साइबर ठगी मामले में गुरुग्राम से गिरफ्तार मोहम्मद समीर, नोएडा पुलिस की कार्रवाई; 33 राज्यों में शिकायतें दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने 16 अक्टूबर 2026 को गुरुग्राम से मोहम्मद समीर (उम्र लगभग 21 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि समीर ने साइबर अपराधियों को धोखाधड़ी के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया, जिसके जरिए 20 अगस्त 2025 से 18 नवंबर 2025 के बीच पीड़ित से साइबर ठगी की गई। पुलिस के अनुसार, इस बैंक खाते के खिलाफ देशभर के विभिन्न राज्यों में कुल 33 शिकायतें दर्ज हैं।
मामले का घटनाक्रम
शिकायतकर्ता ने थाना साइबर क्राइम में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें बताया गया कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से लिंक भेजकर उसे ऑनलाइन स्टोर चलाने और मुनाफा कमाने का लालच दिया। इस प्रकार पीड़ित को अपने जाल में फँसाकर करीब तीन महीने तक साइबर ठगी की गई।
शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू की गई। पुलिस ने जाँच में पाया कि गिरफ्तार आरोपी साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए अपना खाता उपलब्ध करा रहा था।
आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि
आरोपी की पहचान मोहम्मद समीर, पुत्र मोहम्मद नवाब, निवासी मोहल्ला नत्था सिंह, जसपुर पट्टी, थाना कोतवाली नगर, जिला ऊधमसिंह नगर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया है। इस मामले में यह चौथी गिरफ्तारी है — इससे पहले तीन अन्य आरोपियों को पकड़ा जा चुका है।
देशभर में 33 शिकायतें — राज्यवार ब्यौरा
पुलिस के अनुसार, आरोपी के बैंक खाते के खिलाफ दर्ज 33 शिकायतों में महाराष्ट्र और केरल से पाँच-पाँच, तेलंगाना और कर्नाटक से पाँच-पाँच, तमिलनाडु से तीन तथा आंध्र प्रदेश से दो शिकायतें शामिल हैं। इसके अलावा बिहार, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और गुरुग्राम से एक-एक शिकायत दर्ज है।
यह तथ्य दर्शाता है कि यह महज स्थानीय घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक और सुनियोजित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है जो एकाधिक राज्यों में सक्रिय है।
पुलिस की आगे की जाँच
गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है। जाँचकर्ताओं का मानना है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।