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पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में ब्लैकस्टोन, IBM समेत 7 अमेरिकी दिग्गजों को भारत में निवेश का न्योता दिया

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पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में ब्लैकस्टोन, IBM समेत 7 अमेरिकी दिग्गजों को भारत में निवेश का न्योता दिया

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में ब्लैकस्टोन, IBM, एस्टी लॉडर, मेटलाइफ समेत सात अमेरिकी दिग्गजों से मुलाकात कर भारत में निवेश का न्योता दिया। AI, बीमा, विनिर्माण और वित्तीय सेवाओं में सहयोग पर केंद्रित ये बैठकें भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देने की कोशिश हैं।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में 7 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से अलग-अलग बैठकें कीं।
ब्लैकस्टोन (जोनाथन ग्रे, प्रकाश मेलवानी), IBM (अरविंद कृष्णा), मेटलाइफ (मिशेल ए.
खलाफ), AIA ग्रुप (मार्क टकर), न्यूबर्गर बरमन (जॉर्ज वॉकर), एस्टी लॉडर (स्टेफान डी फावेरी) और जनरल अटलांटिक (विलियम ई.
फोर्ड) से मुलाकात हुई।
AI, क्लाउड, क्वांटम कंप्यूटिंग, बीमा, विनिर्माण और वेल्थ मैनेजमेंट प्रमुख क्षेत्र रहे।
भारत के '2047 तक सभी के लिए बीमा' लक्ष्य को बीमा क्षेत्र की बैठकों में विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठकों का उद्देश्य भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को ठोस गति देना था।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में ब्लैकस्टोन, न्यूबर्गर बरमन, एस्टी लॉडर, IBM, मेटलाइफ, जनरल अटलांटिक और AIA ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों से अलग-अलग बैठकें कर भारत में निवेश विस्तार एवं द्विपक्षीय व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा की। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान में बताया कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका आर्थिक एवं वाणिज्यिक साझेदारी को ठोस गति प्रदान करना था।

किन-किन कंपनियों से हुई बैठक

ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष एवं मुख्य परिचालन अधिकारी जोनाथन ग्रे और कंपनी के अंतरराष्ट्रीय प्राइवेट इक्विटी कारोबार के चेयरमैन प्रकाश मेलवानी के साथ हुई बैठक में विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश विस्तार तथा साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। न्यूबर्गर बरमन के चेयरमैन एवं सीईओ जॉर्ज वॉकर और उनकी नेतृत्व टीम से वित्तीय सेवाओं तथा वेल्थ मैनेजमेंट क्षेत्र में सहयोग गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की गई।

एस्टी लॉडर कंपनीज के अध्यक्ष एवं सीईओ स्टेफान डी फावेरी के साथ बैठक में भारत के तेज़ी से बढ़ते ब्यूटी और पर्सनल केयर बाज़ार पर केंद्रित चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत में विनिर्माण और स्थानीय सोर्सिंग बढ़ाने की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की रूपरेखा

IBM के चेयरमैन एवं सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बातचीत में भारत में कंपनी की भागीदारी को और सुदृढ़ करने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया। गौरतलब है कि IBM भारत में अपने सबसे बड़े वैश्विक केंद्रों में से एक संचालित करती है, और यह बैठक AI-केंद्रित निवेश के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

बीमा और वित्तीय सेवाओं पर विशेष ज़ोर

मेटलाइफ के अध्यक्ष एवं सीईओ मिशेल ए. खलाफ से हुई बैठक में भारत में बीमा एवं वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों तथा कंपनी के संभावित विस्तार पर चर्चा की गई। AIA ग्रुप के गैर-कार्यकारी चेयरमैन मार्क टकर के साथ बैठक में भारत के बीमा क्षेत्र एवं वित्तीय सेवाओं में निवेश के अवसरों पर विचार हुआ। इस दौरान सरकार के '2047 तक सभी के लिए बीमा' के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

जनरल अटलांटिक के चेयरमैन एवं सीईओ विलियम ई. फोर्ड के साथ निवेश और व्यापारिक सहयोग को मज़बूत बनाने के अवसरों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

बैठकों का व्यापक संदेश

वाणिज्य मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन सभी बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और निवेश से जुड़े अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएँ एक महत्त्वपूर्ण चरण में हैं और दोनों देश द्विपक्षीय निवेश के नए रास्ते तलाश रहे हैं।

गोयल की यह न्यूयॉर्क यात्रा वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की छवि को एक स्थिर और उच्च-विकास गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अब नज़र इस बात पर होगी कि इन बैठकों के बाद कितनी जल्दी ठोस निवेश प्रतिबद्धताएँ सामने आती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये नाम वैश्विक पूँजी और प्रौद्योगिकी का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या ये चर्चाएँ बाध्यकारी निवेश प्रतिबद्धताओं में बदलती हैं, क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ अभी भी कई अनसुलझे टैरिफ और बाज़ार-पहुँच के मुद्दों से घिरी हैं। '2047 तक सभी के लिए बीमा' जैसे दीर्घकालिक लक्ष्यों का उल्लेख बीमा कंपनियों को आकर्षित करने की सोची-समझी रणनीति है, लेकिन विदेशी बीमाकर्ता नियामकीय स्थिरता और FDI सीमाओं पर स्पष्टता चाहते हैं — जिसका जवाब इन बैठकों के बयान में नहीं मिलता।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में किन-किन अमेरिकी कंपनियों से मुलाकात की?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूयॉर्क में ब्लैकस्टोन, न्यूबर्गर बरमन, एस्टी लॉडर कंपनीज, IBM, मेटलाइफ, जनरल अटलांटिक और AIA ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों से अलग-अलग बैठकें कीं। इन सभी बैठकों में भारत में निवेश विस्तार और द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत बनाने पर चर्चा हुई।
इन बैठकों में किन क्षेत्रों पर चर्चा हुई?
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठकों में वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बीमा और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई। भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देना इन बैठकों का केंद्रीय उद्देश्य बताया गया।
IBM के साथ बैठक में क्या तय हुआ?
IBM के चेयरमैन एवं सीईओ अरविंद कृष्णा के साथ बैठक में भारत में कंपनी की भागीदारी को सुदृढ़ करने तथा AI, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वांटम कंप्यूटिंग में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत में उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संभावनाओं को रेखांकित किया।
AIA ग्रुप और मेटलाइफ के साथ बैठक में 'सभी के लिए बीमा' लक्ष्य क्यों उठाया गया?
भारत सरकार का '2047 तक सभी के लिए बीमा' का लक्ष्य देश में बीमा क्षेत्र के विशाल विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जिसके लिए विदेशी निवेश और विशेषज्ञता की ज़रूरत है। AIA ग्रुप के मार्क टकर और मेटलाइफ के मिशेल ए. खलाफ के साथ बैठकों में इस लक्ष्य को रेखांकित कर भारत में बीमा क्षेत्र की विकास क्षमता को उजागर किया गया।
पीयूष गोयल की यह न्यूयॉर्क यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज़ से कितनी अहम है?
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ एक महत्त्वपूर्ण दौर से गुज़र रही हैं और दोनों देश द्विपक्षीय निवेश के नए रास्ते तलाश रहे हैं। सात प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष नेतृत्व से एक ही दौरे में मुलाकात भारत को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने की रणनीतिक कोशिश को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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