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डोडा में लैवेंडर खेती से 5,000 से अधिक किसानों को मिली सफलता, भदेरवाह में चौथा महोत्सव संपन्न

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डोडा में लैवेंडर खेती से 5,000 से अधिक किसानों को मिली सफलता, भदेरवाह में चौथा महोत्सव संपन्न

सारांश

डोडा के भदेरवाह में 'लैवेंडर गोज ग्लोबल' थीम पर चौथा मेगा लैवेंडर महोत्सव संपन्न हुआ। दस साल पहले मुट्ठी भर किसानों से शुरू हुई यह यात्रा आज 5,000 से अधिक किसानों तक पहुँच गई है — बैंगनी क्रांति अब वैश्विक बाज़ार की दस्तक दे रही है।

मुख्य बातें

चौथा मेगा लैवेंडर महोत्सव 2026 8 जून को सरकारी डिग्री कॉलेज, भदेरवाह, डोडा में संपन्न हुआ।
5,000 से अधिक किसान और उद्यमी अब लैवेंडर खेती से जुड़ चुके हैं, जो दस साल पहले कुछ किसानों से शुरू हुई थी।
थर्ड पार्टी विश्लेषण के अनुसार भदेरवाह क्षेत्र में अब तक 4 किलो लैवेंडर तेल का उत्पादन हो चुका है।
अरोमा मिशन के तीन चरण पूरे; किसानों को आसवन सुविधा और गुणवत्ता नियंत्रण में सहायता दी गई।
लैवेंडर खेती के लिए जून सर्वोत्तम समय; अक्टूबर अनुकूल नहीं — डॉ.
जबीर अहमद, सीएसआईआर-आईआईएम ।
अगला लक्ष्य बाज़ार व उद्योग संबंध मज़बूत करना और किसानों को विपणन रणनीतियों पर प्रशिक्षण देना।

डोडा जिले के भदेरवाह में आयोजित चौथे मेगा लैवेंडर महोत्सव 2026 के समापन पर सीएसआईआर-आईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि अरोमा मिशन और बैंगनी क्रांति के माध्यम से अब तक 5,000 से अधिक किसानों और उद्यमियों को लैवेंडर खेती से जोड़ा जा चुका है। 8 जून 2026 को सरकारी डिग्री कॉलेज, भदेरवाह में संपन्न हुए इस दो दिवसीय महोत्सव की थीम 'लैवेंडर गोज ग्लोबल' रही।

महोत्सव में क्या हुआ

समापन दिवस पर सीएसआईआर-आईआईएम जम्मू के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। महोत्सव में किसान, छात्र, वैज्ञानिक, औद्योगिक भागीदार, खरीदार, विक्रेता और सुगंधित पौधों से जुड़े अन्य हितधारकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन लैवेंडर क्षेत्र के सभी पक्षों को एक मंच पर लाने का प्रयास था।

दस साल में बदली तस्वीर

डॉ. जबीर अहमद ने बताया, "लगभग दस साल पहले इस क्षेत्र में लैवेंडर की खेती बहुत छोटे पैमाने पर शुरू हुई थी, जिसमें केवल कुछ ही किसान शामिल थे। उस समय, कई किसान इसे जोखिम भरा काम मानते थे।" उन्होंने कहा कि आज स्थिति में काफी बदलाव आया है और 5,000 से अधिक किसान लैवेंडर की खेती में शामिल हो गए हैं, जो इस फसल और इसकी आर्थिक क्षमता में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। गौरतलब है कि यह वही क्षेत्र है जहाँ कभी परंपरागत खेती ही एकमात्र विकल्प मानी जाती थी।

अरोमा मिशन और तेल उत्पादन

डॉ. अहमद के अनुसार अब तक अरोमा मिशन के तीन चरण पूरे किए जा चुके हैं। थर्ड पार्टी विश्लेषण की रिपोर्ट के अनुसार, भदेरवाह क्षेत्र में अब तक 4 किलो लैवेंडर तेल का उत्पादन हो चुका है। किसानों को आसवन सुविधाओं और गुणवत्ता नियंत्रण उपायों में सहायता प्रदान की गई है ताकि उच्च गुणवत्ता वाला उत्पादन सुनिश्चित हो सके।

