नितिन गडकरी: 'हाईवे मैन ऑफ इंडिया' जिन्होंने नागपुर से निकलकर बदल दी भारत की सड़क तस्वीर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का जन्म 27 मई 1957 को महाराष्ट्र के नागपुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। आज जब देश के कोने-कोने को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे और आर्थिक कॉरिडोर भारत के विकास की नई कहानी लिख रहे हैं, तो उन सड़कों के पीछे सबसे प्रमुख नाम गडकरी का ही है। उन्हें 'हाईवे मैन ऑफ इंडिया' और 'एक्सप्रेसवे मैन ऑफ इंडिया' जैसे विशेषणों से नवाज़ा जाता है — एक ऐसी पहचान जो भाषणों से नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखने वाले काम से बनी है।
नागपुर से राष्ट्रीय मंच तक: राजनीतिक सफ़र
गडकरी के व्यक्तित्व को दिशा देने में नागपुर की ज़मीन, उनकी माँ की समाजसेवा की प्रेरणा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही। एमकॉम, एलएलबी और डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट की शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने वकालत की बजाय जनसेवा का रास्ता चुना। छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से राजनीति की शुरुआत की और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के युवा मोर्चे से जुड़ गए।
1975 के आपातकाल ने उनके जीवन में एक निर्णायक मोड़ लाया और राजनीति को लेकर उनकी सोच को और पक्का किया। वे महाराष्ट्र BJP के अध्यक्ष बने और बाद में पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी संभाला।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे: इंफ्रास्ट्रक्चर विजन की पहली झलक
1995 से 1999 के बीच महाराष्ट्र के लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री रहते हुए गडकरी ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार किया, जो उस दौर में आधुनिक भारत की नई रफ़्तार का प्रतीक बनी। मुंबई में फ्लाईओवर निर्माण की तेज़ गति ने उन्हें 'फ्लाईओवर मैन' का नाम दिलाया। इसी दौरान उन्होंने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) और बीओटी (Build Operate Transfer) मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू किया, जिससे सरकारी संसाधनों पर दबाव कम हुआ और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की गति बढ़ी। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) की स्थापना उनकी दूरदर्शिता का उदाहरण मानी जाती है, जिसके ज़रिए पहली बार खुले बाज़ार से बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग जुटाई गई।
राष्ट्रीय हाईवे नेटवर्क में ऐतिहासिक विस्तार
केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बनने के बाद गडकरी ने भारत के सड़क नेटवर्क को अभूतपूर्व विस्तार दिया। उनके कार्यकाल में देश का नेशनल हाईवे नेटवर्क लगभग 60 प्रतिशत तक बढ़ा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से लेकर ग्रामीण सड़कों तक, उन्होंने सड़क निर्माण को महज़ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना। गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जो रिपोर्ट तैयार की, उसी ने आगे चलकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की नींव रखी।
महाराष्ट्र में उन्होंने 13,736 दूरस्थ गाँवों को ऑल-वेदर रोड से जोड़ने की परियोजना को गति दी। विदर्भ जैसे क्षेत्रों में जहाँ कभी चिकित्सा, राशन और शिक्षा तक पहुँच मुश्किल थी, वहाँ सड़कें विकास का माध्यम बनीं।
खेती, ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान
गडकरी की सोच केवल शहरी एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं रही। जैव-ईंधन, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने में उनकी विशेष रुचि रही है। विदर्भ में जलग्रहण विकास, सौर ऊर्जा आधारित गाँव, गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ और सौर रिक्शा जैसी कई सामाजिक परियोजनाओं को उन्होंने आगे बढ़ाया। उनके समर्थकों का कहना है कि यह बहुआयामी दृष्टि ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है।
'फास्ट डिसीजन, फास्ट एक्शन': गडकरी की कार्यशैली
भारतीय राजनीति में गडकरी को 'रिजल्ट ओरिएंटेड लीडर' कहा जाता है। उनकी पहचान घोषणाओं से ज़्यादा डिलीवरी पर टिकी है। उनकी राजनीति जाति, धर्म और वैचारिक शोर से अलग, विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रित रही है। समर्थकों का मानना है कि अगर भारत आज दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले देशों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तो उसमें गडकरी की 'फास्ट डिसीजन, फास्ट एक्शन' कार्यशैली की बड़ी भूमिका है। आने वाले वर्षों में उन्हें इस बात के लिए याद किया जाएगा कि उन्होंने भारत को विकास की वह रफ़्तार दी जहाँ हाईवे केवल दूरी नहीं घटाते, बल्कि अर्थव्यवस्था, उद्योग, गाँव और शहरों को एक सूत्र में पिरोते हैं।