ओम बिरला की कोटा-बूंदी में 'जीरो फेटेलिटी' पहल: हर साल 400 मौतें, 21 खतरनाक कॉरिडोर चिन्हित
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार, 24 जून 2026 को संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में सड़क सुरक्षा संस्था सेव लाइफ फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसका लक्ष्य कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र में 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम' लागू कर सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को शून्य के करीब लाना है। फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 400 से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों में जाती है।
युवाओं की जान का सवाल
बैठक में बिरला ने कहा कि सड़क हादसों में सबसे अधिक युवा मारे जाते हैं, जो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है और राष्ट्र की उत्पादक शक्ति का भी नुकसान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़क सुरक्षा महज प्रशासनिक मसला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है और इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। उनके अनुसार समन्वित प्रयासों से आने वाले वर्षों में दुर्घटना मृत्यु दर में 70 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
खतरनाक स्थलों की पहचान
सेव लाइफ फाउंडेशन ने बैठक में विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया। आंकड़ों के अनुसार कोटा-बूंदी क्षेत्र में 21 अति गंभीर सड़क कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जहाँ लगभग 50 प्रतिशत सड़क दुर्घटना मौतें होती हैं। इसके अलावा 19 स्थान ऐसे हैं जहाँ बार-बार ट्रैफिक नियम उल्लंघन के कारण करीब 25 प्रतिशत मौतें दर्ज होती हैं, और 12 अत्यंत संवेदनशील पैदल यात्री दुर्घटना स्थल हैं जहाँ लगभग 20 प्रतिशत मौतें होती हैं।
गौरतलब है कि क्षेत्र के लगभग 60 पुलिस थाना क्षेत्रों में से 25 थाना क्षेत्रों में कुल सड़क दुर्घटना मृत्यु का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा केंद्रित है। तेज गति और खतरनाक ओवरटेकिंग लगभग 24 प्रतिशत दुर्घटना मौतों का प्रमुख कारण बताया गया। एक सकारात्मक संकेत यह रहा कि वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में इस क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
बहु-विभागीय कार्ययोजना
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लोक निर्माण विभाग (PWD), शहरी स्थानीय निकायों, पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य विभाग के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान पर चर्चा हुई। इंजीनियरिंग सुधार, सड़क सुरक्षा ऑडिट, ब्लैक स्पॉट सुधार, ट्रैफिक प्रबंधन और पैदल यात्रियों की सुरक्षा प्रमुख एजेंडे में रहे। राजमार्गों के किनारे स्थित स्कूलों के बच्चों की सुरक्षा पर भी विशेष चर्चा हुई।
दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता पर भी जोर दिया गया — एम्बुलेंस सेवाओं को प्रभावी बनाने और ट्रॉमा केयर प्रणाली को मजबूत करने के उपायों पर विमर्श हुआ।
तकनीक और निगरानी
बिरला ने कोटा में पहले से स्थापित कमांड एवं कंट्रोल सेंटरों का अधिकतम उपयोग करने पर बल दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली अपनाने की वकालत करते हुए कहा कि प्रमुख राजमार्गों और संवेदनशील स्थलों पर CCTV कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों की तत्काल पहचान कर चेतावनी और कार्रवाई की व्यवस्था विकसित करने का भी आह्वान किया।
आगे की राह
बिरला ने विश्वास जताया कि समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कोटा-बूंदी को देश का पहला आदर्श 'जीरो फेटेलिटी संसदीय क्षेत्र' बनाया जा सकता है। बैठक में सेव लाइफ फाउंडेशन के पदाधिकारियों के साथ लोकसभा अध्यक्ष के ओएसडी राजेश गोयल भी उपस्थित रहे। यह पहल यदि मॉडल के रूप में सफल होती है, तो इसे देश के अन्य संसदीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।