पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी ने साझा प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया
सारांश
Key Takeaways
- साझा प्रयासों के माध्यम से संकट का सामना करना होगा।
- पीएम मोदी ने सशक्त समूहों का गठन किया है।
- आवश्यक चीजों की आपूर्ति को सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में केंद्र सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञों और अधिकारियों के सशक्त समूह बनाए गए थे। इसी क्रम में, कल सात नए सशक्त समूह का गठन किया गया है। ये समूह सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइज़र, गैस और महंगाई जैसे मुद्दों पर त्वरित और दीर्घकालिक रणनीति के तहत कार्य करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि साझा प्रयासों के माध्यम से हम इन परिस्थितियों का बेहतर सामना कर सकेंगे। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि आगामी बुआई के मौसम में किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध हो। खाद की पर्याप्त आपूर्ति के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ की गई हैं। हमारा निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ न पड़े। मैं देश के किसानों को फिर से आश्वस्त करना चाहता हूँ कि सरकार हर चुनौती का समाधान करने के लिए उनके साथ खड़ी है।
पीएम ने कहा कि भविष्य में ये संकट हमारे देश के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। इस परीक्षा में राज्यों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। इसलिए मैं इस सदन के माध्यम से सभी राज्य सरकारों से कुछ निवेदन करना चाहता हूँ। संकट के समय गरीबों, श्रमिकों और प्रवासी साथियों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ समय पर प्राप्त होता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जहां प्रवासी श्रमिक कार्यरत हैं, वहां उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाने चाहिए। ऐसी स्थितियों पर नज़र रखने के लिए राज्य सरकारों को विशेष व्यवस्थाएँ करनी चाहिए, जिससे उनकी परेशानियों का समाधान हो सके।
राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर गंभीर ध्यान देना होगा। ऐसे समय में कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। जहां भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहाँ त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। आवश्यक चीजों की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे, यह सुनिश्चित करना हर राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए।