पलानीस्वामी का तमिलनाडु सरकार पर हमला: 21 सितंबर तक डेंगू के 17,348 मामले, रोकथाम में नाकामी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने 24 सितंबर 2026 को तमिलनाडु की सत्तारूढ़ सरकार पर डेंगू के बढ़ते प्रकोप को रोकने में पूरी तरह विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 21 सितंबर 2026 तक राज्य में डेंगू के 17,348 मामले और स्क्रब टाइफस के 4,653 मामले दर्ज हो चुके हैं, और सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड भरते जा रहे हैं। उनका कहना था कि जनता को तत्काल सुरक्षा की ज़रूरत है, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
मुख्य आरोप और आँकड़े
पलानीस्वामी ने स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केवल 21 सितंबर को डेंगू के 71 मामले एकल दिन में पुष्टि हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार के रोकथाम उपायों में ढिलाई के कारण पूरे राज्य में संक्रमण तेज़ी से फैला है। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर 2025 के पहले 20 दिनों की तुलना में इस वर्ष संक्रमण की रफ़्तार अधिक है।
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें कहा गया था कि इस वर्ष के डेंगू मामले पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं। पलानीस्वामी के अनुसार, मंत्री ने तुलना के लिए अलग-अलग समयावधि के आँकड़े चुने, जिससे स्थिति की वास्तविक गंभीरता छुप जाती है।
स्वास्थ्य मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल
पलानीस्वामी ने जन स्वास्थ्य निदेशक की अध्यक्षता में डेंगू नियंत्रण उपायों पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अरुणराज की अनुपस्थिति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री उस वक्त चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जन जागरूकता वीडियो जारी करना जमीनी कार्रवाई का विकल्प नहीं हो सकता।
अन्ना विश्वविद्यालय छात्र मृत्यु का संदर्भ
अन्ना विश्वविद्यालय में एक छात्र की मृत्यु का उल्लेख करते हुए पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार ने उस छात्र के कथित स्क्रब टाइफस संक्रमण पर ध्यान केंद्रित करके व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मीडिया और जनता की चेतावनियों को सरकार ने लगातार नज़रअंदाज़ किया।
AIADMK नेता की माँगें
पलानीस्वामी ने सरकार से माँग की कि डेंगू पीड़ितों को समय पर उपचार मिले और अस्पतालों में पर्याप्त दवाएँ, बेड तथा चिकित्सक उपलब्ध कराए जाएँ। उन्होंने हर गली में लगातार मेडिकल कैंप और घर-घर जाकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान एवं उन्मूलन की माँग रखी। साथ ही अधिकारियों को फील्ड टीमों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने को कहा।
उन्होंने पिछली AIADMK सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन कार्यकालों में मच्छर नियंत्रण और स्वच्छता अभियान को समय रहते तेज़ किया गया था, जिससे मौतें और संक्रमण रोकने में मदद मिली थी। उन्होंने वर्तमान सरकार से इमरजेंसी आधार पर कार्रवाई तेज़ करने का आग्रह किया।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद का मौसम तमिलनाडु में मच्छरजनित रोगों के लिए परंपरागत रूप से संवेदनशील माना जाता है। पलानीस्वामी के बयान के बाद जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विपक्षी दलों की नज़र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक खंडन सामने नहीं आया है।