नीतीश कुमार के राज्यसभा में शामिल होने पर जदयू की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
सारांश
Key Takeaways
- नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- जदयू में नेताओं की प्रतिक्रियाएं भिन्न हैं।
- कई नेता उनके निर्णय का समर्थन कर रहे हैं।
- कुछ नेता इस फैसले से निराश हैं।
- जदयू का भविष्य युवा नेताओं पर निर्भर है।
नई दिल्ली/पटना, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जदयू के नेताओं की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ नेता नीतीश कुमार के बिहार छोड़ने को लेकर निराश नजर आए, जबकि अन्य ने उनके निर्णय का समर्थन किया।
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव हर्षवर्धन सिंह ने कहा, "नीतीश कुमार ने इतिहास और बिहार को बदलने का कार्य किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में आने वाले वर्षों तक केवल 'नीतीश मॉडल' ही प्रभावी रहेगा।
जदयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने कहा, "नीतीश कुमार ने जो कार्य किया है, उसकी सभी ने सराहना की है। बिहार में कोई ऐसा समुदाय नहीं है जो यह कह सके कि उन्होंने उनके लिए कुछ नहीं किया।" सांसद सुनील कुमार ने बताया कि चौथे सदन में शामिल होना नीतीश कुमार की प्रबल इच्छा थी।
हालांकि, सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा, "यह कोई खुशी की बात नहीं है। बिहार का हर व्यक्ति रो रहा है। लोग चाहते थे कि नीतीश कुमार बिहार में रहकर काम करें।"
बिहार के लिए नीतीश कुमार की निष्ठा पर जदयू विधायक मनोरमा देवी ने कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमारे लिए एक अभिभावक की तरह हैं। उनका राज्यसभा जाना एक व्यक्तिगत निर्णय था और हम सभी उनके साथ हैं।"
उमेश सिंह कुशवाहा ने निशांत कुमार को जदयू का भविष्य बताया, और कहा, "उनमें बिहार और हमारी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता है। वे एक होनहार और शिक्षित युवा नेता हैं।"