आगे की राह और प्रशिक्षण

डॉ. अहमद ने बताया कि अगला महत्वपूर्ण कदम बाज़ार और उद्योग संबंधों को मज़बूत करना है। किसानों को उचित आसवन तकनीकों, मूल्यवर्धन, उत्पाद विकास और विपणन रणनीतियों पर प्रशिक्षण की आवश्यकता है, और इन सभी पहलुओं के लिए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लैवेंडर की खेती के लिए जून सबसे उपयुक्त समय है, जबकि अक्टूबर इस खेती के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। यह जानकारी उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पहली बार इस फसल की ओर रुख कर रहे हैं।

किसानों पर असर और भविष्य

बैंगनी क्रांति के रूप में उभरी यह पहल डोडा जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक बदलाव का प्रतीक बन रही है। लैवेंडर की खेती की सफलता को देखते हुए हर वर्ष इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जो किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों के बीच सेतु का काम करता है। आने वाले वर्षों में वैश्विक बाज़ार तक पहुँच बनाना इस मिशन का प्रमुख लक्ष्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी अभी बाकी है। थर्ड पार्टी रिपोर्ट में दर्ज 4 किलो तेल उत्पादन का आँकड़ा 5,000 किसानों की संख्या के सापेक्ष बेहद सीमित है — यह अंतर बताता है कि खेती का विस्तार हुआ है, पर व्यावसायिक पैमाना अभी नहीं आया। वैश्विक बाज़ार तक पहुँचने के लिए जिस आसवन क्षमता, गुणवत्ता मानक और विपणन ढाँचे की ज़रूरत है, वह अभी निर्माण के चरण में है। 'लैवेंडर गोज ग्लोबल' की थीम तभी सार्थक होगी जब किसानों की आय के ठोस आँकड़े सामने आएँ।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोडा में लैवेंडर महोत्सव 2026 कहाँ और कब हुआ?
चौथा मेगा लैवेंडर महोत्सव 2026 डोडा जिले के सरकारी डिग्री कॉलेज, भदेरवाह में 8 जून 2026 को संपन्न हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन 'लैवेंडर गोज ग्लोबल' थीम पर केंद्रित था।
डोडा में कितने किसान लैवेंडर खेती से जुड़े हैं?
सीएसआईआर-आईआईएम जम्मू के निदेशक डॉ. जबीर अहमद के अनुसार अब तक 5,000 से अधिक किसान और उद्यमी लैवेंडर खेती से जुड़ चुके हैं। यह संख्या दस साल पहले की तुलना में बहुत अधिक है, जब केवल कुछ किसान ही इस खेती में शामिल थे।
अरोमा मिशन क्या है और इसने किसानों की कैसे मदद की?
अरोमा मिशन सीएसआईआर की एक पहल है जो किसानों को सुगंधित पौधों की खेती, आसवन तकनीक और बाज़ार से जोड़ने में सहायता करती है। भदेरवाह क्षेत्र में इसके तीन चरण पूरे हो चुके हैं और किसानों को आसवन सुविधाओं तथा गुणवत्ता नियंत्रण उपायों में सहायता दी गई है।
लैवेंडर की खेती के लिए सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?
डॉ. जबीर अहमद के अनुसार लैवेंडर की खेती के लिए जून सबसे उपयुक्त समय है। अक्टूबर इस खेती के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
भदेरवाह में लैवेंडर तेल का अब तक कितना उत्पादन हुआ है?
थर्ड पार्टी विश्लेषण की रिपोर्ट के अनुसार भदेरवाह क्षेत्र में अब तक 4 किलो लैवेंडर तेल का उत्पादन हुआ है। सीएसआईआर-आईआईएम किसानों को उत्पादन गुणवत्ता और आसवन तकनीक में निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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