गौतमबुद्धनगर पुलिस की बड़ी कामयाबी: 19 महीनों में 95.23% लापता बच्चे बरामद, 3,348 गुमशुदगी मामलों में 88.47% सफलता
सारांश
मुख्य बातें
कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस ने 1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच 19 महीनों में गुमशुदा और अपहृत बच्चों तथा लापता स्त्री-पुरुषों की बरामदगी में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पुलिस के आँकड़ों के अनुसार इस अवधि में दर्ज 650 बाल-गुमशुदगी मामलों में से 619 बच्चों को सकुशल बरामद किया गया, जो 95.23 प्रतिशत की दर है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में चलाए गए इस व्यापक अभियान ने तीनों जोन में परिणाम दिए हैं।
मुख्य आँकड़े और उपलब्धियाँ
पुलिस के आँकड़ों के अनुसार इस अवधि में कुल 3,348 स्त्री-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें से 2,962 लोगों को सकुशल बरामद किया गया — बरामदगी दर 88.47 प्रतिशत रही। बच्चों के मामले में 650 अभियोग दर्ज हुए और 619 बच्चे सुरक्षित परिवारों से मिलाए गए। यह आँकड़े तीन जोन — नोएडा, सेंट्रल नोएडा और ग्रेटर नोएडा — के सम्मिलित प्रयासों का परिणाम हैं।
तीनों जोन का जोन-वार प्रदर्शन
नोएडा जोन के नौ थाना क्षेत्रों में 965 स्त्री-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 540 महिलाओं और 270 पुरुषों सहित 810 लोगों को बरामद किया गया — बरामदगी दर 83.93 प्रतिशत। इस जोन में बच्चों के 249 मामलों में से 236 बच्चों को सकुशल बरामद किया गया; 13 बच्चों की तलाश अभी जारी है।
सेंट्रल नोएडा जोन के आठ थाना क्षेत्रों में 1,702 स्त्री-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें से 1,555 लोगों को बरामद किया गया — बरामदगी दर 91.36 प्रतिशत। बच्चों के 258 मामलों में 252 बच्चों की बरामदगी हुई और यहाँ बरामदगी दर 97.67 प्रतिशत रही, जो तीनों जोन में सर्वाधिक है।
ग्रेटर नोएडा जोन के नौ थाना क्षेत्रों में 681 स्त्री-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 405 महिलाओं और 192 पुरुषों सहित 597 लोगों को बरामद किया गया। 143 बाल-गुमशुदगी मामलों में 131 बच्चों को सकुशल परिवारों से मिलाया गया; 12 बच्चों की तलाश अभी शेष है।
तकनीक और खुफिया तंत्र का उपयोग
पुलिस के अनुसार गुमशुदा लोगों की तलाश में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों, सोशल मीडिया और मुखबिर तंत्र का समन्वित उपयोग किया गया। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, सार्वजनिक स्थानों और आश्रय गृहों पर भी खोजबीन की गई। वात्सल्य पोर्टल को भी तलाश प्रक्रिया में शामिल किया गया।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बच्चों और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के मामलों में तलाश विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होती है। पुलिस के अनुसार कई बार परिवार गुमशुदगी की सूचना देर से देते हैं, जिससे शुरुआती 'गोल्डन पीरियड' का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति अपनी पहचान बताने में भी असमर्थ होते हैं, जिससे मैनुअल इंटेलिजेंस और स्थानीय सूचना तंत्र पर निर्भरता बढ़ जाती है।
हॉटस्पॉट चिन्हित, विशेष निगरानी लागू
पुलिस ने गुमशुदगी के मामलों का विश्लेषण कर संवेदनशील क्षेत्रों को हॉटस्पॉट घोषित किया है। नोएडा जोन में सदरपुर, सलारपुर, सेक्टर-37, बरोला और होशियारपुर को चिन्हित किया गया है। सेंट्रल नोएडा जोन में इलाहाबास, भंगेल, नयागांव, याकूबपुर, कुलेसरा, जलपुरा, गौर सिटी-1, राइस सिटी और चेरी काउंटी शामिल हैं। ग्रेटर नोएडा जोन में कस्बा कासना, कस्बा जेवर और दादरी के रेलवे रोड चौकी क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इन क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त, सीसीटीवी निगरानी, बीट पुलिस की सक्रियता और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता बढ़ाई गई है। ज़रूरत के अनुसार हॉटस्पॉट का पुनर्मूल्यांकन कर सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया जा रहा है।
संवेदनशील मामलों में सफलता के उदाहरण
थाना कासना क्षेत्र में 11 मार्च 2026 को 10 वर्षीय एक मानसिक रूप से अस्वस्थ और बोलने में असमर्थ बालक के लापता होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने फोटो, हुलिए, वात्सल्य पोर्टल, सोशल मीडिया और मुखबिर तंत्र की मदद से खोजबीन की। बाद में मथुरा स्थित राजकीय बालगृह से जानकारी मिली कि रेलवे स्टेशन पर एक बालक मिला था — फोटो मिलान के बाद उसे सकुशल परिवार को सौंप दिया गया।
थाना सेक्टर-49 क्षेत्र से 9 जून को बाज़ार गई दो नाबालिग बालिकाएँ वापस नहीं लौटीं। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने विशेष टीम बनाई और सर्विलांस तथा तकनीकी संसाधनों की मदद से 14 जून को दोनों बालिकाओं को सकुशल बरामद कर लिया गया।
आगे की कार्रवाई
कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के अनुसार शेष गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए विशेष टीमें सक्रिय हैं। अन्य जिलों और राज्यों की पुलिस इकाइयों के साथ समन्वय जारी है। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सोशल मीडिया, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र का उपयोग अनवरत जारी रहेगा। गौरतलब है कि यह अभियान केवल बरामदगी तक सीमित नहीं है — हॉटस्पॉट की पहचान और निवारक निगरानी इसे दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बनाती है।