8 अगस्त 2026
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नारनाग मंदिर फिर खुला: जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने सुरक्षा समीक्षा के बाद श्रद्धालुओं को दी अनुमति

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नारनाग मंदिर फिर खुला: जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने सुरक्षा समीक्षा के बाद श्रद्धालुओं को दी अनुमति

सारांश

पहलगाम त्रासदी के बाद बंद पड़े नारनाग मंदिर को जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने सुरक्षा समीक्षा के बाद फिर खोला। डॉ. फारूक अब्दुल्ला की पहल और स्थानीय लोगों की माँग के बाद यह निर्णय आया, जिससे गांदरबल की ठप पड़ी अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने 20 जून 2025 को सुरक्षा समीक्षा के बाद नारनाग मंदिर को श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए पुनः खोला।
पहलगाम त्रासदी के बाद मंदिर बंद रहने से गांदरबल जिले की आर्थिक गतिविधियाँ पूरी तरह ठप हो गई थीं।
फारूक अब्दुल्ला ने नारनाग दौरे के दौरान स्थानीय लोगों की माँग पर मंदिर खोलने का आश्वासन दिया था।
कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच 9,000 से अधिक तीर्थयात्री सालाना माता खीर भवानी मेले के लिए जम्मू से रवाना हुए।
JKRTC की लगभग 200 बसों के माध्यम से तीर्थयात्रियों को कश्मीर घाटी पहुँचाया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने 20 जून 2025 को गांदरबल जिले के ऐतिहासिक नारनाग मंदिर को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए पुनः खोलने की घोषणा की — और यह निर्णय सुरक्षा बलों द्वारा की गई व्यापक सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया। पहलगाम त्रासदी के बाद से बंद पड़े इस प्रमुख धार्मिक स्थल के फिर से खुलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मंदिर पुनः खुलने की पृष्ठभूमि

उपराज्यपाल के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी पोस्ट में कहा गया कि यह निर्णय स्थानीय निवासियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए 'बड़ी राहत' लेकर आया है। नारनाग मंदिर के लंबे समय तक बंद रहने से इलाके की आर्थिक गतिविधियाँ ठप पड़ गई थीं और स्थानीय समुदाय भारी कठिनाइयों का सामना कर रहा था।

फारूक अब्दुल्ला की पहल और सरकार का आश्वासन

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने इससे पहले नारनाग का दौरा किया था और स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत की थी। लोगों ने उन्हें बताया कि पहलगाम त्रासदी के बाद पर्यटन स्थल बंद होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ पूरी तरह ठप हो गई हैं। डॉ. फारूक ने आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार शेष बंद पड़े पर्यटन स्थलों को जल्द से जल्द खोलने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

नारनाग मंदिर के पुनः खुलने से स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, टैक्सी चालकों और पर्यटन से जुड़े अन्य लोगों में नई उम्मीद जगी है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से गांदरबल जिले में आर्थिक गतिविधियाँ फिर से गति पकड़ने की संभावना है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र मुख्यतः पर्यटन पर निर्भर है, इसलिए किसी भी बंदी का सीधा असर आजीविका पर पड़ता है।

माता खीर भवानी मेले के लिए 9,000 से अधिक तीर्थयात्री रवाना

इसी बीच, शनिवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच 9,000 से अधिक तीर्थयात्री जम्मू शहर से गांदरबल जिले में आयोजित सालाना माता खीर भवानी मेले के लिए रवाना हुए। इनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित शामिल थे। विधायक देवयानी राणा, डीआईजी श्रीधर पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने जम्मू में तीर्थयात्रियों को हरी झंडी दिखाई। जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की लगभग 200 बसों के माध्यम से तीर्थयात्रियों को सुरक्षित कश्मीर घाटी पहुँचाया जा रहा है।

आगे की राह

नारनाग मंदिर का खुलना जम्मू-कश्मीर प्रशासन की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत पहलगाम त्रासदी के बाद बंद पड़े पर्यटन और धार्मिक स्थलों को चरणबद्ध तरीके से सामान्य स्थिति में लाया जा रहा है। आने वाले हफ्तों में अन्य बंद स्थलों को भी खोले जाने की उम्मीद है, जो घाटी में पर्यटन पुनरुद्धार की दिशा में अहम कदम होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारनाग मंदिर क्यों बंद था और अब कब खुला?
नारनाग मंदिर पहलगाम त्रासदी के बाद सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल ने 20 जून 2025 को व्यापक सुरक्षा समीक्षा के बाद इसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए पुनः खोलने की अनुमति दी।
नारनाग मंदिर कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
नारनाग मंदिर जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ के स्थानीय लोग मुख्यतः पर्यटन पर निर्भर हैं।
डॉ. फारूक अब्दुल्ला की इस मामले में क्या भूमिका रही?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने नारनाग का दौरा कर स्थानीय निवासियों से बातचीत की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार बंद पर्यटन स्थलों को जल्द खोलने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है।
माता खीर भवानी मेले में कितने तीर्थयात्री शामिल हुए?
शनिवार को कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच 9,000 से अधिक तीर्थयात्री जम्मू शहर से गांदरबल जिले में आयोजित सालाना माता खीर भवानी मेले के लिए रवाना हुए, जिनमें अधिकांश कश्मीरी पंडित शामिल थे।
तीर्थयात्रियों को कश्मीर घाटी कैसे पहुँचाया जा रहा है?
जम्मू-कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (JKRTC) की लगभग 200 बसों के माध्यम से तीर्थयात्रियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर घाटी पहुँचाया जा रहा है। विधायक देवयानी राणा और डीआईजी श्रीधर पाटिल ने जम्मू में तीर्थयात्रियों को हरी झंडी दिखाई।
राष्ट्र प्रेस
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