अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जगदीश विश्वकर्मा बोले — मोदी के प्रयासों ने योग को दिलाई वैश्विक पहचान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित सामूहिक योग सत्र में भाग लिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक प्रयासों ने भारत की इस प्राचीन विद्या को एक वैश्विक आंदोलन का रूप दे दिया है। यह आयोजन अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) की ओर से नागरिकों के साथ मिलकर किया गया।
साबरमती रिवरफ्रंट पर सामूहिक योगाभ्यास
अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित इस बड़े योग सत्र में बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया। जगदीश विश्वकर्मा ने स्वयं योगाभ्यास में भाग लेते हुए उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की वार्षिक परंपरा के तहत आयोजित हुआ।
मोदी के प्रयासों को श्रेय
कार्यक्रम में बोलते हुए विश्वकर्मा ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की वजह से भारत की प्राचीन विरासत, योग के बारे में जागरूकता पूरी दुनिया में फैली है। इन्हीं प्रयासों के कारण हम 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाते हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की वैश्विक पहल ने भारत की एक सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया है।
योग — शरीर, मन और आत्मा का संगम
विश्वकर्मा ने योग को महज शारीरिक व्यायाम तक सीमित मानने से इनकार करते हुए कहा, "योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक ऐसा तरीका है जो शरीर, मन और आत्मा में संतुलन लाता है।" उन्होंने इसे एक समग्र जीवन-दर्शन बताया जो आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों से निपटने में सहायक है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2015 से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी है।
नियमित योगाभ्यास के फायदे
विश्वकर्मा ने नियमित योग अभ्यास के लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे तनाव में कमी, एकाग्रता में वृद्धि, रोग प्रतिरोधक क्षमता की मज़बूती और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से योग को अपनी दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
नागरिकों से संकल्प की अपील
विश्वकर्मा ने नागरिकों से योग को रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग का नियमित अभ्यास न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी ज़रूरी है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि योग अब केवल आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बन चुका है।