रामलीला मैदान रैली पर NSUI अध्यक्ष रौनक खत्री का सवाल: 'अनुमति लेनी पड़े, यह लोकतंत्र की विडंबना'
सारांश
मुख्य बातें
एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने 18 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस रैली के लिए निर्धारित स्थान पर कड़े सवाल उठाए हैं। दोनों छात्र नेताओं का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए स्थान को सीमित करना लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को कमज़ोर करता है।
मुख्य विवाद
दिल्ली पुलिस द्वारा रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली की अनुमति दिए जाने के बाद यह विवाद सामने आया। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन के लिए स्थान निर्धारित करना और उस पर पाबंदियाँ लगाना लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने के समान है। उन्होंने प्रशासन से माँग की है कि युवाओं को खुलकर अपनी माँगें रखने का अवसर दिया जाए।
रौनक खत्री का बयान
एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री ने कहा कि यह विडंबना है कि देश के नागरिकों को अपने ही देश में सभा करने या प्रदर्शन करने के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना चाहिए था, उसके लिए अब रामलीला मैदान में भी अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।
खत्री ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधते हुए कहा, 'ऐसी बदकिस्मती तो अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं थी, जो आज हम भारत सरकार और भाजपा के शासन में देख रहे हैं।'
दीपांशु शौकीन की चिंता
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने विरोध प्रदर्शन के लिए सीमित अवसर उपलब्ध कराए जाने को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, 'अगर इस देश के युवाओं को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है, तो आप समझ सकते हैं कि इस देश में लोकतंत्र किस हद तक गिर चुका है। यह लोकतंत्र की सीधी हत्या है।'
शौकीन ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में हो रही गिरफ्तारियाँ पूरी तरह गलत हैं। हालाँकि, उनके उपलब्ध बयान में गिरफ्तारियों से संबंधित किसी विशिष्ट मामले या आरोप का विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया।
छात्र नेताओं की माँग
दोनों नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, ताकि युवा अपनी समस्याओं और माँगों को सार्वजनिक रूप से उठा सकें। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि युवाओं को खुलकर अपनी बात रखने का मंच मिलना चाहिए।
आगे क्या
गौरतलब है कि 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो रही है। छात्र संगठनों की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि रैली से पहले सभा-स्थल और अनुमति प्रक्रिया पर बहस और तेज़ हो सकती है।