15 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबी फर्म को $50,000 प्रतिमाह पर रखा, वैश्विक छवि सुधारने की कोशिश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबी फर्म को $50,000 प्रतिमाह पर रखा, वैश्विक छवि सुधारने की कोशिश

सारांश

मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय घेराबंदी के बीच पाकिस्तान ने $50,000 प्रतिमाह पर अमेरिकी लॉबी फर्म रखी है। UN की रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, BLA-TTP के हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर की डूबती साख — यह लॉबिंग दांव हताशे की तस्वीर पेश करता है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान ने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप, एलएलसी के साथ $50,000 प्रतिमाह का लॉबिंग अनुबंध किया।
फर्म का काम वाशिंगटन में पाकिस्तान की छवि सुधारना और शीर्ष निर्णय-निर्माताओं से बैठकें आयोजित करना है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने हिंदू, ईसाई, अहमदी, शिया और सिख अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की।
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में TTP और BLA के हमलों और मानवाधिकार हनन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ऑपरेशन सिंदूर के बाद अंतरराष्ट्रीय छवि कमज़ोर हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर आर्थिक संकट के बावजूद इस लॉबिंग अभियान पर भारी खर्च पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर करता है।

मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहे पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक छवि चमकाने के लिए अमेरिकी लॉबिंग फर्मों का दामन थामा है। इस्लामाबाद ने इस महीने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप, एलएलसी के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत फर्म को प्रतिमाह 50,000 डॉलर दिए जाएंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठ रही हैं।

लॉबिंग सौदे का ब्यौरा

एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप को वाशिंगटन में पावर सर्किल से जुड़े शीर्ष नेताओं और निर्णय-निर्माताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित करने का काम सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस फर्म का मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन में पाकिस्तान की धारणा को बदलना है। गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले भी मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और राउंड-टेबल आयोजनों के लिए ऐसे लोगों को रखता रहा है जो इस्लामाबाद की छवि सुधारने पर केंद्रित काम करते हैं।

मानवाधिकार उल्लंघन: संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चिंताएँ

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति की एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक असहिष्णुता, जबरन अपहरण और धर्मांतरण पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। समिति ने शिया मुसलमानों, ईसाइयों, अहमदियों, हिंदुओं और सिखों पर बढ़ते हमलों और धमकियों से निपटने में पाकिस्तान की विफलता पर भी सवाल उठाए। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के निवासी खुले तौर पर विकास की कमी और मानवाधिकार हनन की शिकायत कर रहे हैं, और सोशल मीडिया के कारण ये मुद्दे अब वैश्विक स्तर पर सामने आ रहे हैं।

अफगानिस्तान विवाद और लॉबिंग एजेंडा

ये लॉबिंग फर्में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं। पाकिस्तान ने बिना ठोस सबूत पेश किए दावा किया है कि अफगानिस्तान अपनी धरती को आतंकी समूहों के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल होने दे रहा है, और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन देने का आरोप भी लगाया है। अफगान तालिबान ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। इन दबाव समूहों का काम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी निर्णय-निर्माताओं को यह समझाना होगा कि अफगानिस्तान पर लगाम क्यों जरूरी है।

आंतरिक संकट और दोहरा रवैया

अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय फील्ड मार्शल असीम मुनीर के पूर्ण नियंत्रण में है, जिनकी छवि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमज़ोर हुई। इसके अलावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज किए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान का इस तरह के छवि-सुधार अभियान पर भारी खर्च उसके दोहरे रवैये को उजागर करता है।

विशेषज्ञों का आकलन

पाकिस्तान पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस्लामाबाद का एक हताशा भरा कदम है, क्योंकि देश में प्रतिदिन मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स में पाकिस्तान के समर्थन में लेख आने की संभावना है, क्योंकि ये दबाव समूह मीडिया प्रमुखों और उनके बोर्ड सदस्यों से संपर्क साधने की कोशिश करेंगे। एक अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इस्लामाबाद अपनी साख बचाने के लिए अपने ही नागरिकों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने से नहीं हिचकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सोशल मीडिया के युग में यह रणनीति पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के पीड़ित अब सीधे दुनिया से बात कर सकते हैं। विरोधाभास यह है कि जिस देश की अर्थव्यवस्था IMF की लाइफलाइन पर टिकी है, वह छवि-प्रबंधन पर लाखों डॉलर फूँक रहा है — यह संसाधनों की प्राथमिकता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर की कमज़ोर हुई साख मिलकर यह बताती है कि यह लॉबिंग अभियान वास्तविक सुधार का विकल्प नहीं, बल्कि उससे बचने का रास्ता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान ने किस अमेरिकी लॉबिंग फर्म को रखा है और कितना भुगतान होगा?
पाकिस्तान ने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप, एलएलसी के साथ अनुबंध किया है, जिसके तहत फर्म को प्रतिमाह 50,000 डॉलर दिए जाएंगे। फर्म का काम वाशिंगटन में शीर्ष नेताओं और निर्णय-निर्माताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित कर पाकिस्तान की छवि सुधारना है।
पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि सुधारने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने पाकिस्तान में हिंदू, ईसाई, अहमदी, शिया और सिख अल्पसंख्यकों पर हमलों और जबरन धर्मांतरण पर गंभीर चिंता जताई है। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में TTP और BLA के हमले तथा मानवाधिकार हनन की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठ रही हैं।
इस लॉबिंग अभियान में अफगानिस्तान का मुद्दा कैसे जुड़ा है?
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर TTP को समर्थन देने और अपनी धरती को आतंकी लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल होने देने का आरोप लगाया है, जिसे अफगान तालिबान ने खारिज किया है। ये लॉबिंग फर्में अमेरिकी नेताओं को अफगानिस्तान पर लगाम लगाने और क्षेत्रीय स्थिरता की ज़रूरत समझाने का काम करेंगी।
फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका इस संदर्भ में क्या है?
अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान इस समय फील्ड मार्शल असीम मुनीर के पूर्ण नियंत्रण में है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि कमज़ोर हुई है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह लॉबिंग अभियान आंशिक रूप से उनकी साख बचाने की कोशिश भी है।
क्या पाकिस्तान पहले भी ऐसी लॉबिंग कर चुका है?
हाँ, अधिकारियों के अनुसार पाकिस्तान पहले भी मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और राउंड-टेबल आयोजनों के लिए ऐसे लोगों को रखता रहा है जो इस्लामाबाद की छवि सुधारने पर काम करते हैं। हालाँकि इस बार उल्लंघन अधिक गंभीर हो गए हैं और सोशल मीडिया के कारण इन्हें छुपाना पहले से कठिन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले