12 अक्टूबर 2026
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नवरात्रि 2026: PM मोदी ने साझा किया दुर्गासप्तशती का श्लोक, मां अंबिका के सामूहिक कल्याण-मंत्र का अर्थ समझाया

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नवरात्रि 2026: PM मोदी ने साझा किया दुर्गासप्तशती का श्लोक, मां अंबिका के सामूहिक कल्याण-मंत्र का अर्थ समझाया

सारांश

नवरात्रि 2026 के दूसरे दिन PM मोदी ने दुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय का श्लोक साझा किया — महिषासुर-वध के बाद देवराज इंद्र द्वारा की गई भगवती-स्तुति का यह अंश सामूहिक कल्याण का सिद्ध मंत्र माना जाता है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 12 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के दूसरे दिन सोशल मीडिया पर संस्कृत सुभाषित साझा किया।
श्लोक श्रीदुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय (शक्रादि स्तुति) से लिया गया है।
यह श्लोक महिषासुर-वध के बाद देवराज इंद्र व देवताओं द्वारा की गई भगवती-स्तुति का अंश है।
इसे 'सिद्ध संपुट मंत्र' के रूप में सामूहिक कल्याण और विश्व शांति के लिए प्रयोग किया जाता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो संयम, त्याग और आत्मबल की देवी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि के दूसरे दिन सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मां भगवती की सर्वव्यापी शक्ति का वर्णन है। यह श्लोक श्रीदुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय — शक्रादि स्तुति (इंद्रकृत स्तुति) — से लिया गया है और सामूहिक कल्याण तथा विश्व शांति के लिए सिद्ध मंत्र के रूप में जाना जाता है।

साझा किया गया श्लोक और उसका भावार्थ

प्रधानमंत्री की ओर से पोस्ट किया गया संस्कृत श्लोक इस प्रकार है: 'देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या। तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः॥'

इसका भावार्थ है — जिन देवी की आत्मशक्ति से यह समग्र संसार व्याप्त है, जो समस्त देवताओं की शक्तियों का समुच्चय-स्वरूप हैं और जिन्हें देवगण तथा महर्षि एकसमान पूजते हैं, उन मां अंबिका को हम भक्तिपूर्वक नमन करते हैं — वे हम सबका कल्याण करें।

श्लोक की पौराणिक पृष्ठभूमि

यह श्लोक उस स्तुति का अंश है जो देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर-वध के उपरांत देवराज इंद्र (शक्र) और समस्त देवताओं ने भयमुक्त होकर भगवती की स्तुति में की थी। दुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय में संकलित यह स्तोत्र आज भी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान रखता है।

गौरतलब है कि इस श्लोक का उपयोग विशेष रूप से 'सिद्ध संपुट मंत्र' के रूप में सामूहिक कल्याण, विश्व रक्षा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

12 अक्टूबर को नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। श्वेत वस्त्र धारण किए, शांत और तेजस्वी स्वरूप वाली मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है।

इन्हें तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इनकी उपासना से मन में संयम, त्याग, वैराग्य, सदाचार और आत्मबल की वृद्धि होती है।

सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में नवरात्रि महोत्सव 2026 धूमधाम से मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक श्लोकों को साझा करना उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति का एक नियमित हिस्सा रहा है, विशेषकर प्रमुख पर्वों के अवसर पर। इस सुभाषित के माध्यम से उन्होंने न केवल आस्था का संदेश दिया, बल्कि श्रीदुर्गासप्तशती जैसे शास्त्रीय ग्रंथ के प्रति सामान्य जन की जिज्ञासा को भी प्रोत्साहित किया है।

आगामी दिनों में नवरात्रि के शेष सात दिन और देवी के अन्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा, और अष्टमी-नवमी पर विशेष अनुष्ठान आयोजित होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन शास्त्रों के प्रति युवा पीढ़ी की जिज्ञासा जगाने में सहायक हो सकता है। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि पर्वों पर इस तरह की पोस्ट अब एक राजनीतिक रूटीन बन चुकी हैं, फिर भी इनकी व्यापक पहुँच और सांस्कृतिक शिक्षण का मूल्य नकारा नहीं जा सकता।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने नवरात्रि 2026 पर कौन सा श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 'देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या...' यह श्लोक साझा किया, जो श्रीदुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय से है। इसका भावार्थ है कि जिस परम शक्ति से समग्र संसार संचालित होता है और जो समस्त देवताओं की शक्तियों का स्वरूप हैं, उन मां अंबिका को भक्तिपूर्वक नमन करते हुए उनसे सबके कल्याण की कामना की जाती है।
यह श्लोक दुर्गासप्तशती के किस अध्याय से है और इसका क्या महत्व है?
यह श्लोक दुर्गासप्तशती के चौथे अध्याय — शक्रादि स्तुति (इंद्रकृत स्तुति) — से लिया गया है। महिषासुर-वध के बाद देवराज इंद्र सहित समस्त देवताओं ने भयमुक्त होकर मां भगवती की यह स्तुति की थी। इसे सामूहिक कल्याण और विश्व शांति के लिए 'सिद्ध संपुट मंत्र' के रूप में भी जाना जाता है।
नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। ये श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, दाहिने हाथ में जप माला और बाएं हाथ में कमंडल रखती हैं। इन्हें तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा के नाम से भी जाना जाता है, और इनकी उपासना से संयम, त्याग, वैराग्य व आत्मबल में वृद्धि मानी जाती है।
इस श्लोक को 'सिद्ध संपुट मंत्र' क्यों कहा जाता है?
इस श्लोक का उपयोग विशेष रूप से सामूहिक कल्याण, विश्व में शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के अनुष्ठानों में 'सिद्ध संपुट मंत्र' के रूप में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अत्यंत प्रभावी माना जाता है क्योंकि यह देवताओं और महर्षियों द्वारा पूज्य मां अंबिका की शक्ति का आह्वान करता है।
PM मोदी नवरात्रि जैसे पर्वों पर सोशल मीडिया पर धार्मिक पोस्ट क्यों साझा करते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक पर्वों पर शास्त्रीय श्लोक और सुभाषित साझा करना उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति का नियमित हिस्सा रहा है। इसके माध्यम से वे आस्था का संदेश देने के साथ-साथ भारत के शास्त्रीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक जन-समुदाय तक पहुँचाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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