परभणी मंदिर हादसा: छत गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत, PM मोदी ने जताया शोक, CM फडणवीस ने ₹5 लाख मुआवज़े का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के परभणी जिले के यशवाड़ी गाँव में शनिवार, 20 जून को हनुमान मंदिर की निर्माणाधीन छत का स्लैब गिरने से 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 40 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे के समय मंदिर परिसर में कीर्तन और महाप्रसाद का कार्यक्रम चल रहा था, जिसके कारण भारी संख्या में भक्त मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
हादसे का घटनाक्रम
शनिवार दोपहर यशवाड़ी गाँव स्थित हनुमान मंदिर में कीर्तन और महाप्रसाद का धार्मिक आयोजन चल रहा था। उसी दौरान मंदिर में निर्माण कार्य भी जारी था। अचानक मंदिर परिसर का सभा मंडप का स्लैब धराशायी हो गया, जिससे पूरे परिसर में चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। यह स्थान छत्रपति संभाजीनगर से करीब 190 किलोमीटर दूर मानवत रोड पर स्थित है।
मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तत्काल घटनास्थल पर पहुँचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया। अब तक मलबे से लगभग 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। घायलों का उपचार जारी है और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर तैनात हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा कि 'महाराष्ट्र के परभणी में दीवार गिरने से हुई जानमाल की हानि से मैं अत्यंत दुखी हूँ। इस दुर्घटना में अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।' यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मानसून-पूर्व निर्माण कार्यों को लेकर सुरक्षा मानकों पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
मुख्यमंत्री फडणवीस का ऐलान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए एक्स पर लिखा कि 'परभणी जिले के यशवाड़ी में हनुमान मंदिर की निर्माणाधीन छत का एक हिस्सा गिरने से कुछ श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई। मैं उनके प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। हम उनके परिवार के दुख में शामिल हैं। इस घटना में घायलों का इलाज चल रहा है। स्थानीय प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और राहत एवं बचाव अभियान तेजी से जारी है।' फडणवीस ने घोषणा की कि राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹5 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
गौरतलब है कि यह हादसा एक धार्मिक आयोजन के दौरान हुआ, जब परिसर में सामान्य से अधिक भीड़ थी। निर्माण कार्य और धार्मिक सभा का एक साथ संचालन इस त्रासदी की मूल वजह बताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि निर्माण-काल में श्रद्धालुओं की उपस्थिति की अनुमति देना प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है। घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनकी स्थिति की निगरानी जारी है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार द्वारा घोषित ₹5 लाख की मुआवज़ा राशि पीड़ित परिवारों तक पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। स्थानीय प्रशासन से हादसे की जाँच की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि निर्माण कार्य में लापरवाही की जवाबदेही तय की जा सके। यह हादसा महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों पर निर्माण सुरक्षा नियमों की समीक्षा की माँग को एक बार फिर सामने ला रहा है।