18 सितंबर 2026
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हरमुख-गंगबल यात्रा 2026: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नारनाग से दी हरी झंडी, 14,500 फीट की कठिन तीर्थयात्रा शुरू

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हरमुख-गंगबल यात्रा 2026: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नारनाग से दी हरी झंडी, 14,500 फीट की कठिन तीर्थयात्रा शुरू

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 सितंबर को गांदरबल के नारनाग से वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दी। 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गंगबल झील तक 15 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा शुरू हुई, जिसे कश्मीरी पंडितों ने 2009 में पुनः आरंभ किया था।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 सितंबर 2026 को गांदरबल जिले के नारनाग से वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा का शुभारंभ किया।
पवित्र गंगबल झील समुद्र तल से लगभग 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है; एकतरफा ट्रेक 15 किलोमीटर का है।
यात्रा का आयोजन हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट करता है; कश्मीरी पंडितों ने यह तीर्थयात्रा 2009 में एक सदी से अधिक के अंतराल के बाद पुनः शुरू की थी।
प्रशासन ने मार्ग पर सुरक्षा , चिकित्सा सहायता , पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित की है।
कार्यक्रम में राजौरी-पुंछ सांसद मियां अल्ताफ अहमद और कंगन विधायक मियां मेहर अली भी उपस्थित रहे।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 सितंबर 2026 को गांदरबल जिले के नारनाग से वार्षिक हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर औपचारिक रूप से आरंभ किया। इसके साथ ही हरमुख पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित पवित्र गंगबल झील की तीर्थयात्रा शुरू हो गई और श्रद्धालु पहाड़ी मार्ग पर आगे बढ़ने लगे।

यात्रा का शुभारंभ और प्रमुख उपस्थिति

नारनाग में आयोजित इस कार्यक्रम में राजौरी-पुंछ के सांसद मियां अल्ताफ अहमद, कंगन के विधायक मियां मेहर अली और पुलिस तथा नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मंडल एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों ने यात्रा की तैयारियों का पूर्व में ही व्यापक जायजा ले लिया था।

प्रशासन ने गंगबल झील तक जाने वाले ऊँचे पहाड़ी मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता और पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की। स्थानीय सिविल प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों को लॉजिस्टिकल सहयोग के लिए तैनात किया गया है।

गंगबल झील का धार्मिक महत्व

कश्मीरी पंडित समुदाय गंगबल झील को भगवान शिव का पवित्र निवास स्थान मानता है और इसे गंगा नदी के समान पवित्र दर्जा देता है। तीर्थयात्री यहाँ पिंडदान, श्राद्ध और वैदिक यज्ञ जैसे अनुष्ठान सम्पन्न करते हैं तथा अपने पूर्वजों की अस्थियाँ झील में विसर्जित करते हैं।

यह यात्रा कश्मीरी पंडितों और अन्य श्रद्धालुओं की एक सालाना धार्मिक परंपरा है, जो हरमुख पर्वत श्रृंखला के ऊँचे इलाकों से होकर एकतरफा 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद समुद्र तल से लगभग 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित झील तक पहुँचती है।

पुनरुद्धार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि कश्मीरी पंडितों ने एक सदी से भी अधिक समय के अंतराल के बाद 2009 में इस तीर्थयात्रा को पुनः आरंभ किया था। यह यात्रा हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित की जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के पुनरुद्धार पर प्रशासन का विशेष ध्यान बना हुआ है।

2009 से अब तक यात्रा का क्रमिक विस्तार हुआ है और प्रत्येक वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की जाती रही है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के नारनाग से प्रस्थान के दृश्य देखे गए।

सुरक्षा व प्रशासनिक इंतजाम

प्रशासन ने उच्च ऊँचाई वाले दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। चिकित्सा दल रास्ते में तैनात किए गए हैं ताकि अधिक ऊँचाई पर होने वाली किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति का तत्काल समाधान हो सके। पीने के स्वच्छ जल और साफ-सफाई की व्यवस्था भी मार्ग पर सुनिश्चित की गई है।

आने वाले दिनों में यात्रा के मुख्य अनुष्ठानों के सम्पन्न होने के साथ श्रद्धालुओं के सकुशल वापस लौटने की उम्मीद है, जो इस वार्षिक परंपरा की सफल निरंतरता को दर्शाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कश्मीरी पंडित समुदाय की सांस्कृतिक वापसी का प्रतीक भी है — एक ऐसी परंपरा जो दशकों के विस्थापन के बाद 2009 में पुनर्जीवित हुई। प्रशासनिक स्तर पर उपराज्यपाल की व्यक्तिगत उपस्थिति इस यात्रा को नीतिगत महत्व देती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये प्रतीकात्मक पहलें कश्मीरी पंडितों की व्यापक वापसी और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम बन पा रही हैं। एकतरफा 15 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा और 14,500 फीट की ऊँचाई यह भी रेखांकित करती है कि इस तीर्थयात्रा को टिकाऊ बनाने के लिए बुनियादी ढाँचे में निरंतर निवेश अनिवार्य है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरमुख-गंगबल यात्रा क्या है?
हरमुख-गंगबल यात्रा कश्मीरी पंडितों और अन्य श्रद्धालुओं की एक वार्षिक धार्मिक तीर्थयात्रा है, जो गांदरबल जिले के नारनाग से शुरू होकर हरमुख पर्वत श्रृंखला में समुद्र तल से लगभग 14,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित पवित्र गंगबल झील तक जाती है। एकतरफा पैदल मार्ग लगभग 15 किलोमीटर का है।
गंगबल झील का धार्मिक महत्व क्या है?
कश्मीरी पंडित गंगबल झील को भगवान शिव का पवित्र निवास मानते हैं और इसे गंगा नदी के समान पवित्र दर्जा देते हैं। तीर्थयात्री यहाँ पिंडदान, श्राद्ध और वैदिक यज्ञ जैसे अनुष्ठान करते हैं तथा पूर्वजों की अस्थियाँ झील में विसर्जित करते हैं।
इस यात्रा को दोबारा कब शुरू किया गया था?
कश्मीरी पंडितों ने एक सदी से भी अधिक समय के अंतराल के बाद 2009 में इस तीर्थयात्रा को पुनः आरंभ किया था। इसका आयोजन हरमुख गंगा गंगबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
2026 की यात्रा में प्रशासन ने क्या सुविधाएँ मुहैया कराई हैं?
इस वर्ष सिविल प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बलों ने पहाड़ी मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की है। मंडल एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने यात्रा से पहले ही तैयारियों का जायजा लिया था।
2026 की यात्रा का शुभारंभ किसने और कहाँ से किया?
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 18 सितंबर 2026 को गांदरबल जिले के नारनाग से हरमुख-गंगबल यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर राजौरी-पुंछ सांसद मियां अल्ताफ अहमद और कंगन विधायक मियां मेहर अली सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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