3 नवंबर 2026
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ग्रेटर नोएडा: पड़ोसी को फंसाने के लिए खुद पर करवाई फर्जी गोलीबारी, दादरी पुलिस ने तीन को दबोचा

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ग्रेटर नोएडा: पड़ोसी को फंसाने के लिए खुद पर करवाई फर्जी गोलीबारी, दादरी पुलिस ने तीन को दबोचा

सारांश

ग्रेटर नोएडा में एक शख्स ने पुरानी दुश्मनी का बदला लेने के लिए अपने ही रिश्तेदारों से खुद पर गोली चलवाई — और सब कुछ सीसीटीवी के सामने। साजिश इतनी 'बारीक' थी कि झूठा मुकदमा भी दर्ज हो गया, पर दादरी पुलिस की जांच ने पूरा पर्दाफाश कर दिया।

मुख्य बातें

हरेंद्र नागर ने पड़ोसी विकास सैन को फंसाने के लिए सीसीटीवी कैमरे के सामने खुद पर फर्जी गोलीबारी करवाई।
दादरी पुलिस ने 2 नवंबर 2026 को साजिश का पर्दाफाश करते हुए तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी — प्रतीक उर्फ कलुआ (26) , अतुल भाटी (29) , अभिषेक नागर (25) — हरेंद्र के भतीजे, बहनोई और बेटे हैं।
पुलिस ने देसी .315 बोर पिस्तौल , दो जिंदा कारतूस , सीपी प्लस डीवीआर और एक मोटरसाइकिल जब्त की।
दोनों पक्षों के बीच करीब एक साल पुरानी दुश्मनी इस साजिश की जड़ में थी।

दादरी पुलिस ने 2 नवंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा के एक व्यक्ति द्वारा अपने पड़ोसी को झूठे मामले में फंसाने के लिए रची गई फर्जी गोलीबारी की साजिश का पर्दाफाश किया। गौतम बुद्ध नगर पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी हरेंद्र नागर ने अपने ही परिजनों को बुलाकर सीसीटीवी कैमरे के सामने खुद पर गोली चलवाई और फिर पड़ोसी विकास सैन के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

साजिश का मूल कारण

पुलिस जांच में सामने आया कि हरेंद्र नागर और विकास सैन के बीच करीब एक साल पहले किसी विवाद में तीखी दुश्मनी पैदा हुई थी। उसी दुश्मनी का बदला लेने की नीयत से हरेंद्र ने यह पूरी साजिश रची। उसका उद्देश्य विकास सैन को एक संगीन आपराधिक मामले में फंसाकर जेल भेजना था।

अधिकारियों के अनुसार, हरेंद्र ने इस योजना को बड़ी सावधानी से तैयार किया और पाँच अन्य लोगों को इसमें शामिल किया। यह ऐसे समय में आया है जब सीसीटीवी फुटेज को झूठे मामले बनाने के लिए दुरुपयोग करने के मामले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ते नजर आ रहे हैं।

घटना का तरीका

पुलिस के अनुसार, हरेंद्र नागर ने अतुल भाटी (अपना बहनोई) और प्रतीक उर्फ कलुआ (अपना भतीजा) को अपने घर बुलाया। इसके बाद सीसीटीवी कैमरे की नजर में जानबूझकर यह फर्जी गोलीबारी की घटना रची गई — इस तरह कि फुटेज देखने में असली लगे।

घटना को 'प्रामाणिक' दिखाने के बाद हरेंद्र ने दादरी थाना पहुंचकर पड़ोसी विकास सैन के खिलाफ गोलीबारी का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। हालाँकि जैसे ही पुलिस ने जांच शुरू की, कई विसंगतियाँ उजागर होने लगीं।

पुलिस जांच और गिरफ्तारियाँ

दादरी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से पड़ताल की और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर साजिश की परतें उघाड़ीं। जांच में पता चला कि जो व्यक्ति 'पीड़ित' बनकर शिकायत लेकर आया था, वही इस पूरे षड्यंत्र का सूत्रधार था।

पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया — प्रतीक उर्फ कलुआ (26), निवासी कुड़ीखेड़ा गाँव; अतुल भाटी (29), निवासी साकीपुर; और अभिषेक नागर (25), निवासी न्यादरगंज। ये तीनों हरेंद्र नागर के क्रमशः भतीजे, बहनोई और पुत्र हैं।

बरामद सामग्री

पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक देसी .315 बोर पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस, एक सीपी प्लस डीवीआर और एक मोटरसाइकिल बरामद की। गौरतलब है कि डीवीआर की जब्ती इस बात का संकेत है कि आरोपियों ने साजिश के सबूत मिटाने की भी कोशिश की होगी।

आगे की कार्रवाई

पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और मुख्य सूत्रधार हरेंद्र नागर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस साजिश में शामिल बाकी तीन लोगों की तलाश भी जारी है। आने वाले दिनों में चालान दाखिल होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपराध सुलझाने का औजार है, अब खुद साजिश का हिस्सा बन सकती है। हरेंद्र नागर ने निगरानी प्रणाली को 'साक्ष्य निर्माण' के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की — यह पुलिस जांच पद्धति के लिए एक नई चुनौती है। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार का फायदा उठाकर निर्दोष व्यक्ति को महीनों कानूनी लड़ाई में उलझाया जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ते ऐसे 'फ्रेमिंग' मामले पुलिस और न्यायपालिका दोनों के सामने यह सवाल रखते हैं कि झूठे मुकदमे दर्ज करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई को और कड़ा किया जाए।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा फर्जी गोलीबारी साजिश क्या है?
दादरी थाना क्षेत्र के निवासी हरेंद्र नागर ने अपने पड़ोसी विकास सैन को झूठे गोलीबारी के मामले में फंसाने के लिए अपने ही रिश्तेदारों से खुद पर गोली चलवाई और सीसीटीवी में इसे रिकॉर्ड कराया। इसके बाद उसने दादरी थाने में विकास सैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया, जिसे पुलिस जांच ने झूठा साबित कर दिया।
इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है — प्रतीक उर्फ कलुआ (26), अतुल भाटी (29) और अभिषेक नागर (25)। ये तीनों क्रमशः मुख्य आरोपी हरेंद्र नागर के भतीजे, बहनोई और बेटे हैं।
पुलिस ने साजिश का पर्दाफाश कैसे किया?
दादरी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर विसंगतियाँ पकड़ीं। जांच में पता चला कि 'पीड़ित' हरेंद्र नागर खुद ही इस पूरी घटना का सूत्रधार था, और उसके रिश्तेदारों ने उसे साजिश को अंजाम देने में मदद की थी।
इस मामले में क्या सामग्री बरामद की गई?
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक देसी .315 बोर पिस्तौल, दो जिंदा कारतूस, एक सीपी प्लस डीवीआर और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। डीवीआर की बरामदगी से संकेत मिलता है कि साजिश को अंजाम देने में रिकॉर्डिंग डिवाइस की केंद्रीय भूमिका थी।
हरेंद्र नागर और विकास सैन के बीच विवाद का कारण क्या था?
पुलिस के अनुसार दोनों के बीच करीब एक साल पहले किसी झगड़े में दुश्मनी पैदा हुई थी। उसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए हरेंद्र ने विकास सैन को जघन्य अपराध में फंसाकर जेल भेजने की यह योजना बनाई।
राष्ट्र प्रेस
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