परिसीमन BJP को फायदा पहुँचाने के लिए हुआ: J&K CM उमर अब्दुल्ला का बड़ा आरोप
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 7 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश में परिसीमन भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राजनीतिक लाभ पहुँचाने के इरादे से किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का इस्तेमाल भी उसी पार्टी की मदद के लिए किया जा रहा है।
परिसीमन पर मुख्यमंत्री के आरोप
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जम्मू-कश्मीर में परिसीमन BJP को समर्थन देने के लिए किया गया था।' उनका कहना था कि इस परिसीमन के कारण केंद्र शासित प्रदेश को पहले ही नुकसान उठाना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर देश के कई हिस्सों में सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसा किया जा रहा है और जम्मू-कश्मीर में भी इसी रास्ते पर चला जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में नोटिस जारी किए जाने के बाद, फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर BJP की मदद करना अब उतना सहज नहीं होगा।
मानहानि मुकदमे पर बयान
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने एक प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक में प्रकाशित एक रिपोर्ट का संदर्भ देते हुए कहा कि यदि वह रिपोर्ट गलत होती, तो सरकार ने उस अखबार पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया होता। उनके अनुसार, मुकदमा न होने का तथ्य यह प्रमाणित करता है कि वह रिपोर्ट सही थी। गौरतलब है कि उन्होंने अखबार या रिपोर्ट का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया।
मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा
मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वे दिल्ली में होने वाली आगामी GST बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से परामर्श करेंगे और उसके बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा।
नियमों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम दस मंत्री हो सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री सहित केवल छह मंत्री हैं, जिसका अर्थ है कि उमर अब्दुल्ला चार और मंत्री शामिल कर सकते हैं और मौजूदा मंत्रियों में फेरबदल भी कर सकते हैं।
कांग्रेस की शर्त और विधानसभा की स्थिति
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस को मंत्रिमंडल में एक पद देने की पेशकश की थी। हालाँकि, जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, कांग्रेस मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी।
90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के 41 विधायक हैं, BJP के 29, कांग्रेस के 6, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के 4, आम आदमी पार्टी (AAP) का 1, CPI (M) का 1, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (PC) का 1, अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) का 1, और 6 निर्दलीय विधायक हैं — जिनमें से 4 निर्दलीय NC सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं।
आगे की राह
GST परिषद की बैठक के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। SIR प्रक्रिया और परिसीमन पर सर्वोच्च न्यायालय के रुख से राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते हैं, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।