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एनआईए ने श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल संपत्ति जब्त की, आरोपी 'मामा गैस' के घर से दो आतंकी पकड़े गए थे

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एनआईए ने श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा के ठिकाने के रूप में इस्तेमाल संपत्ति जब्त की, आरोपी 'मामा गैस' के घर से दो आतंकी पकड़े गए थे

सारांश

एनआईए ने श्रीनगर के दनिहामा में 'मामा गैस' की संपत्ति को यूएपीए की धारा 25 के तहत जब्त किया — वह घर जहाँ से दो एलईटी आतंकी अबू हुरैरा और खुबैब को अप्रैल 2026 में पकड़ा गया था। पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े ओजीडब्ल्यू नेटवर्क की जांच अभी जारी है।

मुख्य बातें

एनआईए ने श्रीनगर के हजरतबल इलाके के दनिहामा गाँव में गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ 'मामा गैस' की रिहायशी संपत्ति यूएपीए, 1967 की धारा 25 के तहत जब्त की।
6 अप्रैल 2026 को इसी संपत्ति से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकी — अबू हुरैरा और खुबैब — पकड़े गए थे।
तलाशी में विस्फोटक जैसा पदार्थ , डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई।
मूल एफआईआर 31 मार्च 2026 को जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी; बाद में एनआईए ने मामला अपने हाथ में लिया।
जांच में पाकिस्तान स्थित एलईटी हैंडलर्स के निर्देश पर काम करने वाले स्थानीय ओजीडब्ल्यू नेटवर्क का पता चला है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने श्रीनगर के हजरतबल इलाके के दनिहामा गाँव में स्थित एक रिहायशी संपत्ति को जब्त किया है, जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों को सहयोग प्रदान करने के लिए किया जा रहा था। यह संपत्ति आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ 'मामा गैस' की है, जो एक सीमापार आतंकी साजिश मामले में आरोपी है। यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धारा 25 के अंतर्गत की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

एनआईए के अनुसार, 6 अप्रैल 2026 को गुलाम मोहम्मद मीर के दनिहामा स्थित घर पर तलाशी अभियान के दौरान दो संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए, जिनकी पहचान अबू हुरैरा और खुबैब के रूप में हुई। दोनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए गए हैं। तलाशी के दौरान संपत्ति से विस्फोटक जैसा पदार्थ, डिजिटल डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।

एजेंसी का कहना है कि जांच में इस संपत्ति और आतंकी साजिश के बीच सीधा संबंध स्थापित हुआ है। एनआईए के महानिदेशक से आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद यह जब्ती की गई।

एफआईआर और जांच का आधार

इस मामले में मूल एफआईआर 31 मार्च 2026 को जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी, जिसे बाद में एनआईए ने अपने हाथ में लेकर दोबारा दर्ज किया। एजेंसी के अनुसार जांच में एक स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जो पाकिस्तान में बैठे एलईटी हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था।

यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ कश्मीर घाटी में एलईटी के ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही हैं। गौरतलब है कि ओवरग्राउंड वर्कर वे स्थानीय लोग होते हैं जो आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही और रसद सहायता में मदद करते हैं — बिना खुद हथियार उठाए।

आरोपी की भूमिका

जांच में पाया गया है कि आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर ने जानबूझकर अपने घर को पाकिस्तानी आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में उपलब्ध कराया। नेटवर्क का काम सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमले की योजना बनाने वाले आतंकियों को लॉजिस्टिकल सहायता देना था।

एनआईए के अनुसार आरोपी ने अपनी संपत्ति का उपयोग आपत्तिजनक सामग्री को छिपाने के लिए भी किया, जो कि यूएपीए के तहत एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।

आगे की जांच

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि पूरे नेटवर्क की पहचान करने और उसका पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है। इसमें अन्य ओजीडब्ल्यू, सहयोगकर्ताओं और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुँचने के प्रयास शामिल हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की संपत्ति जब्ती से आतंकी नेटवर्क को रसद और वित्तीय दोनों मोर्चों पर कमज़ोर किया जाता है। आने वाले हफ्तों में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को इतने समय तक काम करने का मौका कैसे मिला। दनिहामा जैसे शहरी इलाकों में आतंकी ठिकाने की मौजूदगी यह दर्शाती है कि एलईटी ने अपनी पैठ ग्रामीण क्षेत्रों से आगे बढ़ाई है। अब देखना होगा कि एनआईए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक जांच को कितना आगे ले जा पाती है — क्योंकि स्थानीय नेटवर्क तोड़ना एक कदम है, असली मास्टरमाइंड तक पहुँचना दूसरा।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईए ने श्रीनगर में कौन सी संपत्ति जब्त की और क्यों?
एनआईए ने श्रीनगर के हजरतबल इलाके के दनिहामा गाँव में गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ 'मामा गैस' की रिहायशी संपत्ति जब्त की। यह संपत्ति लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने और उनकी गतिविधियों में सहायता के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।
इस मामले में कौन-से आतंकी पकड़े गए थे?
6 अप्रैल 2026 को एनआईए की तलाशी के दौरान इसी संपत्ति से दो संदिग्ध आतंकवादी — अबू हुरैरा और खुबैब — पकड़े गए थे, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए गए हैं। उस दौरान वहाँ से विस्फोटक जैसा पदार्थ और डिजिटल डिवाइस भी बरामद हुए।
ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क क्या करता था?
एनआईए की जांच के अनुसार, यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे एलईटी हैंडलर्स के निर्देश पर पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही, पनाह और रसद सहायता का काम करता था। इसका मकसद सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षाबलों और नागरिकों पर हमलों को अंजाम देने में मदद करना था।
यह संपत्ति किस कानून के तहत जब्त की गई?
यह संपत्ति गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 की धारा 25 के तहत जब्त की गई। एनआईए के महानिदेशक से आवश्यक अनुमति लेने के बाद यह कदम उठाया गया।
एनआईए की जांच आगे कहाँ तक जाएगी?
एनआईए ने कहा है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है। इसमें अन्य ओजीडब्ल्यू, सहयोगकर्ताओं और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की पहचान शामिल है। आने वाले समय में इस मामले में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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