फलता पुनर्मतदान विवाद: कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला, 'कर्तव्यों के निर्वहन में विफल'
सारांश
Key Takeaways
पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान के आदेश के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के नेताओं ने 3 मई 2026 को चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विफलता का प्रमाण बताया। लखनऊ से कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत और रांची से नेता राकेश सिन्हा ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देते हुए आयोग के रवैये को निशाने पर लिया।
कांग्रेस के आरोप: आयोग की विफलता उजागर
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चुनाव आयोग के पुनर्मतदान के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आदेश से यह स्पष्ट है कि आयोग अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहा। राजपूत के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रही है और फलता का मामला उसी की पुष्टि करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और बख्तरबंद गाड़ियों जैसे अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए, फिर भी पुनर्मतदान की नौबत आना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कांग्रेस का तर्क है कि इतने संसाधनों के बावजूद स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित न हो पाना आयोग की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाता है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर खतरे का आरोप
राजपूत ने आगे आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बाद इंडिया ब्लॉक की बैठक अत्यंत आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए ठोस रणनीति तैयार की जा सके। उनके अनुसार, विपक्षी दलों को एकजुट होकर इस मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने होंगे।
राकेश सिन्हा का बयान: पुनर्गणना का अधिकार लोकतांत्रिक
रांची में कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने भी चुनावी प्रक्रिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को मतगणना के दौरान पुनर्गणना की माँग करने का अधिकार है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। उनका यह बयान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस निर्देश के संदर्भ में आया, जिसमें उन्होंने अपने पार्टी एजेंटों को करीबी मुकाबले की स्थिति में पुनर्गणना की माँग करने को कहा था।
सिन्हा ने यह भी दावा किया कि जनमत सर्वेक्षणों के संकेत बताते हैं कि महँगाई और जनविरोधी नीतियों के कारण सत्ताधारी दलों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारधारा को कमजोर करने की कोशिश करने वाले दलों को जनता चुनाव में जवाब देगी।
भाजपा और आयोग पर निशाना
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राकेश सिन्हा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में परिस्थितियाँ जटिल हैं और आयोग का रवैया निष्पक्ष नहीं दिखाई देता। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा बड़े संसाधन झोंकने के बावजूद जमीनी स्तर पर उसकी स्थिति मजबूत नहीं है, जिससे राजनीतिक तनाव में वृद्धि हुई है। गौरतलब है कि फलता का यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति पहले से ही तीखे ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रही है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के आरोपों के बाद अब सभी की नजरें फलता में होने वाले पुनर्मतदान की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित बैठक में विपक्षी एकता की दिशा भी स्पष्ट होगी, जो आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम को निर्धारित कर सकती है।