26 जून 2026
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गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने दिल्ली से किराये के बैंक खाते से ठगी करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार

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गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने दिल्ली से किराये के बैंक खाते से ठगी करने वाले आरोपी को किया गिरफ्तार

सारांश

बैंक मैनेजर बनकर केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी — और उसे अंजाम देने के लिए किराये का बैंक खाता। गौतमबुद्धनगर साइबर पुलिस ने दिल्ली से ऐसे ही एक 'खाता आपूर्तिकर्ता' को पकड़ा, जिसके खाते में ₹9 लाख की ठगी की रकम पहुँची और उसे मिले सिर्फ ₹45,000।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर साइबर क्राइम पुलिस ने 25 जून 2026 को आरोपी विनय कुमार (24) , निवासी बुराड़ी, नॉर्थ दिल्ली को गिरफ्तार किया।
आरोपी साइबर ठगों को अपना बैंक खाता किराये पर देता था, जिसमें ठगी की रकम ट्रांसफर होती थी।
आरोपी के बैंक खाते में इस मामले से जुड़े करीब ₹9 लाख ट्रांसफर हुए; उसे ₹45,000 कमीशन मिला।
साइबर अपराधी खुद को बैंक मैनेजर बताकर केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों की गोपनीय जानकारी हासिल करते थे।
मामला थाना बिसरख में दर्ज; पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

गौतमबुद्धनगर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 25 जून 2026 को एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया, जो साइबर ठगों को अपना बैंक खाता किराये पर उपलब्ध कराता था — जिसके ज़रिये बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी गई रकम का लेन-देन होता था। आरोपी को दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सूचना के आधार पर पकड़ा गया।

आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि

गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनय कुमार (24 वर्ष), पुत्र सुरेन्द्र कुमार, निवासी बुराड़ी, नॉर्थ दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की शैक्षिक योग्यता नौवीं कक्षा तक है। इस मामले में थाना बिसरख में मुकदमा दर्ज किया गया है।

ठगी का तरीका: केवाईसी के नाम पर जाल

जाँच में सामने आया कि साइबर अपराधी खुद को बैंक का मैनेजर बताकर लोगों को फोन करते थे और बैंक खाते की केवाईसी अपडेट कराने के बहाने उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे। इस ठगी को सफल बनाने के लिए अपराधियों को ऐसे बैंक खातों की आवश्यकता होती थी जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जा सके।

गिरफ्तार आरोपी विनय कुमार यही भूमिका निभाता था — वह अपना बैंक खाता इन साइबर ठगों को किराये पर देता था। पुलिस जाँच के अनुसार, आरोपी के बैंक खाते में इस मामले से संबंधित करीब ₹9 लाख ट्रांसफर किए गए थे, जिसके बदले उसे साइबर अपराधियों से ₹45,000 कमीशन के रूप में प्राप्त हुए।

नेटवर्क की जाँच जारी

पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसके संपर्क में और कौन-कौन से लोग थे तथा इस साइबर ठगी के नेटवर्क में कितने सदस्य शामिल हैं। गौरतलब है कि किराये के बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध में एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति है, जिसमें आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्तियों को मामूली कमीशन का लालच देकर उनके खाते ठगी के लेन-देन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

पुलिस की नागरिकों से अपील

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले किसी भी फोन कॉल या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता नंबर या अन्य गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें। यदि इस तरह का कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचित करें।

इस गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की भी धरपकड़ की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि आर्थिक रूप से कमज़ोर 'खाता किराएदार' कानून की ज़द में आ जाते हैं। विनय कुमार की गिरफ्तारी इस पैटर्न की एक और कड़ी है, जहाँ ₹9 लाख की ठगी के बदले उसे मात्र ₹45,000 मिले। असली सवाल यह है कि पुलिस इस नेटवर्क के सरगनाओं तक कब पहुँचेगी — जो अक्सर राज्य की सीमाओं के पार बैठे होते हैं और पकड़ से बचे रहते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतमबुद्धनगर में साइबर ठगी का यह मामला क्या है?
यह मामला बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर की जाने वाली साइबर ठगी से जुड़ा है, जिसमें अपराधी खुद को बैंक मैनेजर बताकर लोगों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे। ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए वे किराये के बैंक खातों का उपयोग करते थे।
गिरफ्तार आरोपी विनय कुमार की क्या भूमिका थी?
विनय कुमार अपना बैंक खाता साइबर ठगों को किराये पर देता था, जिसमें ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। उसके खाते में इस मामले से जुड़े करीब ₹9 लाख आए और उसे ₹45,000 कमीशन मिला।
केवाईसी फ्रॉड कॉल से खुद को कैसे बचाएँ?
बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर आने वाले किसी भी अनजान फोन कॉल या संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता नंबर या ओटीपी किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध कॉल आने पर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत सूचित करें।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस आरोपी विनय कुमार से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। थाना बिसरख में मुकदमा दर्ज हो चुका है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
किराये के बैंक खाते साइबर अपराध में कैसे इस्तेमाल होते हैं?
साइबर अपराधी आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्तियों को मामूली कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे असली अपराधी की पहचान छुपी रहती है और 'खाता आपूर्तिकर्ता' कानूनी शिकंजे में आ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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