29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उमर अब्दुल्ला ने भगवंत मान को लिखा पत्र, पंजाब में पशु-वाहनों से अवैध वसूली रोकने की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उमर अब्दुल्ला ने भगवंत मान को लिखा पत्र, पंजाब में पशु-वाहनों से अवैध वसूली रोकने की माँग

सारांश

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब के CM भगवंत मान को पत्र लिखकर पशु-वाहनों से हो रही गैर-कानूनी वसूली पर तत्काल कार्रवाई माँगी है। कश्मीर में मटन व्यापारी हड़ताल पर हैं और राज्य की आंतरिक जाँच में वसूली की पुष्टि हो चुकी है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला ने 29 जून 2026 को पंजाब CM भगवंत मान को पत्र लिखकर पशु-ढुलाई वाहनों पर गैर-कानूनी वसूली रोकने की माँग की।
ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स यूनियन ने शिकायत की कि मवेशी मेलों के ठेकेदार समूह वैध परमिट के बावजूद प्रति वाहन भारी शुल्क वसूल रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर सरकार की आंतरिक समिति ने जाँच में पाया कि यह वसूली बिना किसी कानूनी अनुमति के हो रही है।
जानवरों की आवाजाही जीएसटी-मुक्त है, फिर भी ट्रांसपोर्टरों से जबरन शुल्क लिया जा रहा है।
इस वसूली का असर कश्मीर में मांस की कीमतों और उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है; मटन व्यापारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
अब्दुल्ला ने मान सरकार से मवेशी मेलों की आगामी टेंडर प्रक्रिया से पहले सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार, 29 जून 2026 को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को एक औपचारिक पत्र लिखकर पंजाब से होकर जम्मू-कश्मीर जाने वाले पशु-ढुलाई वाहनों पर कथित तौर पर हो रही गैर-कानूनी वसूली पर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब कश्मीर में मटन व्यापारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं और मांस की आपूर्ति बाधित हो रही है।

क्या है पूरा मामला

ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री अब्दुल्ला के संज्ञान में यह मामला लाया कि पंजाब से गुजरते समय जानवरों से लदे वाहनों को मवेशी मेलों से जुड़े कुछ ठेकेदार समूह रोकते हैं और सभी वैध परमिट एवं आवश्यक दस्तावेज़ होने के बावजूद उनसे गैर-कानूनी शुल्क वसूला जाता है। अब्दुल्ला ने अपने पत्र में इसे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए गंभीर आर्थिक और व्यावहारिक समस्या बताया।

अब्दुल्ला ने लिखा कि ऐसी रुकावटों से ट्रांसपोर्टरों को अनावश्यक देरी, आर्थिक नुकसान और परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, रास्ते में लंबे समय तक रोके जाने से पशु कल्याण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

सरकारी जाँच में क्या सामने आया

जम्मू-कश्मीर सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग ने एक आंतरिक समिति के माध्यम से इस मामले की जाँच की। समिति ने पाया कि ट्रांसपोर्टरों को बिना किसी कानूनी अनुमति के रास्ते में प्रति वाहन भारी भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि जानवरों की आवाजाही जीएसटी से मुक्त है, इसलिए इस तरह के शुल्क पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। लगातार इस तरह की वसूली से पशु व्यापार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है, जिसका सीधा असर जम्मू-कश्मीर में मांस की कीमतों और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है।

आम जनता और व्यापारियों पर असर

कश्मीर में मटन व्यापारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण मांस की आपूर्ति ठप पड़ गई है। गौरतलब है कि पंजाब से पशुओं की आवाजाही कश्मीर के मांस बाज़ार की एक अहम कड़ी है। इस गैर-कानूनी वसूली के चलते परिवहन लागत बढ़ रही है, जो अंततः उपभोक्ताओं की थाली तक पहुँचती है।

अब्दुल्ला ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण, सहकारी और आर्थिक संबंध रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह की गैर-कानूनी हरकतें उस पारंपरिक सहयोग की भावना के विपरीत हैं और व्यापारी समुदाय में स्वाभाविक रूप से चिंता उत्पन्न कर रही हैं।

भविष्य की आशंका और माँगें

अब्दुल्ला ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मवेशी मेलों से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। संबंधित पक्षों ने आशंका जताई है कि यदि अभी उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो नए अनुबंध की अवधि में भी यही स्थिति बनी रह सकती है।

उन्होंने मान सरकार से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — पहली, मामले की जाँच कराई जाए; दूसरी, पंजाब से होकर पशु-परिवहन वाहनों की सुचारू, सुरक्षित और बाधामुक्त आवाजाही सुनिश्चित की जाए; और तीसरी, वैध दस्तावेज़ रखने वाले और सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन करने वाले ट्रांसपोर्टरों से किसी प्रकार की गैर-कानूनी वसूली या हस्तक्षेप न हो। पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है, और यह देखना होगा कि मान सरकार इस मामले में कितनी तेज़ी से कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पंजाब सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। असली सवाल यह है कि क्या यह वसूली केवल अनौपचारिक दबाव है या टेंडर प्रक्रिया में ही कोई संरचनात्मक खामी है जो इसे संभव बनाती है — और यदि दूसरा है, तो पत्र-व्यवहार पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पशु-वाहनों से अवैध वसूली का मामला क्या है?
पंजाब से होकर जम्मू-कश्मीर जाने वाले पशु-ढुलाई वाहनों को मवेशी मेलों से जुड़े ठेकेदार समूह रोककर गैर-कानूनी शुल्क वसूल रहे हैं। वैध परमिट और सभी जरूरी दस्तावेज़ होने के बावजूद ट्रांसपोर्टरों को प्रति वाहन भारी भुगतान के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उमर अब्दुल्ला ने भगवंत मान से क्या माँग की है?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब CM भगवंत मान से मामले की जाँच कराने, पशु-परिवहन वाहनों की बाधामुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने और वैध दस्तावेज़ रखने वाले ट्रांसपोर्टरों से किसी भी गैर-कानूनी वसूली पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
कश्मीर में मटन व्यापारी हड़ताल पर क्यों हैं?
ऑल कश्मीर होलसेल मटन डीलर्स यूनियन के सदस्य इस गैर-कानूनी वसूली के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पंजाब में वाहनों को रोककर की जाने वाली वसूली से परिवहन लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा असर कश्मीर में मांस की कीमतों पर पड़ रहा है।
जम्मू-कश्मीर सरकार की जाँच में क्या निकला?
खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की आंतरिक समिति ने पाया कि ट्रांसपोर्टरों से बिना किसी कानूनी अनुमति के प्रति वाहन भारी भुगतान लिया जा रहा है। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि जानवरों की आवाजाही जीएसटी-मुक्त है, इसलिए यह वसूली पूरी तरह अवैध है।
क्या आगे भी यह समस्या जारी रह सकती है?
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने पत्र में चेतावनी दी है कि मवेशी मेलों की आगामी टेंडर प्रक्रिया से पहले यदि उचित सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो नए अनुबंध की अवधि में भी यही स्थिति बनी रह सकती है। इससे पशु व्यापारियों को लंबे समय तक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले