18 अक्टूबर 2026
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रामलीला मैदान रैली पर NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री का सवाल: 'अनुमति लेनी पड़े, यह लोकतंत्र की विडंबना'

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रामलीला मैदान रैली पर NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री का सवाल: 'अनुमति लेनी पड़े, यह लोकतंत्र की विडंबना'

सारांश

एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री और DUSU उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने 1 नवंबर की कांग्रेस रैली के लिए रामलीला मैदान में अनुमति की शर्त को लोकतंत्र पर अंकुश बताया। खत्री ने कहा— 'अंग्रेजों के जमाने में भी ऐसी बदकिस्मती नहीं थी।' शौकीन ने इसे 'लोकतंत्र की सीधी हत्या' करार दिया।

मुख्य बातें

NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री और DUSU उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने 18 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस रैली के लिए स्थान निर्धारण पर सवाल उठाए।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को रैली की अनुमति दी है।
खत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए अब रामलीला मैदान में भी अनुमति लेनी पड़ रही है।
शौकीन ने विरोध प्रदर्शन पर पाबंदियों को 'लोकतंत्र की सीधी हत्या' बताया।
दोनों नेताओं ने मौजूदा गिरफ्तारियों को गलत बताया, हालाँकि किसी विशिष्ट मामले का विवरण उपलब्ध बयान में नहीं दिया।

एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने 18 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस रैली के लिए निर्धारित स्थान पर कड़े सवाल उठाए हैं। दोनों छात्र नेताओं का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए स्थान को सीमित करना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को कमज़ोर करता है।

मुख्य विवाद

दिल्ली पुलिस द्वारा रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली की अनुमति दिए जाने के बाद यह विवाद सामने आया। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन के लिए स्थान निर्धारित करना और उस पर पाबंदियाँ लगाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने के समान है। उन्होंने प्रशासन से माँग की है कि युवाओं को खुलकर अपनी माँगें रखने का अवसर दिया जाए।

रौनक खत्री का बयान

एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री ने कहा कि यह विडंबना है कि देश के नागरिकों को अपने ही देश में सभा करने या प्रदर्शन करने के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना चाहिए था, उसके लिए अब रामलीला मैदान में भी अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।

खत्री ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा, 'ऐसी बदकिस्मती तो अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं थी, जो आज हम भारत सरकार और भाजपा के शासन में देख रहे हैं।'

दीपांशु शौकीन की चिंता

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने विरोध प्रदर्शन के लिए सीमित अवसर उपलब्ध कराए जाने को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, 'अगर इस देश के युवाओं को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है, तो आप समझ सकते हैं कि इस देश में लोकतंत्र किस हद तक गिर चुका है। यह लोकतंत्र की सीधी हत्या है।'

शौकीन ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में हो रही गिरफ्तारियाँ पूरी तरह गलत हैं। हालाँकि, उनके उपलब्ध बयान में गिरफ्तारियों से संबंधित किसी विशिष्ट मामले या आरोप का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया।

छात्र नेताओं की माँग

दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, ताकि युवा अपनी समस्याओं और माँगों को सार्वजनिक रूप से उठा सकें। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि युवाओं को खुलकर अपनी बात रखने का मंच मिलना चाहिए।

आगे क्या

गौरतलब है कि 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो रही है। छात्र संगठनों की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि रैली से पहले सभा-स्थल और अनुमति प्रक्रिया पर बहस और तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों छात्र नेता कांग्रेस से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि हैं, इसलिए उनकी आलोचना में राजनीतिक पक्षधरता की संभावना को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल छोड़ देती है कि क्या यही छात्र नेता विपक्षी दलों के प्रदर्शनों पर भी इतनी ही मुखरता से बोलते हैं।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली कब होने वाली है?
कांग्रेस की रैली 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली है। दिल्ली पुलिस ने इसके लिए अनुमति दे दी है।
NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री ने रैली के स्थान पर क्या आपत्ति जताई?
रौनक खत्री ने कहा कि नागरिकों को अपने ही देश में सभा या प्रदर्शन के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है, जो एक विडंबना है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जैसे पारंपरिक प्रदर्शन स्थल पर अब प्रदर्शन संभव नहीं रहा।
दीपांशु शौकीन ने इस मामले में क्या कहा?
DUSU उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने विरोध प्रदर्शन पर सीमाओं को 'लोकतंत्र की सीधी हत्या' बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का अवसर न मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
क्या इस विवाद में किसी गिरफ्तारी का भी ज़िक्र है?
दीपांशु शौकीन ने मौजूदा समय में हो रही गिरफ्तारियों को गलत बताया, लेकिन उनके उपलब्ध बयान में किसी विशिष्ट मामले या आरोप का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया।
छात्र नेताओं की मुख्य माँग क्या है?
दोनों नेताओं ने माँग की है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति के लिए पर्याप्त जगह हो और युवाओं को अपनी समस्याएँ सार्वजनिक रूप से उठाने का अवसर मिले।
राष्ट्र प्रेस
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