कश्मीर मटन डीलर्स हड़ताल खत्म: उमर अब्दुल्ला बोले — 'व्यापारियों के साथ हो रही थी नाइंसाफी'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 4 जुलाई को कश्मीर मटन डीलर्स एसोसिएशन की करीब 10 से 12 दिन पुरानी हड़ताल समाप्त होने पर राहत जताई और कहा कि कश्मीरी व्यापारियों के साथ नाइंसाफी हो रही थी। यह विवाद पंजाब के चेक पॉइंट्स पर पशु वाहनों से अवैध वसूली को लेकर उपजा था, जिसने घाटी में मटन की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया था।
हड़ताल की पृष्ठभूमि
कश्मीरी पशु व्यापारियों का आरोप था कि पंजाब के शंभू बॉर्डर और माधवपुर जैसे चेक पॉइंट्स पर ठेकेदार ट्रांजिट में गुजरने वाले पशु वाहनों से जबरन अवैध 'कैटल फेयर लेवी' वसूल रहे थे। ये वाहन राजस्थान और दिल्ली से जम्मू-कश्मीर जा रहे थे। इस विवाद के चलते शादी के सीजन की शुरुआत में ही घाटी में मटन की भारी कमी हो गई।
मुख्यमंत्री का बयान
उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया, 'माल हमारा न पंजाब से आ रहा था और न ही पंजाब में बिक रहा था। राजस्थान से माल आ रहा था और हाईवे के जरिए यहां लाया जा रहा था। इसके बावजूद उस पर कई तरह के टैक्स लगाए जा रहे थे, जो हमारे लोगों के साथ गलत था। अब अगर मसला हल हो गया है तो यह अच्छी बात है। हम लगातार इसी सिलसिले में पंजाब सरकार के संपर्क में थे।'
समाधान की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से बात कर इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देश जारी किए कि ट्रांजिट में गुजरने वाले पशु वाहनों को किसी भी प्रकार से रोका या परेशान न किया जाए। इस लिखित आश्वासन के बाद 3 जुलाई को एसोसिएशन ने हड़ताल वापस ले ली।
भारत-पाक संवाद पर प्रतिक्रिया
मीडिया से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर भी अपनी राय रखी। भारत और पाकिस्तान के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को द्विपक्षीय वार्ता बहाल करने की अपील वाले पत्र पर उन्होंने कहा, 'फारूक अब्दुल्ला के हस्ताक्षर या मेरे बयान को लेकर इतनी खबरें क्यों बनाई जाती हैं? जब आरएसएस के नेता इसी तरह की बातें करते हैं, तब न एजेंसियां, न चैनल और न ही कोई दूसरा इसे प्रमुखता देता है।'
अमरनाथ यात्रा और स्थानीय अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का स्वागत किया जिसमें अमरनाथ यात्रियों से अपने यात्रा बजट का 10 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों पर खर्च करने को कहा गया था। उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छा सुझाव है। अगर श्रद्धालु ऐसा करेंगे तो हमारे स्थानीय लोगों को फायदा होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब घाटी की अर्थव्यवस्था को पर्यटन और तीर्थाटन से नई गति मिलने की उम्मीद है।