मानवाधिकार उल्लंघनों के बीच पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबी फर्म को $50,000 प्रतिमाह पर रखा, वैश्विक छवि सुधारने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहे पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक छवि चमकाने के लिए अमेरिकी लॉबिंग फर्मों का दामन थामा है। इस्लामाबाद ने इस महीने अमेरिकी फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप, एलएलसी के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत फर्म को प्रतिमाह 50,000 डॉलर दिए जाएंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार उठ रही हैं।
लॉबिंग सौदे का ब्यौरा
एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप को वाशिंगटन में पावर सर्किल से जुड़े शीर्ष नेताओं और निर्णय-निर्माताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित करने का काम सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस फर्म का मुख्य उद्देश्य वाशिंगटन में पाकिस्तान की धारणा को बदलना है। गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले भी मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और राउंड-टेबल आयोजनों के लिए ऐसे लोगों को रखता रहा है जो इस्लामाबाद की छवि सुधारने पर केंद्रित काम करते हैं।
मानवाधिकार उल्लंघन: संयुक्त राष्ट्र की गंभीर चिंताएँ
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति की एक विस्तृत रिपोर्ट में पाकिस्तान में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक असहिष्णुता, जबरन अपहरण और धर्मांतरण पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। समिति ने शिया मुसलमानों, ईसाइयों, अहमदियों, हिंदुओं और सिखों पर बढ़ते हमलों और धमकियों से निपटने में पाकिस्तान की विफलता पर भी सवाल उठाए। खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के निवासी खुले तौर पर विकास की कमी और मानवाधिकार हनन की शिकायत कर रहे हैं, और सोशल मीडिया के कारण ये मुद्दे अब वैश्विक स्तर पर सामने आ रहे हैं।
अफगानिस्तान विवाद और लॉबिंग एजेंडा
ये लॉबिंग फर्में अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं। पाकिस्तान ने बिना ठोस सबूत पेश किए दावा किया है कि अफगानिस्तान अपनी धरती को आतंकी समूहों के लिए लॉन्चपैड के रूप में इस्तेमाल होने दे रहा है, और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन देने का आरोप भी लगाया है। अफगान तालिबान ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। इन दबाव समूहों का काम अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी निर्णय-निर्माताओं को यह समझाना होगा कि अफगानिस्तान पर लगाम क्यों जरूरी है।
आंतरिक संकट और दोहरा रवैया
अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय फील्ड मार्शल असीम मुनीर के पूर्ण नियंत्रण में है, जिनकी छवि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमज़ोर हुई। इसके अलावा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज किए हैं। एक अधिकारी ने कहा कि गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान का इस तरह के छवि-सुधार अभियान पर भारी खर्च उसके दोहरे रवैये को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का आकलन
पाकिस्तान पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस्लामाबाद का एक हताशा भरा कदम है, क्योंकि देश में प्रतिदिन मानवाधिकार उल्लंघन की खबरें आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स में पाकिस्तान के समर्थन में लेख आने की संभावना है, क्योंकि ये दबाव समूह मीडिया प्रमुखों और उनके बोर्ड सदस्यों से संपर्क साधने की कोशिश करेंगे। एक अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि इस्लामाबाद अपनी साख बचाने के लिए अपने ही नागरिकों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने से नहीं हिचकेगा।