3 अगस्त 2026
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पुणे में पूर्वोत्तर छात्रों के लिए ₹10 करोड़ का हॉस्टल, मणिपुर के उपमुख्यमंत्री डिखो ने रखी आधारशिला

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पुणे में पूर्वोत्तर छात्रों के लिए ₹10 करोड़ का हॉस्टल, मणिपुर के उपमुख्यमंत्री डिखो ने रखी आधारशिला

सारांश

पुणे के कटराज में ₹10 करोड़ की लागत से बनने वाला 'रानी गाइदिनल्यू गर्ल्स हॉस्टल' पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए 'घर से दूर घर' बनेगा। मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने आधारशिला रखते हुए इसे 'विकसित भारत' की दिशा में युवाओं को समान अवसर देने की प्रतिबद्धता बताया।

मुख्य बातें

मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने 3 अगस्त 2026 को पुणे के कटराज में ₹10 करोड़ की लागत वाले हॉस्टल की आधारशिला रखी।
हॉस्टल का पूरा नाम 'स्वर्गीय जमनाबाई फिरोदिया नॉर्थ ईस्ट इंडिया भवन – रानी गाइदिनल्यू गर्ल्स हॉस्टल' है।
यह हॉस्टल विशेष रूप से मणिपुर सहित पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए बनाया जा रहा है।
परियोजना के डेढ़ वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।
हॉस्टल सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का भी काम करेगा।

मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने 3 अगस्त 2026 को पुणे के कटराज स्थित गुजर-निंबालकरवाड़ी में लगभग ₹10 करोड़ की लागत से बनने वाले 'स्वर्गीय जमनाबाई फिरोदिया नॉर्थ ईस्ट इंडिया भवन – रानी गाइदिनल्यू गर्ल्स हॉस्टल' की आधारशिला रखी। यह हॉस्टल विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के छात्रों, खासकर मणिपुर से पुणे में पढ़ने आए विद्यार्थियों को सुरक्षित और सहयोगी आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है।

परियोजना का महत्व और उद्देश्य

नागा आदिवासी समुदाय के वरिष्ठ नेता डिखो ने इस अवसर पर कहा, "यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इमारत बनाने से कहीं ज्यादा है। यह भारत के हर हिस्से से आने वाले छात्रों और युवाओं का समर्थन करने के लिए देश की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।" उन्होंने इस प्रस्तावित भवन को पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए 'घर से दूर एक और घर' बताया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा, "जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' के विजन की ओर बढ़ रहा है, हर युवा को, चाहे वह कहीं से भी आया हो, अच्छी शिक्षा और अवसरों तक समान पहुँच मिलनी चाहिए।"

छात्रों को मिलेगी रहने की स्थायी सुविधा

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह हॉस्टल डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार होने की उम्मीद है। हॉस्टल खासतौर पर पुणे में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे मणिपुर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए एक स्थायी ठिकाने का काम करेगा, जिससे उन्हें रहने की जगह खोजने की चुनौतियों से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

अधिकारी ने बताया कि अलग-अलग पृष्ठभूमि, जातीय समुदायों और राज्यों के छात्र एक ही छत के नीचे रहेंगे, पढ़ेंगे और एक-दूसरे से संवाद करेंगे। इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान, एकता और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को बल मिलेगा।

पूर्वोत्तर की विरासत और राष्ट्रीय एकता

डिखो ने इस अवसर पर जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की विरासत का एक अहम हिस्सा है — समृद्ध परंपराओं, जीवंत संस्कृतियों और अपार प्रतिभा से भरपूर यह क्षेत्र देश की वृद्धि और प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की ऐतिहासिक विरासत और अनोखी जीवनशैली देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।

मणिपुर सरकार की प्रतिबद्धता

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मणिपुर सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर बढ़ाने वाली पहलों का समर्थन जारी रखेगी। यह हॉस्टल उस दिशा में एक ठोस कदम है, जो न केवल आवास की सुविधा देगा बल्कि छात्रों के व्यक्तिगत विकास, आत्मविश्वास और दीर्घकालिक सफलता को भी बढ़ावा देगा। गौरतलब है कि यह परियोजना ऐसे समय में शुरू हुई है जब पूर्वोत्तर राज्यों के छात्रों के लिए देश के अन्य शहरों में सुरक्षित और किफायती आवास की माँग लगातार बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डेढ़ वर्ष की समयसीमा और ₹10 करोड़ का बजट पुणे जैसे महँगे शहर में कितनी छात्राओं को वास्तविक राहत दे पाएगा। पूर्वोत्तर के छात्रों को महानगरों में आवास और सुरक्षा की जो चुनौतियाँ झेलनी पड़ती हैं, उनके मद्देनज़र एक हॉस्टल प्रतीकात्मक कदम तो है, पर पर्याप्त नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर स्वयं आंतरिक तनावों से जूझ रहा है — ऐसे में राज्य सरकार का बाहर के शहरों में निवेश का संदेश सकारात्मक है, बशर्ते क्रियान्वयन समयबद्ध और पारदर्शी हो।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे में पूर्वोत्तर छात्रों के लिए बनने वाला हॉस्टल कहाँ स्थित होगा?
यह हॉस्टल पुणे के कटराज क्षेत्र में गुजर-निंबालकरवाड़ी में बनाया जाएगा। इसकी आधारशिला 3 अगस्त 2026 को मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने रखी।
इस हॉस्टल की लागत कितनी है और इसे कब तक बनाया जाएगा?
इस हॉस्टल की अनुमानित लागत लगभग ₹10 करोड़ है और अधिकारियों के अनुसार यह डेढ़ वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है।
रानी गाइदिनल्यू गर्ल्स हॉस्टल किसके लिए बनाया जा रहा है?
यह हॉस्टल विशेष रूप से पुणे में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों की छात्राओं के लिए बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें सुरक्षित, सहयोगी और किफायती आवास उपलब्ध कराना है।
मणिपुर के उपमुख्यमंत्री लोसी डिखो ने इस परियोजना के बारे में क्या कहा?
डिखो ने कहा कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि देश की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने इसे पूर्वोत्तर छात्रों के लिए 'घर से दूर एक और घर' बताया और कहा कि 'विकसित भारत' के विजन में हर युवा को समान शैक्षिक अवसर मिलने चाहिए।
यह हॉस्टल राष्ट्रीय एकता में कैसे योगदान देगा?
अधिकारियों के अनुसार, इस हॉस्टल में अलग-अलग पृष्ठभूमि, जातीय समुदायों और राज्यों के छात्र एक साथ रहेंगे और पढ़ेंगे, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी समझ और राष्ट्रीय अखंडता की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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