पारलाखेमुंडी स्टेशन का आधुनिक रूप, यात्रियों को मिली एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं

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पारलाखेमुंडी स्टेशन का आधुनिक रूप, यात्रियों को मिली एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं

सारांश

ओडिशा का पारलाखेमुंडी स्टेशन अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यात्रियों ने इसे एयरपोर्ट की तरह सुविधाजनक बताया है। गजपति महाराजा की ऐतिहासिक विरासत को याद किया गया है।

Key Takeaways

  • पारलाखेमुंडी स्टेशन का कायाकल्प आधुनिक सुविधाओं के साथ हुआ है।
  • यह स्टेशन गजपति महाराजा के योगदान को दर्शाता है।
  • स्टेशन पर दिव्यांगजनों के लिए सुविधाएं उपलब्ध हैं।
  • यह ओडिशा का पहला राजस्व रेलवे स्टेशन माना जाता है।
  • स्थानीय संगठनों द्वारा संग्रहालय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

गजपति, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा का पारलाखेमुंडी स्टेशन अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नए सिरे से सजाया गया है। स्टेशन का कायाकल्प किया गया है, जिससे यह बिल्कुल नया और चमकीला दिखता है। पारलाखेमुंडी ने गजपति महाराजा गौर चंद्र गजपति नारायण देव के योगदान को याद किया, जिन्होंने ओडिशा में रेलवे की नींव रखी थी। स्वतंत्रता से पहले, राजा ने अपने खजाने से ओडिशा का पहला रेलवे स्टेशन स्थापित किया था।

अब जीर्णोद्धार किया गया पारलाखेमुंडी स्टेशन राजा के योगदान की गाथा सुनाता है। अभिलेखों के अनुसार, यह ओडिशा की पहली 'लाइट रेल' शाही रेलवे लाइन थी। केंद्र सरकार ने इस स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल किया, जिसके तहत इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें दिव्यांगजनों के लिए १२ मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज और लिफ्ट शामिल हैं। यहाँ गौतम बुद्ध और अशोक चक्र की पत्थर की मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पारलाखेमुंडी रेलवे स्टेशन ओडिशा के रेलवे इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

यह रेलवे स्टेशन ओडिशा के रेलवे इतिहास, संस्कृति और राजस्व का जीवंत प्रतीक है। १९१४ में, ओडिशा के विभिन्न हिस्सों से प्रमुख हस्तियाँ रेल द्वारा यहां आई थीं। इस स्थान पर ओडिशा के एक अलग प्रांत के गठन पर चर्चा हुई थी। चूंकि यह स्टेशन ओडिशा के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है, कई संगठन यहां एक संग्रहालय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। लोगों की राय है कि पुराने टिकट काउंटर, माल गोदाम और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं को संग्रहालय में संरक्षित किया जाना चाहिए।

इस रेलवे स्टेशन का १२५ वर्षों का ऐतिहासिक सफर ओडिशा के रेलवे विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सन् १८९९ में, गजपति महाराजा गौर चंद्र गजपति नारायण देव ने नौपाड़ा से ४० किलोमीटर दूर पारलाखेमुंडी रेलवे स्टेशन की स्थापना की थी। यहाँ से परलाखेमुंडी लाइट रेलवे (पीएलआर) की शुरुआत हुई, जो ओडिशा की पहली रेलवे लाइन थी।

राजा के खजाने से इस स्टेशन और रेलवे लाइन का निर्माण हुआ, जिसमें ७ लाख रुपये खर्च हुए थे। शुरुआत में यह रेलवे लाइन लाभदायक नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे यह लाभ देने लगी। महाराजा के पुत्र कृष्ण चंद्र गजपति ने रेलवे लाइन को गुनूपुर तक बढ़ाया। १९३४ में, पीएलआर या पारलाखेमुंडी रेलवे स्टेशन को बंगाल-नागपुर उत्तर पूर्वी रेलवे में शामिल किया गया।

इस रेलवे लाइन का निर्माण १३ महीनों में १८९९ में पूरा हुआ था। आम जनता के लिए यात्री और माल सेवाएं अप्रैल १९०० में शुरू की गईं। राजा की देखरेख में ब्रिटिश सिविल इंजीनियर जे.आर. सैंडफोर्ड ने इस रेलवे के निर्माण का निरीक्षण किया। पीएलआर वास्तव में ओडिशा में एक महान पहल थी, जिसने लोगों को रेलवे के माध्यम से आधुनिक परिवहन और संचार के दायरे में लाया।

यात्री प्रभाकमर गुरु ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "पहले स्टेशन की स्थिति बहुत खराब थी। सीनियर सिटीजन और मरीजों को स्टेशन पर आने और ट्रेन में चढ़ने में बहुत परेशानी होती थी। अब पारलाखेमुंडी रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट की तरह नजर आता है। बड़े शहरों की तरह यहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।"

पूर्वी तट रेलवे भुवनेश्वर के सदस्य संतोष कुमार महाराणा ने कहा, "अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना के तहत पारलाखेमुंडी स्टेशन को बहुत अच्छे से बनाया गया है। यहाँ दिव्यांग, मरीज और वृद्ध लोगों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।"

नृषंघ चरण पटनायक ने कहा, "परलाखेमुंडी रेलवे स्टेशन के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में इसे सुशोभित किया गया है। यहाँ की सुविधाएं लोगों को भा रही हैं और भविष्य में इसके और भी बेहतर होने की संभावनाएँ हैं।"

यात्री अरुणिमा साहू ने कहा, "परलाखेमुंडी स्टेशन पर सुविधाएं काफी बढ़ गई हैं। यहाँ ट्रेनें अधिक रुकने से यात्रियों को आने-जाने में सहूलियत हुई है। प्लेटफार्म पर अच्छी कुर्सियां और पंखे लगे हैं, जो यात्रियों को आराम देते हैं।"

Point of View

बल्कि गजपति महाराजा के योगदान को भी उजागर करता है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

पारलाखेमुंडी स्टेशन का कायाकल्प कब हुआ?
पारलाखेमुंडी स्टेशन का कायाकल्प अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हाल ही में किया गया है।
इस स्टेशन की खासियत क्या हैं?
यह स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस है, जिसमें दिव्यांगजनों के लिए लिफ्ट और फुट ओवर ब्रिज शामिल हैं।
पारलाखेमुंडी स्टेशन का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यह ओडिशा का पहला रेलवे स्टेशन है, जिसकी स्थापना गजपति महाराजा गौर चंद्र गजपति नारायण देव ने की थी।
क्या इस स्टेशन पर संग्रहालय बनाने की योजना है?
हाँ, कई संगठन यहाँ एक अलग संग्रहालय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
यात्री इस स्टेशन के बारे में क्या सोचते हैं?
यात्री इस स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी सेवाओं के लिए सराह रहे हैं।
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