैसला वर्षों दूर है। सर्वोच्च न्यायालय बार-बार कह चुका है कि 'जमानत नियम है, जेल अपवाद' — लेकिन यूएपीए की धारा 43-डी(5) इस सिद्धांत को व्यवहार में पलट देती है। यह सवाल बना रहता है कि क्या न्यायिक प्रक्रिया की गति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर्याप्त रूप से सुनिश्चित हो पा रहा है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुलवामा हमले की आरोपी इंशा जान कौन हैं?
इंशा जान उर्फ इंशा तारिक दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के हरकीपोरा गाँव की निवासी हैं। उन्हें उनके पिता पीर तारिक अहमद शाह के साथ 3 मार्च 2020 को गिरफ्तार किया गया था और उन पर 14 फरवरी 2019 के पुलवामा हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
एनआईए अदालत ने जमानत क्यों खारिज की?
विशेष न्यायाधीश प्रेम सागर ने कहा कि रिकॉर्ड में उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि करते हैं और यूएपीए की धारा 43-डी(5) के तहत वैधानिक रोक इस स्तर पर जमानत देने से रोकती है। अदालत ने बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार करने के बाद 20 अगस्त को 15 पृष्ठ का आदेश जारी किया।
इंशा जान पर एनआईए ने क्या आरोप लगाए हैं?
एनआईए के आरोपपत्र के अनुसार, इंशा जान कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक के संपर्क में थी और जैश-ए-मोहम्मद के सदस्यों को भोजन, आश्रय व रसद सहायता प्रदान करती थी। आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार का वायरल वीडियो कथित तौर पर 28-29 जनवरी 2019 को उसके घर पर रिकॉर्ड किया गया था।
पुलवामा मुकदमे की अब तक की स्थिति क्या है?
अदालत में 240 गवाह सूचीबद्ध हैं, जिनमें से अब तक केवल 49 अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ हो सकी है। आरोप 10 दिसंबर 2022 को तय किए गए थे और मुकदमा अभी जारी है; बचाव पक्ष का कहना है कि मौजूदा गति से यह कई और वर्षों तक चल सकता है।
पुलवामा हमला क्या था और इसमें कितने जवान शहीद हुए?
14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटक से भरे वाहन से सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया था। इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे, जो हाल के दशकों में कश्मीर में सुरक्षाबलों पर सबसे बड़े हमलों में से एक था।
राष्ट्र प्रेस
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