पाँच दशकों से रावण के पुतले बना रहे मुस्लिम कारीगर हाफिजुद्दीन, मुंबई में दशहरे की तैयारी जोरों पर
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में दशहरा 2026 की तैयारियाँ पूरी रफ्तार से चल रही हैं। सायन कोलीवाड़ा, गिरगांव चौपाटी और आजाद मैदान में रावण के विशालकाय पुतले बनाने का काम शुरू हो चुका है। इस काम की सबसे खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले के मूल निवासी और वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर में रहने वाले मुस्लिम कारीगर हाफिजुद्दीन अहमद पिछले पाँच दशकों से भी अधिक समय से यह परंपरा निभाते आ रहे हैं।
कारीगर और उनकी विरासत
हाफिजुद्दीन अहमद अपनी पूरी टीम के साथ हर वर्ष मुंबई पहुँचते हैं और दशहरे के लिए पुतले तैयार करते हैं। उनके परिवार की कई पीढ़ियाँ इस काम से जुड़ी रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे दिल्ली में पुतले बनाते थे और पिछले करीब 20-25 वर्षों से मुंबई में यह काम कर रहे हैं। उनके लिए यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक कलात्मक जुनून भी है।
हाफिजुद्दीन ने कहा, 'पुतले बनाने का मुझे शौक है और दूसरा यह कि इससे कमाई होती है। रावण के पुतले बनाने का मकसद यह है कि कैसे बुराई पर अच्छाई की विजय होती है।' उनके एक साथी कारीगर ने बताया कि वे बचपन से ही इस काम को देखते आए हैं और अब इसे पेशे के रूप में अपना चुके हैं।
पुतले बनाने की प्रक्रिया
रावण के पुतले का निर्माण एक श्रम-साध्य और कुशल काम है। बाँस, कागज़ और अन्य सामग्रियों का उपयोग करते हुए पहले ढाँचा तैयार किया जाता है, फिर उसकी सजावट की जाती है। विशालकाय आकार और जटिल सजावट के कारण इस काम में विशेष कौशल, धैर्य और मेहनत की ज़रूरत होती है। हाफिजुद्दीन और उनकी टीम के दशकों के अनुभव ने उन्हें इस काम में निपुण बनाया है।
सामाजिक सौहार्द की जीवंत मिसाल
हाफिजुद्दीन अहमद की यह कलात्मक यात्रा भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब का एक जीवंत उदाहरण है। गौरतलब है कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में अलग-अलग धर्मों के लोगों का एक-दूसरे के त्योहारों में योगदान देना सदियों पुरानी रवायत रही है। मुंबई जैसे बहुसांस्कृतिक महानगर में यह परंपरा विशेष रूप से मज़बूत है, जहाँ विभिन्न समुदाय मिल-जुलकर हर पर्व को मनाते हैं।
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब देश में सांप्रदायिक सौहार्द की चर्चाएँ अक्सर होती रहती हैं। हाफिजुद्दीन का यह काम यह संदेश देता है कि कला का कोई धर्म नहीं होता और हुनर लोगों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
मुंबई में दशहरे का उत्साह
दशहरा हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। सायन कोलीवाड़ा, गिरगांव चौपाटी और आजाद मैदान में पुतलों के निर्माण के साथ ही मुंबई में उत्सव की तैयारियाँ अब पूरी तरह जोर पकड़ चुकी हैं। इस बार भी हाफिजुद्दीन अहमद की टीम समय पर पुतले तैयार करने में जुटी है, ताकि त्योहार का उत्साह बेरोकटोक जारी रहे।