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ऑपरेशन अपराजेय: गौतमबुद्धनगर पुलिस ने स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की

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ऑपरेशन अपराजेय: गौतमबुद्धनगर पुलिस ने स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की

सारांश

गौतमबुद्धनगर पुलिस ने 'ऑपरेशन अपराजेय' के ज़रिये स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक अनूठी पहल की है — केयर टेकर सत्यापन, मिशन शक्ति केंद्रों से पहचान और विशेष डेटाबेस के साथ यह मॉडल भविष्य में पूरे उत्तर प्रदेश के लिए नज़ीर बन सकता है।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने 12 जून 2025 को ऑपरेशन अपराजेय के तहत स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इसे प्रशासनिक दायित्व के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी बताया।
मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से स्पेशल नीड बच्चों के परिवारों की पहचान और नियमित संपर्क व्यवस्था विकसित की जाएगी।
केयर टेकर के व्यवहार, मानसिक स्थिति और जिम्मेदारी का आकलन कर एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने पुलिसकर्मियों को मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
यह पहल भविष्य में अन्य जिलों के लिए मॉडल के रूप में विकसित की जा सकती है।

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने 12 जून 2025 को ऑपरेशन अपराजेय के अंतर्गत स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। सेक्टर-108 स्थित पुलिस आयुक्त कार्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को दिव्यांग एवं संवेदनशील बच्चों के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनाने पर केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया।

पुलिस कमिश्नर का संदेश

कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि स्पेशल नीड बच्चों की सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशीलता, सेवा भावना और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अपराजेय का मूल उद्देश्य स्पेशल नीड बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक सुदृढ़ एवं निरंतर सहयोग प्रणाली विकसित करना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समयबद्ध और प्रभावी सहायता सुनिश्चित की जा सके।

केयर टेकर सत्यापन और डेटाबेस निर्माण

पुलिस कमिश्नर ने यह भी रेखांकित किया कि कई परिवारों में माता-पिता के कार्यरत होने के कारण बच्चों की देखभाल के लिए केयर टेकर रखे जाते हैं, किंतु कुछ मामलों में इन केयर टेकर द्वारा लापरवाही या अनुचित व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए पुलिस की सक्रिय और सहयोगात्मक भूमिका को अनिवार्य बताया गया। कार्यशाला में निर्णय लिया गया कि केयर टेकर के सत्यापन के दौरान उनके व्यवहार, मानसिक स्थिति और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता का भी मूल्यांकन किया जाएगा, और इस हेतु एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

मिशन शक्ति केंद्रों की भूमिका

कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से उन परिवारों की पहचान की जाएगी जहाँ स्पेशल नीड बच्चे निवास करते हैं। उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए नियमित संपर्क व्यवस्था स्थापित की जाएगी। संबंधित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा ताकि वे इन बच्चों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समझकर उचित सहायता कर सकें।

विशेषज्ञों का योगदान

एमिटी यूनिवर्सिटी की प्रो. (डॉ.) जयंती पुजारी, डॉ. अनुसूया के. यादव और डॉ. रामशंकर सक्सेना सहित अन्य विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयगत सत्रों के माध्यम से पुलिस अधिकारियों को स्पेशल नीड बच्चों की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक एवं व्यवहारिक आवश्यकताओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र और पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा) सुनीति भी उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यशाला को संबोधित किया। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि यह पहल फिलहाल गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट से शुरू की गई है, और भविष्य में इसे अन्य जिलों एवं पुलिस इकाइयों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यह पहल संवेदनशील पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाले समय में राज्य स्तर पर अनुकरणीय बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके नियमित क्रियान्वयन और जवाबदेही तंत्र में होगी। यह पहल तभी मॉडल बन सकती है जब इसके परिणामों को मापने योग्य संकेतकों से जोड़ा जाए — अन्यथा यह एक और सुविचारित कार्यशाला बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन अपराजेय क्या है?
ऑपरेशन अपराजेय गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य स्पेशल नीड बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक सुदृढ़ सहयोग एवं सुरक्षा प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता और विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस कार्यशाला में क्या निर्णय लिए गए?
कार्यशाला में तय किया गया कि मिशन शक्ति केंद्रों के ज़रिये स्पेशल नीड बच्चों के परिवारों की पहचान होगी, केयर टेकर का व्यवहार और मानसिक स्थिति का आकलन किया जाएगा, और एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार होगा। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
इस पहल में मिशन शक्ति केंद्रों की क्या भूमिका होगी?
मिशन शक्ति केंद्रों के माध्यम से उन परिवारों की पहचान की जाएगी जहाँ स्पेशल नीड बच्चे रहते हैं। इन परिवारों के साथ नियमित संपर्क व्यवस्था स्थापित की जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में समयबद्ध सहायता मिल सके।
क्या यह पहल केवल नोएडा तक सीमित रहेगी?
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, फिलहाल यह पहल गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट से शुरू की गई है। भविष्य में इसे अन्य जिलों और पुलिस इकाइयों के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कार्यशाला में कौन-से विशेषज्ञ शामिल हुए?
एमिटी यूनिवर्सिटी की प्रो. (डॉ.) जयंती पुजारी, डॉ. अनुसूया के. यादव और डॉ. रामशंकर सक्सेना सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उन्होंने स्पेशल नीड बच्चों की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यवहारिक आवश्यकताओं पर विभिन्न सत्रों में प्रशिक्षण दिया।
राष्ट्र प्रेस
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