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ऑपरेशन अपराजेय: नोएडा पुलिस ने 1,645 दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए शुरू की ऐतिहासिक पहल

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ऑपरेशन अपराजेय: नोएडा पुलिस ने 1,645 दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए शुरू की ऐतिहासिक पहल

सारांश

नोएडा पुलिस का 'ऑपरेशन अपराजेय' महज एक अभियान नहीं — यह 1,645 दिव्यांग बच्चों के लिए एक संरचित सुरक्षा ढाँचा है। महिला बीट अधिकारी, मिशन शक्ति केंद्र, केयरटेकर सत्यापन और विशेषज्ञ प्रशिक्षण — यह मॉडल उत्तर प्रदेश में बाल सुरक्षा की नई मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने 9 जून 2026 को 'ऑपरेशन अपराजेय' लॉन्च किया।
अभियान के पहले चरण में 1,645 दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को चिन्हित किया गया।
महिला बीट अधिकारी हर 15 दिन में बच्चों और उनके अभिभावकों से संपर्क कर स्थिति की जानकारी लेंगी।
केयरटेकरों का रिकॉर्ड तैयार होगा और नियमित चरित्र सत्यापन कराया जाएगा।
मैक्स हॉस्पिटल और एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ पुलिसकर्मियों को सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण देंगे।
दिव्यांग बच्चों के लिए समर्पित हेल्पलाइन नंबर 8595902539 जारी किया गया है।

गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने 9 जून 2026 को 'ऑपरेशन अपराजेय' की शुरुआत की — एक विशेष अभियान जो कमिश्नरेट क्षेत्र के 1,645 दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन और अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में संचालित यह अभियान उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की पहली संरचित पुलिस पहल मानी जा रही है।

अभियान की मुख्य संरचना

अभियान के पहले चरण में कमिश्नरेट क्षेत्र के 1,645 स्पेशल नीड बच्चों को चिन्हित किया गया है। इन बच्चों की निगरानी और सहायता की जिम्मेदारी महिला बीट अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जो हर 15 दिन में बच्चों, उनके अभिभावकों और केयरटेकरों से संपर्क कर उनकी स्थिति का आकलन करेंगी। प्रत्येक थाना क्षेत्र में स्थापित मिशन शक्ति केंद्र के माध्यम से इन बच्चों और उनके परिजनों का रिकॉर्ड पूर्ण गोपनीयता के साथ तैयार किया जाएगा।

स्वास्थ्य सहायता और आपातकालीन सेवाएँ

जरूरत पड़ने पर बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और विशेषज्ञ अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। बच्चों और उनके परिजनों को डायल-112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों की सहायता, शिकायत एवं परामर्श के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 8595902539 जारी किया गया है।

केयरटेकर सत्यापन और नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान

नोएडा पुलिस बच्चों की देखभाल करने वाले केयरटेकरों का रिकॉर्ड भी तैयार करेगी और उनका नियमित चरित्र सत्यापन कराया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ी संभावित घटनाओं पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। पुलिस जल्द ही 'नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान' भी लागू करेगी, जिसके तहत आसपास के लोगों और विभिन्न विभागों के सहयोग से सुरक्षा तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

विशेषज्ञ प्रशिक्षण और साइबर जागरूकता

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, अभियान को प्रभावी बनाने के लिए महिला बीट अधिकारियों सहित सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। मैक्स हॉस्पिटल और एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ सॉफ्ट स्किल और व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, ताकि पुलिसकर्मी विशेष बच्चों की भावनाओं और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें। इसी के साथ, पुलिस कमिश्नरेट ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साइबर ठगी के नए तरीकों के प्रति जनजागरण के लिए एक अलग साइबर जागरूकता अभियान भी आरंभ किया है, जिसे सोशल मीडिया, बैनर, पोस्टर और वीडियो के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

आगे की राह

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 'ऑपरेशन अपराजेय' दिव्यांग बच्चों के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगा। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब देशभर में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर नीतिगत चर्चाएँ तेज हो रही हैं। नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान के लागू होने के बाद यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी अनुकरणीय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हर 15 दिन की निगरानी, केयरटेकर सत्यापन और विशेषज्ञ प्रशिक्षण का ठोस ढाँचा। हालाँकि, 1,645 बच्चों के लिए पर्याप्त महिला बीट अधिकारियों की उपलब्धता और मिशन शक्ति केंद्रों की वास्तविक क्षमता पर सवाल बनते हैं। गोपनीयता की प्रतिबद्धता सराहनीय है, लेकिन डेटा सुरक्षा के लिए कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल अभी सामने नहीं आया। यदि यह मॉडल जमीन पर उतरता है, तो यह उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक अनुकरणीय खाका बन सकता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन अपराजेय' क्या है?
'ऑपरेशन अपराजेय' गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा 9 जून 2026 को शुरू किया गया एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा करना है। इसके पहले चरण में 1,645 ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया है।
इस अभियान से दिव्यांग बच्चों को क्या फायदा होगा?
महिला बीट अधिकारी हर 15 दिन में बच्चों और उनके परिजनों से संपर्क करेंगी और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता दिलाएंगी। इसके अलावा, समर्पित हेल्पलाइन नंबर 8595902539 पर शिकायत और परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
केयरटेकरों का सत्यापन क्यों जरूरी माना गया है?
दिव्यांग बच्चे अपनी देखभाल के लिए केयरटेकरों पर निर्भर होते हैं, इसलिए उनके दुर्व्यवहार या शोषण का जोखिम अधिक होता है। नोएडा पुलिस केयरटेकरों का रिकॉर्ड तैयार कर नियमित चरित्र सत्यापन कराएगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित हो सके।
पुलिसकर्मियों को किस तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा?
मैक्स हॉस्पिटल और एमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ महिला बीट अधिकारियों सहित सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को सॉफ्ट स्किल और व्यवहारिक प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य यह है कि पुलिसकर्मी विशेष बच्चों की भावनाओं और जरूरतों को संवेदनशीलता से समझ सकें।
'नेबरहुड सिक्योरिटी प्लान' क्या होगा?
यह एक आगामी योजना है जिसके तहत बच्चों के आसपास के लोगों और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से सामुदायिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा। यह 'ऑपरेशन अपराजेय' का विस्तार होगा और इसे जल्द लागू किए जाने की बात कही गई है।
राष्ट्र प्रेस
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