गौतमबुद्धनगर: म्यूल बैंक खाता देने वाला 22 वर्षीय युवक गिरफ्तार, ₹2.15 लाख का संदिग्ध लेन-देन उजागर
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने 15 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रय्यान अंसारी (पुत्र सिंकदर अंसारी), निवासी जगतपुरी, कृष्णा नगर, ईस्ट दिल्ली, उम्र करीब 22 वर्ष, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर अपराधियों को पैसे लेकर अपना बैंक खाता उपलब्ध कराता था, ताकि ठगी की रकम उसमें ट्रांसफर की जा सके।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुँच बनाई। थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर की टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया और उसके कब्जे से साइबर अपराध में इस्तेमाल किया जाने वाला एक मोबाइल फोन भी बरामद किया।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि वह टेलीग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिये साइबर अपराधियों के संपर्क में आया था। इसके बाद उसने उन्हें अपना बैंक खाता, पासबुक, चेकबुक और सिम कार्ड उपलब्ध कराया, जिनका उपयोग ऑनलाइन निवेश के नाम पर की गई ठगी की रकम के लेन-देन में किया गया।
संदिग्ध वित्तीय लेन-देन
जाँच में सामने आया कि आरोपी के बैंक खाते में करीब ₹2,15,743 का संदिग्ध लेन-देन हुआ। खाता उपलब्ध कराने के बदले आरोपी को ₹50,000 का भुगतान किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब म्यूल अकाउंट नेटवर्क देशभर में साइबर ठगों के लिए वित्तीय पाइपलाइन बनते जा रहे हैं।
एनसीआरपी पर दो राज्यों से शिकायतें
पुलिस की जाँच में यह भी उजागर हुआ कि संबंधित बैंक खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दो शिकायतें दर्ज हैं — एक उत्तर प्रदेश से और दूसरी आंध्र प्रदेश से। गौरतलब है कि म्यूल खातों से जुड़े मामले अक्सर बहु-राज्यीय नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं, जिनकी जड़ें एक से अधिक राज्यों में फैली होती हैं।
आरोपी पर लगाई गई धाराएँ
आरोपी रय्यान अंसारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में पंजीकृत है।
आगे की जाँच
पुलिस अब संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालने और नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, जाँच का दायरा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतें एक व्यापक साइबर ठगी नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं।