गंदरबल लैवेंडर महोत्सव में सीएम उमर अब्दुल्ला, सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित दुकानदारों के लिए पुनर्वास पैकेज का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 18 जून 2026 को गंदरबल जिले के नूनर क्षेत्र स्थित कृषि फार्म में आयोजित लैवेंडर महोत्सव का उद्घाटन किया और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के कारण अपनी दुकानें व व्यापारिक स्थल खो चुके दुकानदारों एवं व्यापारियों के लिए पुनर्वास पैकेज देने की घोषणा की। गंदरबल विधानसभा सीट से विधायक भी रहे उमर अब्दुल्ला ने किसानों और स्थानीय व्यापारियों को संबोधित करते हुए सिंचाई समस्याओं के शीघ्र समाधान का भी आश्वासन दिया।
महोत्सव का मुख्य विषय और उद्देश्य
इस वर्ष के लैवेंडर महोत्सव की थीम 'लैवेंडर वैश्विक स्तर पर' रखी गई, जिसका उद्देश्य सुगंधित फसलों के विस्तार और उनके आर्थिक प्रभाव को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन क्षेत्र में पुष्पकृषि, मूल्य संवर्धित कृषि और कृषि पर्यटन की असीमित संभावनाओं को उजागर करता है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि लैवेंडर की खेती युवाओं के लिए उद्यमिता और आय सृजन का एक लाभकारी माध्यम बन चुकी है।
पर्पल रिवोल्यूशन: जम्मू-कश्मीर की कृषि क्रांति
जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर की खेती को 'पर्पल रिवोल्यूशन' (बैंगनी क्रांति) के नाम से जाना जाता है। यह पहल वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद-भारतीय समेकित औषधि संस्थान (सीएसआईआर-आईआईआईएम) के अरोमा मिशन के तहत संचालित है और तेज़ी से एक प्रमुख कृषि-उद्यम पहल के रूप में उभरी है। डोडा, अनंतनाग और गंदरबल सहित कई क्षेत्रों में हज़ारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका में इसने उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियाँ — ठंडी और समशीतोष्ण गर्मियाँ, कड़ाके की सर्दियाँ और अच्छी जल निकासी वाली हल्की अम्लीय से तटस्थ मिट्टी — लैवेंडर उत्पादन के लिए आदर्श हैं।
आर्थिक संभावनाएँ और उत्पादन आँकड़े
एक कनाल भूमि (लगभग एक-आठवाँ एकड़) से सामान्यतः 80 से 90 किलोग्राम ताज़े लैवेंडर फूलों का उत्पादन होता है। सूखे फूलों की बाज़ार कीमत ₹800 से ₹1,000 प्रति किलोग्राम तक रहती है। इन फूलों से आसवन प्रक्रिया के ज़रिए उच्च गुणवत्ता वाला आवश्यक तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, अरोमा थेरेपी और औषधि उद्योग में व्यापक रूप से होता है।
पारंपरिक फसलों की तुलना में लैवेंडर को कम पानी की आवश्यकता होती है और यह जंगली जानवरों तथा बंदरों से होने वाले नुकसान के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी मानी जाती है — जो घाटी के किसानों के लिए एक बड़ी राहत है।
प्रभावित दुकानदारों को राहत
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश सरकार सड़क चौड़ीकरण परियोजना से विस्थापित हुए दुकानदारों के लिए पुनर्वास पैकेज तैयार कर रही है। यह घोषणा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बुनियादी ढाँचा विकास और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाना जम्मू-कश्मीर प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे की राह
लैवेंडर महोत्सव जैसे आयोजन क्षेत्र में कृषि पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माने जा रहे हैं। सिंचाई समस्याओं के समाधान और पुनर्वास पैकेज के क्रियान्वयन पर अब स्थानीय किसानों और व्यापारियों की नज़रें टिकी हैं।