2 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गौतमबुद्धनगर की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना: सड़क दुर्घटनाओं में 35%, मौतों में 28% की कमी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गौतमबुद्धनगर की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना: सड़क दुर्घटनाओं में 35%, मौतों में 28% की कमी

सारांश

गौतमबुद्धनगर पुलिस की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना ने नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच सड़क मौतों में 28% और दुर्घटनाओं में 35% से अधिक की कमी लाकर उत्तर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया — यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन रहा है।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना नवंबर 2025 से लागू है।
जनवरी–मई 2026 में सड़क दुर्घटनाएँ 35.24% , मौतें 28% और घायल 45.57% घटे।
नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच 86,902 चालान — ओवरस्पीडिंग, ड्रंक ड्राइविंग, रॉन्ग साइड सहित।
9 थानों में से 5 को सफल प्रदर्शन के बाद परियोजना सूची से बाहर किया गया; बिसरख, बादलपुर, दादरी, दनकौर में अभियान जारी।
15 कंजेशन पॉइंट्स में से 7 समाप्त; गोल्डन ऑवर सहायता के लिए अस्पतालों व एम्बुलेंस से समन्वय।

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की 'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना ने जनवरी से मई 2026 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 35.24 प्रतिशत, मृतकों की संख्या में 28 प्रतिशत और घायलों में 45.57 प्रतिशत की कमी दर्ज कर उत्तर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का रिकॉर्ड बनाया है। नवंबर 2025 से लागू इस परियोजना ने जिले में सड़क सुरक्षा का परिदृश्य बदल दिया है और यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए अनुकरणीय बनकर उभरा है।

परियोजना की पृष्ठभूमि और संरचना

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में यह परियोजना सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, सेफ लाइफ फाउंडेशन, उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के दिशानिर्देशों के अनुपालन में शुरू की गई। परियोजना के तहत जिले में कुल सड़क दुर्घटना जनहानि का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा दर्ज करने वाले 9 थाना क्षेत्रों और दो क्रिटिकल कॉरिडोर को चिन्हित किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटनाओं के मामले में देश के सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में से एक रहा है। गौरतलब है कि जिले के कुछ ही थाना क्षेत्र और कॉरिडोर कुल मौतों के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार थे — यह केंद्रित हस्तक्षेप की रणनीति की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

प्रवर्तन और तकनीकी उपाय

क्रिटिकल कॉरिडोर पर विशेष सीसी (क्रिटिकल कॉरिडोर) टीमों का गठन किया गया, जिन्हें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर, बॉडी वॉर्न कैमरा और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए। नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच इन टीमों ने कुल 86,902 चालान किए।

इनमें ओवरस्पीडिंग के 13,798, रॉन्ग साइड ड्राइविंग के 16,682, बिना हेलमेट के 14,418 और ड्रंक एंड ड्राइव के 4,109 मामले शामिल हैं। दुर्घटना-संभावित स्थलों पर अवैध कटों को बंद कराया गया, डिवाइडर बनाए गए तथा रम्बल स्ट्रिप, रोड मार्किंग, साइनेज बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए गए।

मुख्य परिणाम और आँकड़े

नवंबर 2025 में वर्ष 2024 के नवंबर की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 27 प्रतिशत, मृतकों में 25 प्रतिशत और घायलों में 30 प्रतिशत की कमी आई। दिसंबर 2025 में यह प्रदर्शन और बेहतर हुआ — दुर्घटनाओं में 40 प्रतिशत, मृतकों में 34 प्रतिशत और घायलों में 55 प्रतिशत की रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई।

इस सफलता के आधार पर परियोजना में शामिल 9 थानों में से 5 को परियोजना सूची से बाहर कर दिया गया। वर्तमान में बिसरख, बादलपुर, दादरी और दनकौर थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान जारी है।

इंजीनियरिंग सुधार और यातायात प्रबंधन

नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सहयोग से सड़क मरम्मत, गड्ढा भराई और इंजीनियरिंग सुधार कार्य कराए गए। कमिश्नरेट क्षेत्र में चिन्हित 15 कंजेशन पॉइंट्स में से 7 को समाप्त कर दिया गया है, शेष पर कार्य जारी है।

रेड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन योजना के तहत प्रमुख मार्गों पर रूट मार्शलों की तैनाती की गई है। अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं और आपातकालीन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर में त्वरित सहायता सुनिश्चित की जा रही है।

आगे की राह

गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट का यह मॉडल उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक व्यावहारिक खाका प्रस्तुत करता है। केंद्रित प्रवर्तन, इंजीनियरिंग हस्तक्षेप और बहु-एजेंसी समन्वय के इस त्रिस्तरीय दृष्टिकोण को यदि राज्यव्यापी स्तर पर अपनाया जाए, तो सड़क दुर्घटना मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह कमी टिकाऊ है या प्रवर्तन की तीव्रता कम होते ही आँकड़े फिर बढ़ेंगे। देश के कई शहरों में इसी तरह के अभियानों के बाद 'रिबाउंड इफेक्ट' देखा गया है, जहाँ दबाव हटते ही उल्लंघन लौट आए। परियोजना की सबसे मज़बूत कड़ी इंजीनियरिंग सुधार हैं — अवैध कट बंद करना, डिवाइडर और रम्बल स्ट्रिप — क्योंकि ये मानवीय व्यवहार पर निर्भर नहीं। यदि उत्तर प्रदेश सरकार इस मॉडल को दोहराना चाहती है, तो प्रवर्तन-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ-साथ स्थायी इंजीनियरिंग बदलावों को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' परियोजना क्या है?
यह गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा नवंबर 2025 में शुरू की गई सड़क सुरक्षा परियोजना है, जिसका उद्देश्य जिले में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को शून्य के करीब लाना है। इसमें कड़े प्रवर्तन, इंजीनियरिंग सुधार और आपातकालीन प्रतिक्रिया को एकीकृत किया गया है।
परियोजना से कितनी कमी आई है?
जनवरी से मई 2026 में 2025 की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 35.24%, मृतकों में 28% और घायलों में 45.57% की कमी दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 में सबसे बड़ी एकल-माह कमी रही — दुर्घटनाएँ 40% और घायल 55% घटे।
परियोजना में कौन-से थाना क्षेत्र अभी भी शामिल हैं?
शुरुआत में 9 थाना क्षेत्र शामिल थे, जिनमें से 5 को सफल प्रदर्शन के बाद सूची से बाहर किया गया। वर्तमान में बिसरख, बादलपुर, दादरी और दनकौर थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान जारी है।
क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें क्या करती हैं?
ये विशेष टीमें स्पीड लेजर गन, ब्रेथ एनालाइजर और बॉडी वॉर्न कैमरा से लैस होकर दुर्घटना-संभावित मार्गों पर तैनात रहती हैं। नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच इन्होंने 86,902 चालान किए, जिनमें ओवरस्पीडिंग, ड्रंक ड्राइविंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग के मामले प्रमुख हैं।
यह मॉडल उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए कैसे उपयोगी है?
गौतमबुद्धनगर ने उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में सर्वाधिक कमी दर्ज कर एक व्यावहारिक खाका तैयार किया है। केंद्रित प्रवर्तन, बहु-एजेंसी समन्वय और इंजीनियरिंग हस्तक्षेप के इस त्रिस्तरीय मॉडल को अन्य जिलों में लागू किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले